Strait of Hormuz” फिर बंद, ट्रंप ने दी बमबारी की चेतावनी

दुबई/वॉशिंगटन: दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्ग, ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (Strait of Hormuz) को लेकर जारी सस्पेंस अब खतरनाक मोड़ पर आ गया है। शुक्रवार को जिस रास्ते को खोलने के ऐलान से दुनिया ने राहत की सांस ली थी, शनिवार होते-होते वहां फिर से बारूद की गंध फैल गई है। ईरान की ‘इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स’ (IRGC) ने इस समुद्री रास्ते को दोबारा बंद करने का एलान कर दिया है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं।
उम्मीदों पर भारी पड़ा ट्रंप का रुख
शुक्रवार को जब ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सोशल मीडिया पर रास्ता खोलने का संकेत दिया, तो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसका स्वागत किया था। इस खबर मात्र से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में 10% की भारी गिरावट दर्ज की गई। लेकिन यह शांति अल्पकालिक साबित हुई।
जैसे ही ट्रंप ने स्पष्ट किया कि जब तक कोई अंतिम समझौता नहीं होता, अमेरिका ईरान के बंदरगाहों की नाकेबंदी (Blockade) जारी रखेगा, तेहरान का रुख कड़ा हो गया। ईरान के भीतर भी विदेश मंत्री के बयान को लेकर अंतर्विरोध दिखे और कट्टरपंथी धड़े ने इस पर आपत्ति जताई।
गनबोट्स की फायरिंग और सुप्रीम लीडर की चेतावनी
शनिवार को हालात तब और बिगड़ गए जब ओमान के तट से महज 20 मील दूर दो व्यापारिक जहाजों पर ईरानी गनबोट्स ने फायरिंग कर दी। IRGC ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि:
- होर्मुज स्ट्रेट के पास आने वाले हर जहाज को ‘दुश्मन का मददगार’ माना जाएगा।
- अमेरिकी नाकेबंदी खत्म होने तक पाबंदियां जारी रहेंगी।
- ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई ने भी हुंकार भरते हुए कहा कि उनकी नौसेना दुश्मनों को ‘करारी हार’ देने के लिए तैयार है।
22 अप्रैल: कयामत की तारीख?
दोनों देशों के बीच 8 अप्रैल को हुआ दो हफ्तों का युद्धविराम (Ceasefire) अब अपने अंतिम पड़ाव पर है।
- अल्टीमेटम: राष्ट्रपति ट्रंप ने साफ कर दिया है कि यदि 22 अप्रैल तक समझौता नहीं हुआ, तो अमेरिका दोबारा बमबारी शुरू कर सकता है।
- ईरान की तैयारी: पलटवार में ईरान ने अपनी नई मिसाइल तकनीक (मई 2026 मॉडल) के इस्तेमाल की धमकी दी है।
विशेषज्ञों का मानना है: “यह केवल दो देशों की जंग नहीं है, बल्कि दुनिया की एनर्जी सप्लाई चेन पर कब्जे की लड़ाई है। अगर 22 अप्रैल तक कूटनीति विफल रही, तो खाड़ी क्षेत्र में एक बड़ा सैन्य टकराव अनिवार्य लग रहा है।”



