सीजफायर के बीच ट्रंप की ईरान को धमकी: शर्तें टूटीं तो “अभूतपूर्व हमला”

जुबिली न्यूज डेस्क
डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ हुए दो सप्ताह के सीजफायर के बीच बड़ा बयान दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने साफ कहा है कि जब तक अंतिम समझौता नहीं हो जाता, तब तक अमेरिकी सेना ईरान और उसके आसपास तैनात रहेगी।
ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर पोस्ट कर ईरान को कड़ी चेतावनी दी है।
“शर्तें टूटीं तो होगा बड़ा हमला”
ट्रंप ने अपने पोस्ट में लिखा कि अमेरिकी जहाज, विमान, सैन्यकर्मी और हथियार तब तक तैनात रहेंगे जब तक सीजफायर की शर्तों का पूरी तरह पालन नहीं होता।
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर समझौते का उल्लंघन हुआ तो अमेरिका “अभूतपूर्व” कार्रवाई करेगा।
उनके शब्दों में, अगर अंतिम समझौता नहीं होता, तो “ऐसी कार्रवाई होगी जो पहले कभी नहीं देखी गई।”
होर्मुज स्ट्रेट और परमाणु शर्तें बनीं अहम
ट्रंप ने यह भी दोहराया कि होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह चालू रखना ईरान की जिम्मेदारी है।
इसके साथ ही:
- ईरान को परमाणु हथियार विकसित नहीं करने होंगे
- तेल और गैस आपूर्ति बाधित नहीं होनी चाहिए
- सभी अंतरराष्ट्रीय शर्तों का पालन जरूरी होगा
मिडिल ईस्ट में तनाव बरकरार
सीजफायर के बावजूद मिडिल ईस्ट में तनाव कम नहीं हुआ है। इजरायल ने लेबनान में बड़े पैमाने पर हमले किए हैं, जिनमें सैकड़ों लोगों के मारे जाने और हजारों के घायल होने की खबर है। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने साफ कहा है कि लेबनान इस सीजफायर समझौते का हिस्सा नहीं है।
ईरान की चेतावनी: समझौता रद्द कर सकते हैं
वहीं ईरान ने लेबनान पर हमले रोकने की मांग की है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने चेतावनी दी कि अगर इजरायल ने हमले नहीं रोके, तो ईरान सीजफायर समझौते को रद्द कर सकता है।
उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि अमेरिका को “सीजफायर या युद्ध” में से एक विकल्प चुनना होगा।
अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर के बावजूद हालात बेहद नाजुक बने हुए हैं। ट्रंप की कड़ी चेतावनी, होर्मुज जलडमरूमध्य की अहमियत और इजरायल-लेबनान तनाव—ये सभी संकेत देते हैं कि मिडिल ईस्ट में शांति अभी दूर है।
आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि क्या यह सीजफायर स्थायी शांति की ओर बढ़ता है या फिर एक बड़े संघर्ष की शुरुआत बनता है।



