स्ट्रेट ऑफ होर्मुज संकट: 30 देशों की बैठक, समुद्री रास्ता खोलने की बड़ी कोशिश

जुबिली न्यूज डेस्क
दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में से एक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनातनी ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को गंभीर संकट में डाल दिया है।
होर्मुज पर तनाव क्यों बढ़ा?
रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी के बाद ईरान ने इस समुद्री मार्ग पर आवाजाही को बाधित कर दिया है। इससे तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित हुई है, जिसका असर कई देशों की ऊर्जा जरूरतों पर पड़ रहा है।
30 देशों की आपात बैठक
इस स्थिति को संभालने के लिए बुधवार से लंदन में 30 से ज्यादा देशों के सैन्य रणनीतिकार एक बैठक कर रहे हैं। इस बैठक का नेतृत्व ब्रिटेन रक्षा मंत्रालय कर रहा है।
इसका उद्देश्य होर्मुज में समुद्री आवागमन को सुरक्षित करना और भविष्य के लिए एक ठोस सैन्य रणनीति तैयार करना है।
बैठक में क्या चर्चा होगी?
ब्रिटेन के रक्षा मंत्री जॉन हीली के मुताबिक, बैठक में इन मुद्दों पर फोकस होगा:
- समुद्री सुरक्षा रणनीति
- कमांड और कंट्रोल सिस्टम
- सैन्य तैनाती की योजना
- जहाजों की सुरक्षित आवाजाही
किन देशों के शामिल होने की संभावना?
हालांकि आधिकारिक सूची जारी नहीं हुई है, लेकिन संभावित देशों में शामिल हो सकते हैं:
- यूरोप: ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली
- एशिया-प्रशांत: जापान, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड
- खाड़ी क्षेत्र: UAE और अन्य देश
- नाटो देश: नॉर्वे, स्वीडन, पोलैंड आदि
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बरकरार
संयुक्त राज्य अमेरिका ने हालांकि ईरान के साथ सीजफायर बढ़ाने की बात कही है, लेकिन होर्मुज में नाकेबंदी हटाने पर अभी कोई फैसला नहीं लिया गया है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर जारी संकट अब वैश्विक स्तर पर चिंता का विषय बन गया है। 30 देशों की यह बैठक इस रणनीतिक जलमार्ग को सुरक्षित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।



