कैबिनेट गठन के 24 घंटे में बवाल, वरिष्ठ नेता के इस्तीफे से कांग्रेस में हड़कंप

कर्नाटक में मंत्रिमंडल विस्तार और विभागों के बंटवारे के बाद कांग्रेस सरकार के भीतर असंतोष खुलकर सामने आ गया है। वरिष्ठ कांग्रेस नेता और विधायक रामलिंगा रेड्डी ने मंत्री पद से इस्तीफा देने की घोषणा कर दी है। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें जिस विभाग का वादा किया गया था, वह नहीं दिया गया, जिसके चलते उन्होंने यह फैसला लिया।
हालांकि, रेड्डी ने साफ किया कि उनका इस्तीफा पार्टी के खिलाफ नहीं है। उन्होंने कहा कि वह कांग्रेस में बने रहेंगे और विधायक के रूप में जनता की सेवा जारी रखेंगे।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताई इस्तीफे की वजह
विभागों के आवंटन के एक दिन बाद आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में रामलिंगा रेड्डी ने कहा कि उनका किसी व्यक्ति से कोई व्यक्तिगत विवाद नहीं है, लेकिन आत्मसम्मान के कारण उन्हें यह कदम उठाना पड़ा।
उन्होंने बताया कि अपना इस्तीफा मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के प्रधान सचिव को एक सहयोगी के माध्यम से भेज दिया गया है। रेड्डी ने कहा कि उन्होंने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि यदि वादा पूरा नहीं हुआ तो वह मंत्री पद स्वीकार नहीं करेंगे।
बेंगलुरु अर्बन डेवलपमेंट विभाग देने का किया गया था वादा
रामलिंगा रेड्डी का दावा है कि जब सिद्धरामैया मुख्यमंत्री बने थे, तब उन्हें बेंगलुरु अर्बन डेवलपमेंट (GBA) विभाग देने का आश्वासन दिया गया था।
उन्होंने कहा, “मैंने उस समय साफ कहा था कि मुझे मंत्री पद की कोई इच्छा नहीं है। बाद में डी.के. शिवकुमार मेरे घर आए और उन्होंने भरोसा दिलाया कि जब उन्हें मुख्यमंत्री बनने का अवसर मिलेगा, तब बेंगलुरु डेवलपमेंट विभाग मुझे सौंपा जाएगा।”
कृष्णा बायरे गौड़ा को मिला पसंदीदा विभाग
72 वर्षीय रामलिंगा रेड्डी को गुरुवार को जल संसाधन मंत्री बनाया गया था। लेकिन जिस बेंगलुरु अर्बन डेवलपमेंट विभाग की वह लंबे समय से मांग कर रहे थे, वह कृष्णा बायरे गौड़ा को सौंप दिया गया।
इस फैसले के बाद रेड्डी की नाराजगी खुलकर सामने आ गई और उन्होंने मंत्री पद छोड़ने का ऐलान कर दिया।
कांग्रेस सरकार के लिए बढ़ सकती हैं मुश्किलें
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि विभागों के बंटवारे को लेकर कांग्रेस के कई नेताओं में असंतोष है। रामलिंगा रेड्डी के इस्तीफे से पार्टी के भीतर गुटबाजी और नेतृत्व पर सवाल खड़े हो सकते हैं।
कर्नाटक की कांग्रेस सरकार के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती नाराज नेताओं को मनाने और संगठन में एकजुटता बनाए रखने की होगी। यदि असंतोष बढ़ता है तो इसका असर सरकार की कार्यशैली और राजनीतिक स्थिरता पर भी पड़ सकता है।



