लोकसभा में गिरा महिला आरक्षण संविधान संशोधन बिल सरकार को नहीं मिला दो-तिहाई बहुमत, 54 वोट कम पड़े

भारतीय संसदीय इतिहास में शुक्रवार का दिन बेहद गहमागहमी भरा रहा। लोकसभा में महिला आरक्षण और सीटों के परिसीमन से जुड़ा संविधान संशोधन विधेयक वोटिंग के दौरान गिर गया। सत्ताधारी गठबंधन (NDA) सदन में जरूरी दो-तिहाई बहुमत (Special Majority) जुटाने में विफल रहा। बिल के पक्ष में 298 वोट पड़े, जबकि इसे पारित कराने के लिए 352 मतों की आवश्यकता थी।
विधेयक के गिरते ही संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने इससे जुड़े अन्य दो बिलों को भी आगे न बढ़ाने का ऐलान किया।
वोटिंग का गणित: क्यों गिरा बिल?
संविधान संशोधन के लिए सदन में मौजूद और मतदान करने वाले सदस्यों का दो-तिहाई समर्थन अनिवार्य होता है।
- कुल पड़े वोट: 528
- पक्ष में वोट: 298
- विरोध में वोट: 230
- बहुमत की कमी: बिल पारित होने के आंकड़े (352) से 54 वोट कम रह गए।
स्पीकर ओम बिरला ने स्पष्ट किया कि दो-तिहाई बहुमत न मिलने के कारण इस बिल पर आगे की कार्यवाही संभव नहीं है और यह विचार के स्तर पर ही निरस्त हो गया।
अमित शाह बनाम राहुल गांधी: सदन में तीखी तकरार
बिल पर चर्चा के दौरान पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली।
अमित शाह का प्रहार: गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष, विशेषकर कांग्रेस पर महिला आरक्षण को लटकाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा:
“देश की महिलाएं देख रही हैं कि उनके रास्ते का रोड़ा कौन है। विपक्ष सिर्फ विरोध के लिए विरोध कर रहा है। हमने 2025 में जाति जनगणना कराने का निर्णय लिया है और परिसीमन के जरिए सीटें बढ़ाकर महिलाओं को हक देना चाहते हैं, लेकिन कांग्रेस इसे रोकना चाहती है।”
राहुल गांधी का पलटवार: विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने इस बिल को ‘चुनावी नक्शा बदलने की साजिश’ करार दिया। उन्होंने कहा:
“यह महिला सशक्तिकरण का बिल नहीं, बल्कि एससी, एसटी और ओबीसी के अधिकार छीनने का एजेंडा है। सरकार डरी हुई है और सत्ता हथियाने के लिए दक्षिण और उत्तर भारत के बीच भेदभाव पैदा कर रही है।”
विपक्ष की आपत्तियां और अखिलेश यादव का बयान
विपक्षी दलों ने बिल में ‘परिसीमन’ (Delimitation) की शर्त जोड़ने पर कड़ी आपत्ति जताई। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने सरकार की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए कहा कि बीजेपी अगर लिखकर भी दे दे कि अगला प्रधानमंत्री महिला होगी, तब भी उन पर भरोसा नहीं किया जा सकता। विपक्षी नेताओं का तर्क था कि सरकार जनगणना और परिसीमन के बहाने आरक्षण को 2029 के बाद तक टालना चाहती है।
संसद परिसर में विरोध प्रदर्शन
बिल गिरने के तुरंत बाद बीजेपी और एनडीए की महिला सांसदों ने संसद के मकर द्वार पर विपक्ष के खिलाफ प्रदर्शन शुरू कर दिया।
- अगली रणनीति: बीजेपी कार्यकर्ताओं ने 18 अप्रैल से ‘इंडिया ब्लॉक’ के नेताओं के घरों के बाहर देशव्यापी प्रदर्शन करने का ऐलान किया है।
- राज्यसभा अपडेट: इसी बीच, राज्यसभा में हरिवंश नारायण सिंह को तीसरी बार निर्विरोध उपसभापति चुना गया, जिसके लिए पीएम मोदी और मल्लिकार्जुन खड़गे ने उन्हें बधाई दी।


