US-Iran Crisis: ‘परमाणु बम भूल जाओ, तभी हटेगी नाकाबंदी’— सिचुएशन रूम से ट्रंप का ईरान को अल्टीमेटम, थर्राया होर्मुज स्ट्रेट

वाशिंगटन / तेहरान। मिडिल ईस्ट में जारी भीषण तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बेहद चौंकाने वाला और बड़ा रणनीतिक ऐलान किया है। राष्ट्रपति ट्रंप ने साफ किया है कि अमेरिका रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से नौसैनिक नाकाबंदी (Naval Blockade) हटाने के लिए तैयार है, लेकिन इसके बदले ईरान को परमाणु हथियारों का सपना हमेशा के लिए छोड़ना होगा।
आज शुक्रवार, 29 मई 2026 को वाशिंगटन में एक हाई-लेवल मीटिंग की जानकारी देते हुए ट्रंप ने कहा कि वह इस समय व्हाइट हाउस के ‘सिचुएशन रूम’ (Situation Room) में हैं, ताकि ईरान और युद्ध को खत्म करने वाली अंतिम डील पर “आखरी फैसला” ले सकें। गौरतलब है कि दोनों देशों के बीच 60 दिनों के सीजफायर (युद्धविराम) का एक ड्राफ्ट तैयार हुआ था, लेकिन उस पर ट्रंप और ईरानी नेतृत्व की अंतिम मुहर लगनी बाकी है।
ट्रंप की ‘ट्रुथ सोशल’ पर कड़क शर्तें: ‘परमाणु धूल’ को करना होगा नष्ट
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर उन शर्तों की पूरी लिस्ट सार्वजनिक कर दी है, जिसे माने बिना ईरान को युद्ध से मुक्ति नहीं मिलेगी
- नो न्यूक्लियर बम: ईरान को आधिकारिक तौर पर यह लिखित में स्वीकार करना होगा कि उसके पास कभी भी कोई परमाणु हथियार या बम नहीं होगा।
- फ्री शिपिंग ट्रैफिक: होर्मुज स्ट्रेट को दोनों तरफ से बिना किसी रोक-टोक और बिना किसी टैक्स (टोल) के अंतरराष्ट्रीय जहाजों के लिए तुरंत खोलना होगा।
- समुद्री बारूद का खात्मा: समुद्र में बिछाई गई सभी वॉटर माइंस (बम) को नष्ट करना होगा। ट्रंप ने बताया कि अमेरिकी अंडरवाटर माइन स्वीपर्स ने विस्फोटों के जरिए कई माइंस हटा दी हैं, बची हुई माइंस को ईरान तुरंत साफ करेगा।
- परमाणु मलबे की सफाई: 11 महीने पहले अमेरिकी B2 बॉम्बर विमानों के हमले में जमीनदोज हुए पहाड़ों के नीचे दबे ‘एनरिच्ड मटीरियल’ (परमाणु धूल) को अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) की निगरानी में पूरी तरह नष्ट करना होगा।
फंसे जहाजों के लिए ट्रंप का संदेश: नाकाबंदी हटने के बाद स्ट्रेट में फंसे कमर्शियल जहाजों को घर लौटने की अनुमति देते हुए ट्रंप ने मजाकिया लहजे में कहा, “अपने परिवारों और पत्नियों को मेरी तरफ से, आपके पसंदीदा राष्ट्रपति की तरफ से हेलो कहना!”
‘हमें बातों पर नहीं, मिसाइलों पर भरोसा’- ईरान का पलटवार
दूसरी तरफ, वाशिंगटन की इस कड़क घेराबंदी के बाद ईरान के तेवर भी बेहद तीखे और आक्रामक नजर आ रहे हैं। ईरान के पार्लियामेंट्री स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबफ के सोशल मीडिया अकाउंट से अमेरिकी शर्तों को ठेंगा दिखाते हुए एक बेहद रहस्यमयी और आक्रामक पोस्ट शेयर की गई।
गालिबफ ने दो टूक लिखा: “हम बातचीत की मेज पर बैठकर नहीं, बल्कि अपनी मिसाइलों के दम पर रियायतें हासिल करते हैं। बातचीत में तो हम सिर्फ सामने वाले को अपनी बात समझाते हैं। हमें अमेरिका की किसी गारंटी या बातों पर रत्ती भर भरोसा नहीं है – हमारे लिए सिर्फ उनका एक्शन ही पैमाना है।”
ईरानी स्पीकर ने डराने वाले लहजे में आगे कहा कि किसी भी सीजफायर या समझौते का असली विजेता वही होता है, जो अगले ही दिन से दोबारा युद्ध में कूदने के लिए बेहतर तरीके से तैयार रहता है।
ओमान के साथ ईरान की लामबंदी
इस बीच, खाड़ी देशों में कूटनीतिक हलचल भी चरम पर पहुंच गई है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने एक्स (Twitter) पर जानकारी दी है कि उन्होंने ओमान के विदेश मंत्री से फोन पर लंबी बात की है। अराघची ने साफ किया कि अमेरिका या किसी भी अन्य महाशक्ति से मिलने वाली सैन्य धमकी के सामने ईरान, ओमान की सुरक्षा और एकजुटता के साथ मजबूती से खड़ा है।
अब पूरी दुनिया की नजरें सिचुएशन रूम से निकलने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस “आखिरी फैसले” पर टिकी हैं, जो यह तय करेगा कि खाड़ी देशों में शांति होगी या बारूद फिर से बरसेगा।



