Mission UP 2027: यूपी में ‘योगी ही चेहरा’, पंकज चौधरी और नए मंत्रियों के सहारे बीजेपी लगाएगी जीत की हैट्रिक? जानिए अंदर की रणनीति

यूपी की सियासत से इस वक्त की सबसे बड़ी इनसाइड स्टोरी सामने आ रही है। 2024 के लोकसभा चुनाव में तगड़ा झटका खाने के बाद, भारतीय जनता पार्टी ने 2027 के ‘महामुकाबले’ के लिए अपनी पूरी रणनीति को बदल दिया है। अगले साल होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को जीतने के लिए बीजेपी ने अखिलेश यादव के ‘PDA’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले को उसी के जाल में घेरने का एक मास्टर प्लान तैयार किया है।

बिहार (2025) और बंगाल (2026) फतह करने के बाद, अब बीजेपी की चुनावी मशीनरी का पूरा ध्यान यूपी में ‘जीत की हैट्रिक’ लगाने पर टिक गया है।

बीते काफी समय से राजनीतिक गलियारों में चल रही तमाम अफवाहों पर विराम लगाते हुए बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने साफ कर दिया है कि 2027 का चुनाव मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के चेहरे और नेतृत्व में ही लड़ा जाएगा।

योगी आदित्यनाथ को आगे रखकर एंटी-इंकंबेंसी को मात देने के लिए सरकार और संगठन में बड़ा बदलाव किया गया है:

  • मंत्रिमंडल का विस्तार: अखिलेश यादव के पीडीए नैरेटिव को काटने के लिए योगी कैबिनेट में नए चेहरों को जगह दी गई है। इसमें पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी और सपा से आए मनोज पांडेय को कैबिनेट मंत्री बनाया गया है।
  • ओबीसी और दलितों पर फोकस: हंसराज विश्वकर्मा, कैलाश राजपूत (OBC), सोमेंद्र तोमर, अजीत सिंह पाल, कृष्णा पासवान और सुरेंद्र दिलेर (दलित चेहरा) को मंत्री बनाकर हर एक बड़े वोट बैंक को सीधा संदेश दिया गया है।
  • संगठन की कमान: यूपी में यादवों के बाद सबसे बड़े ओबीसी ब्लॉक कुर्मी समाज को साधने के लिए केंद्रीय मंत्री पंकज चौधरी को पहले ही यूपी बीजेपी का नया अध्यक्ष बनाया जा चुका है।

2024 के लोकसभा चुनाव में विपक्ष के ‘संविधान बदलने’ वाले नैरेटिव के कारण बीजेपी दलितों के लिए आरक्षित 17 सीटों में से सिर्फ 8 पर सिमट गई थी। 2027 में इस गलती को सुधारने के लिए बीजेपी ने जमीन पर काम शुरू कर दिया है। उत्तर प्रदेश में करीब 21 फीसदी दलित और 40-50 फीसदी ओबीसी आबादी है। बीजेपी रणनीतिकारों का दावा है कि इस बार विपक्ष को मतदाताओं को भ्रमित करने का मौका नहीं मिलेगा।

तमाम सेफोलॉजिस्ट और इंटरनल सर्वे के मुताबिक, जमीन पर योगी सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस पॉलिसी’ और महिला सुरक्षा सबसे बड़ा एक्स-फैक्टर बनकर उभरी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का वह बयान आज भी जमीन पर गूंज रहा है:

“कोई भी गुंडा, अपराधी या माफिया अगर किसी बेटी को चौराहे पर छेड़ेगा, तो यकीन मानिए अगले चौराहे पर उसका मुकाबला ‘यमराज’ से होगा।”

अपराधियों के अवैध कब्जों पर बुलडोजर कार्रवाई और ताबड़तोड़ एनकाउंटर के दम पर बीजेपी आधी आबादी (महिला वोटर्स) के बीच अपनी पकड़ को समाजवादी पार्टी के मुकाबले बेहद मजबूत मान रही है।

बीजेपी के लिए 2027 की यह लड़ाई इसलिए भी अहम है क्योंकि इसका सीधा असर 2029 के लोकसभा चुनाव पर पड़ेगा। डिफेंस कॉरिडोर में सेना के हथियार बनना, सिंगापुर और जापान से आया खरबों का निवेश और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर—इन विकास कार्यों को बीजेपी ‘राष्ट्रवाद और सुशासन’ के नैरेटिव के साथ जनता के बीच ले जा रही है।

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