GLP-1 आधारित दवाओं का असर: युवाओं में तेजी से घटा वजन, स्टडी में बड़ा खुलासा

नई दिल्ली – भारत में पहली बार वास्तविक परिस्थितियों (real-world study) में की गई एक नई रिसर्च में यह सामने आया है कि नई पीढ़ी की वजन घटाने वाली दवाएं युवाओं और बिना डायबिटीज वाले लोगों पर ज्यादा असरदार साबित हो रही हैं। यह स्टडी Indian Journal of Endocrinology and Metabolism में प्रकाशित हुई है।
किन दवाओं पर हुई स्टडी?
इस रिसर्च में 150 ओवरवेट और मोटापे से जूझ रहे लोगों को शामिल किया गया, जिन्हें 6 महीने तक इंजेक्शन के जरिए ये दवाएं दी गईं:
- Semaglutide
- Tirzepatide
ये दोनों दवाएं GLP-1 therapy से जुड़ी हैं, जिन्हें पहले Type 2 Diabetes के इलाज के लिए बनाया गया था, लेकिन अब मोटापे के इलाज में भी इस्तेमाल हो रहा है।
कितना घटा वजन?
स्टडी के प्रमुख निष्कर्ष:
- 41% लोगों का वजन 10% से ज्यादा घटा
- औसतन वजन में 8.2% की कमी दर्ज की गई
डायबिटीज और नॉन-डायबिटीज में फर्क
- बिना डायबिटीज वाले लोगों में वजन घटा: ~11.21%
- डायबिटीज मरीजों में: ~5.48%
इससे पता चलता है कि नॉन-डायबिटिक लोगों में इन दवाओं का असर ज्यादा तेज है।
कौन सी दवा ज्यादा असरदार?
- Tirzepatide: 8.60% औसत वजन कम
- Semaglutide: 5.62% औसत वजन कम
यानी टिरजेपेटाइड का असर अपेक्षाकृत ज्यादा देखा गया।
उम्र का भी पड़ा असर
स्टडी में पाया गया कि:
- युवाओं में वजन तेजी से घटता है
- नए मरीज (जिन्होंने पहले GLP-1 थेरेपी नहीं ली) ज्यादा तेजी से रिस्पॉन्ड करते हैं
- 10% से ज्यादा वजन घटाने में औसतन 9.5 महीने लगे
एक्सपर्ट्स क्या कहते हैं?
विशेषज्ञों के अनुसार, इन दवाओं का पूरा असर आमतौर पर 12 से 18 महीनों में देखने को मिलता है।
ध्यान देने वाली बातें
हालांकि ये दवाएं असरदार दिख रही हैं, लेकिन:
- इन्हें डॉक्टर की सलाह के बिना नहीं लेना चाहिए
- हर मरीज पर असर अलग-अलग हो सकता है
- साइड इफेक्ट्स और लंबी अवधि के असर पर और रिसर्च की जरूरत है
निष्कर्ष
भारत में हुई यह नई स्टडी बताती है कि आधुनिक GLP-1 आधारित दवाएं मोटापे के इलाज में गेमचेंजर साबित हो सकती हैं—खासकर युवाओं और नॉन-डायबिटिक लोगों के लिए।



