क्या अब जेनेवा में सुलझेगा अमेरिका-ईरान का ‘डेडलॉक’?

इस्लामाबाद/वॉशिंगटन: पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में आयोजित अमेरिका और ईरान के बीच पहले दौर की शांति वार्ता बिना किसी ठोस नतीजे के समाप्त हो गई है। इस विफलता का सबसे बड़ा प्रहार मध्य पूर्व (West Asia) में सीजफायर की उम्मीदों पर पड़ा है। वार्ता टूटने के बाद अमेरिका द्वारा होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) पर की गई सैन्य नाकेबंदी ने वैश्विक तेल बाजार और कूटनीतिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है।

परमाणु कार्यक्रम पर अड़ी सुई: 5 बनाम 20 साल का पेच

सूत्रों के मुताबिक, बातचीत की राह में सबसे बड़ी बाधा ईरान का परमाणु कार्यक्रम बना।

  • ईरान का प्रस्ताव: तेहरान ने अगले 5 वर्षों के लिए यूरेनियम संवर्धन (Uranium Enrichment) रोकने का प्रस्ताव रखा है।
  • अमेरिका की मांग: बाइडेन-ट्रंप प्रशासन के संक्रमण काल के बीच अमेरिका इस रोक को कम से कम 20 साल तक खींचना चाहता है। इसी असहमति के कारण इस्लामाबाद में चल रही चर्चा अनिश्चितता के घेरे में आ गई है।

होर्मुज स्ट्रेट पर नाकेबंदी: सऊदी और चीन की चिंताएं

अमेरिका ने होर्मुज स्ट्रेट पर ‘आर्थिक आतंकवाद’ और सुरक्षा का हवाला देते हुए नाकेबंदी (Blockade) कर दी है। इसका सीधा असर इन देशों पर पड़ रहा है:

  1. सऊदी अरब: चीन को तेल निर्यात करने वाला दूसरा सबसे बड़ा देश सऊदी अरब अब दोहरी मार झेल रहा है। एक तरफ ईरानी हमलों का डर और दूसरी तरफ अमेरिकी नाकेबंदी से उसके एक्सपोर्ट का ठप होना।
  2. चीन: बीजिंग ने अमेरिकी कदम को ‘गैर-जिम्मेदाराना’ करार दिया है। हालांकि, शिपिंग डेटा के अनुसार, एक प्रतिबंधित चीनी टैंकर ‘रिच स्टारी’ अमेरिकी घेरेबंदी को तोड़कर बाहर निकलने में कामयाब रहा है।
  3. भारत: इजरायल के विदेश मंत्री गिदोन सार ने भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर से बात कर ‘नेविगेशन की आजादी’ सुनिश्चित करने पर जोर दिया है।

ईरान का ‘मुआवजा’ कार्ड और अरब देशों को चेतावनी

ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, तेहरान ने पांच अरब देशों से मुआवजे की मांग की है। ईरान का आरोप है कि इन देशों ने अपनी जमीन का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ अमेरिकी और इजरायली हमलों के लिए होने दिया। यह कदम खाड़ी देशों के बीच आपसी तनाव को और बढ़ा सकता है।

क्या जेनेवा या तुर्की में होगी अगली मुलाकात?

भले ही पहला दौर विफल रहा हो, लेकिन कूटनीति के दरवाजे पूरी तरह बंद नहीं हुए हैं।

  • 16 अप्रैल की तारीख: चर्चा है कि 16 अप्रैल को दूसरे दौर की वार्ता हो सकती है।
  • संभावित स्थान: पाकिस्तान ने फिर से मेजबानी का प्रस्ताव दिया है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि अगली बैठक जेनेवा (स्वट्जरलैंड) या तुर्की में हो सकती है।
  • रूस की भूमिका: रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने भी ईरानी समकक्ष से बात कर संकट सुलझाने में मध्यस्थता की पेशकश की है।

बाजार पर असर: बढ़ सकते हैं तेल के दाम

अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के प्रमुख फतिह बिरोल और अमेरिकी ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट ने चेतावनी दी है कि जब तक होर्मुज स्ट्रेट सामान्य नहीं होता, तब तक दुनिया भर में तेल की कीमतें बढ़ती रहेंगी। अप्रैल का महीना वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए मार्च से कहीं अधिक चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है।

डोनाल्ड ट्रंप और जेडी वेंस का सख्त रुख

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि अमेरिकी नाकेबंदी के पास आने वाली किसी भी ईरानी अटैक बोट को तबाह कर दिया जाएगा। वहीं, वाइस प्रेसिडेंट जेडी वेंस ने कहा कि अगर ईरान परमाणु हथियारों का मोह छोड़ दे, तो अमेरिका उसके साथ एक ‘सामान्य देश’ की तरह व्यवहार करने को तैयार है।

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