मिडिल-ईस्ट संकट के बीच भारत के मददगार देश पर आफत, वैश्विक तेल सप्लाई ठप

जुबिली न्यूज डेस्क

मिडिल-ईस्ट में जारी तनाव और Strait of Hormuz के बंद होने से वैश्विक तेल सप्लाई प्रभावित हुई, जिसका असर भारत पर भी साफ दिखा। इस मुश्किल समय में अफ्रीकी देश Angola भारत के लिए राहत बनकर सामने आया और तेल निर्यात बढ़ाकर सप्लाई बनाए रखने में मदद की।

हालांकि अब यही देश खुद संकट में फंस गया है। अंगोला के अहम Lobito Corridor से गुजरने वाली रेलवे लाइन को बाढ़ के कारण अनिश्चितकाल के लिए बंद करना पड़ा है।

रेल ऑपरेटर Lobito Atlantic Railway के अनुसार, भारी बारिश के चलते कुबाल और कैम्बाम्बो स्टेशनों के बीच हैलो नदी पर बना पुल और बेंग्वेला के पास कैवाको नदी का पुल जलमग्न हो गया। इससे रेल यातायात पूरी तरह रोक दिया गया है।

लोबिटो कॉरिडोर अफ्रीका के सबसे महत्वपूर्ण ट्रेड रूट्स में से एक है। यह Democratic Republic of the Congo (DRC) की खदानों से तांबा और कोबाल्ट जैसे जरूरी खनिजों को अटलांटिक तट स्थित लोबिटो पोर्ट तक पहुंचाने का सबसे तेज मार्ग है।

2022 में अंगोला सरकार ने Trafigura, Mota-Engil और Vecturis जैसे कंपनियों के कंसोर्टियम को इस रेलवे लाइन के संचालन के लिए 30 साल की रियायत दी थी।

यह रेलवे लाइन सिर्फ खनिज ही नहीं, बल्कि सल्फर, कृषि उत्पाद और औद्योगिक सामान के परिवहन में भी अहम भूमिका निभाती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के चलते दक्षिणी अफ्रीका में बाढ़ की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं, जिससे इस तरह के महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर पर खतरा बढ़ गया है।

India के लिए अंगोला कच्चे तेल का एक अहम सप्लायर है और 2026 में यह तीसरे स्थान पर रहा। भारत और अंगोला के संबंध लंबे समय से मजबूत रहे हैं।

इतिहास के मुताबिक, दोनों देशों के संबंध Portugal के औपनिवेशिक दौर से जुड़े हैं। भारत ने अंगोला की आजादी का समर्थन किया था, जिसके बाद 1985 में दोनों देशों के बीच औपचारिक राजनयिक संबंध स्थापित हुए।

लोबिटो कॉरिडोर के बंद होने से खनिज आपूर्ति और क्षेत्रीय व्यापार पर असर पड़ सकता है। साथ ही, अगर हालात लंबे समय तक ऐसे ही बने रहते हैं, तो वैश्विक सप्लाई चेन और भारत जैसे देशों की ऊर्जा सुरक्षा पर भी असर पड़ने की आशंका है।

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