महिला आरक्षण 131वां संशोधन बिल लोकसभा में गिरा; अब 2034 तक करना पड़ सकता है इंतजार

संसद के विशेष सत्र में एक बड़े राजनीतिक उलटफेर के तहत 131वां संविधान संशोधन विधेयक लोकसभा में गिर गया है। सरकार को इस बिल को पारित कराने के लिए आवश्यक दो-तिहाई बहुमत प्राप्त नहीं हो सका, जिसके बाद अब महिलाओं को 33% आरक्षण मिलने की प्रतीक्षा और लंबी हो गई है।

वोटिंग का गणित: क्यों गिरा बिल?

संविधान संशोधन होने के कारण सदन में उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के दो-तिहाई समर्थन की आवश्यकता थी।

  • कुल मतदान: 528 सांसद
  • पक्ष में वोट: 298
  • विपक्ष में वोट: 230
  • जादुई आंकड़ा (2/3 बहुमत): 352 वोट
  • परिणाम: बिल 54 वोटों के अंतर से गिर गया।

क्या था इस नए बिल (131वां संशोधन) का उद्देश्य?

सरकार ने 2023 के मूल कानून (‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’) की प्रक्रिया को तेज करने के लिए यह नया विधेयक पेश किया था। इसके मुख्य प्रावधान थे:

  1. सीटों में वृद्धि: संसद की सीटों को 543 से बढ़ाकर 850 करना।
  2. जल्द कार्यान्वयन: जनगणना और परिसीमन (Delimitation) की लंबी प्रतीक्षा के बिना ही 2029 के चुनावों में आरक्षण लागू करना।

राहुल गांधी की प्रतिक्रिया

विपक्ष ने इस बिल का कड़ा विरोध किया। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मतदान के बाद कहा, “हमने संविधान पर हुए हमले को विफल कर दिया है। यह महिला आरक्षण नहीं, बल्कि भारत की राजनीतिक संरचना को मनमाने ढंग से बदलने की कोशिश थी।”

बड़ा सवाल: क्या अब महिलाओं को आरक्षण नहीं मिलेगा?

इसका उत्तर ‘हाँ’ और ‘ना’ दोनों में है:

  • आरक्षण सुरक्षित है: 2023 में पारित ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ (106वां संशोधन) पहले से ही कानून है और 16 अप्रैल 2026 से प्रभावी हो चुका है। महिलाओं का 33% हक संवैधानिक रूप से सुरक्षित है।
  • समय सीमा बढ़ी: नया बिल गिरने का मतलब है कि अब ‘शॉर्टकट’ का रास्ता बंद हो गया है। अब आरक्षण पुरानी शर्तों के अनुसार ही मिलेगा।

अब कब तक मिलेगा आरक्षण? (संभावित टाइमलाइन)

अब आरक्षण की प्रक्रिया जनगणना और परिसीमन से जुड़ गई है:

  • शर्त 1: अगली जनगणना (Census) पूरी होनी अनिवार्य है।
  • शर्त 2: जनगणना के आंकड़ों के आधार पर परिसीमन (सीटों का निर्धारण) होगा।
  • अनुमान: जानकारों के अनुसार, अब यह आरक्षण 2034 या उसके बाद के आम चुनावों में ही पूरी तरह लागू हो पाएगा।

सरकार का ‘प्लान B’ फेल

सरकार चाहती थी कि 2029 तक महिलाओं को संसद में जगह मिल जाए, लेकिन विपक्षी एकजुटता और दो-तिहाई बहुमत की कमी ने इस योजना पर पानी फेर दिया है। अब गेंद लंबी प्रशासनिक प्रक्रियाओं के पाले में है।

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