महाविनाश की ओर मिडिल ईस्ट: इस्लामाबाद वार्ता फ्लॉप, ट्रंप की ‘ईरानी सभ्यता’ मिटाने वाली धमकी से कांपी दुनिया

मुख्य बिंदु (Key Highlights)

  • इस्लामाबाद वार्ता विफल: किसी भी मुद्दे पर सहमति नहीं बन पाई।
  • हवाई हमले की तैयारी: अमेरिकी युद्धपोत पूरी तरह से हथियारों से लैस।
  • इन्फ्रास्ट्रक्चर पर टारगेट: बिजली घर और पुल अमेरिका के प्राथमिक निशाने पर।
  • लेबनान संकट: इजराइली हमलों में तेजी आने की संभावना।

वॉशिंगटन/तेहरान: जिस बात का डर था, वही हुआ। इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच शांति की आखिरी उम्मीद भी दम तोड़ गई है। बातचीत के पूरी तरह विफल होने के बाद अब दो हफ्ते के अस्थायी ‘सीजफायर’ (संघर्ष विराम) के किसी भी पल खत्म होने का खतरा पैदा हो गया है। जानकारों का मानना है कि अब कूटनीति के शब्द शांत होंगे और हथियारों की गूँज सुनाई देगी।

1. राष्ट्रपति ट्रंप का ‘प्लान बी’: न्यूक्लियर साइट्स और पावर प्लांट्स निशाने पर

शांति वार्ता फेल होते ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का बेहद आक्रामक रूप सामने आया है। ‘न्यूयॉर्क पोस्ट’ को दिए इंटरव्यू में ट्रंप ने साफ कर दिया है कि अमेरिका अब और इंतजार नहीं करेगा।

  • आधुनिक हथियारों की तैनाती: अमेरिकी युद्धपोतों को अत्याधुनिक मिसाइलों और हथियारों से लैस कर दिया गया है।
  • भीषण तबाही की चेतावनी: ट्रंप ने न केवल ईरान के पावर प्लांट्स, पुलों और बुनियादी ढांचे को ध्वस्त करने की बात कही है, बल्कि ‘ईरानी सभ्यता’ को मिटाने तक की सीधी धमकी दे डाली है।
  • ग्राउंड ऑपरेशन की आहट: इस बार अमेरिका केवल हवाई हमलों तक सीमित नहीं रहेगा; ईरान की न्यूक्लियर साइट्स को नेस्तनाबूद करने के लिए जमीन पर भी ऑपरेशन शुरू किया जा सकता है।

2. होर्मुज स्ट्रेट: समुद्री युद्ध की तैयारी

होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने से ईरान के इनकार के बाद ट्रंप ने सैन्य कार्रवाई के संकेत दिए हैं। अमेरिकी सैनिकों ने अपने गोला-बारूद का स्टॉक फिर से भर लिया है और वे ‘विजय’ के आदेश का इंतजार कर रहे हैं। जब तक ईरान वाशिंगटन की शर्तों पर समझौता नहीं करता, अमेरिकी नौसेना इस इलाके को घेर कर रखेगी।

3. लेबनान में बढ़ता रक्तपात: नेतन्याहू की रणनीति सफल?

इधर, इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू शुरू से ही इस सीजफायर के खिलाफ थे। ईरान की शर्त थी कि लेबनान में हमले रुकें, लेकिन इजराइल ने शनिवार को भी दक्षिणी लेबनान पर बमबारी जारी रखी, जिसमें 18 लोग मारे गए।

  • अब तक इस युद्ध में 2,000 से अधिक लोग जान गंवा चुके हैं।
  • अमेरिका-ईरान वार्ता टूटने का सबसे बुरा असर अब लेबनान और हिजबुल्लाह पर पड़ना तय है, क्योंकि इजराइल को अब अमेरिकी समर्थन के साथ और खुली छूट मिलने के आसार हैं।

4. क्या अब केवल जंग ही रास्ता है?

ईरान के अड़ियल रुख और ट्रंप की विनाशकारी चेतावनियों ने दुनिया को तीसरे विश्व युद्ध जैसी स्थिति के करीब लाकर खड़ा कर दिया है। तेहरान में तबाही का मंजर कभी भी शुरू हो सकता है। अब सवाल यह नहीं है कि जंग होगी या नहीं, बल्कि सवाल यह है कि जंग किस घंटे शुरू होगी?

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