Tuesday - 11 August 2020 - 9:34 PM

इस्लामाबाद में हिंदू मंदिर बनाने का क्यों हो रहा है विरोध?

जुबिली न्यूज डेस्क

पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद चर्चा में है। चर्चा का कारण हिंदू मंदिर। दरअसल इस्लामाबाद में सरकार पहला हिंदू मंदिर का निर्माण करा रही है। सरकार के इस फैसले से जहां हिंदू अल्पसंख्यक खुश हैं तो वहीं धार्मिक मुस्लिम तबकों में इसका खूब विरोध हो रहा है।

पिछले दिनों इस्लामाबाद में पहले हिंदू मंदिर का निर्माण शुरू हुआ। भगवान श्रीकृष्ण का यह मंदिर एक एक कम्प्लेक्स नुमा इमारत में बनाया जा रहा है। इस कॉम्प्लेक्स में शमशान घाट, कम्यूनिटी हॉल, लोगों के ठहरने की जगह और पार्किंग की व्यवस्था होगी।

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साल 2017 में पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज) सरकार ने इस मंदिर के निर्माण की अनुमति दी थी, लेकिन कई वजहों से इसके निर्माण में देर होती चली गई, लेकिन अब जब मंदिर निर्माण शुरु हो गया है तो इसका विरोध किया जा रहा है।

मंदिर बनाने के कदम को उदारवादी तबकों ने सराहा है, लेकिन पाक के बहुसंख्यक मुसलमानों के कुछ तबकों में इसका पुरजोर विरोध हो रहा है। लाहौर की जामिया अशरफिया के एक फतवे में मंदिर बनाए जाने पर कड़ी आपत्ति की गई है। इस फतवे को लेकर सोशल मीडिया पर भी बहस हो रही है।

पाकिस्तान की हिंदू काउंसिल के अनुसार यहां हिंदुओं की आबादी लगभग 80 लाख है। इनमें से ज्यादातर लोग दक्षिणी सिंध प्रांत में रहते हैं। जब भारत और पाक का विभाजन हुआ था तब पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की आबादी लगभग 25 प्रतिशत थी। इनमें एक बड़ी आबादी सिंध और उस वक्त के पूर्वी पाकिस्तान (मौजूदा बांग्लादेश) में रहने वाले हिंदुओं की थी। अब पाकिस्तान में सिर्फ पांच प्रतिशत अल्पसंख्यक बचे हैं।

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मंदिर निर्माण का विरोध अतीत में इस्लामाबाद की लाल मस्जिद से जुड़ी रही शौहदा फाउंडेशन ने भी किया है। फाउंडेशन ने मंदिर निर्माण के खिलाफ अदालत जाने की चेतावनी दी है। उनका तर्क है कि मंदिर बनाने के लिए सरकारी जमीन नहीं दी जा सकती।

इसके अलावा जामिया हफसा मदरसे की प्रिंसीपल उम हसान ने भी इसका विरोध किया है। उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा है कि इस्लाम किसी नए मंदिर के निर्माण की इजाजत नहीं देता। सरकार का यह कदम शरियत के खिलाफ है, क्योंकि अगर कोई पुराना शहर है जहां पहले से ही हिंदू और मुसलमान रह रहे हों और वहां पहले से ही मंदिर मौजूद हो तो उस मंदिर को काम करने की इजाजत दी जा सकती है। वहां पर पूजा अर्चना हो सकती है, लेकिन सरकार नए मंदिर नहीं बना सकती। हमने पहले भी इसके खिलाफ विरोध दर्ज कराया है और हम अब भी इसका विरोध करेंगे।”

हिंदी पोर्टल डीडब्ल्यू के अनुसार मंदिर के विरोध के चलते हिंदुओं में मायूसी है। सिंध के मि_ी से हिंदू समुदाय के नेता कृष्ण शर्मा का कहना है कि “यह विरोध सकारात्मक नहीं है क्योंकि हम भी इस देश के नागरिक हैं। इसलिए हमें इस प्रतिक्रिया पर अफसोस भी हुआ और मायूसी भी। पाकिस्तान के संविधान के मुताबिक सब नागरिक बराबर हैं और पाकिस्तान को लेकर कायदे आजम (मोहम्मद अली जिन्नाह) की जो अवधारणा थी, उसके मुताबिक स्टेट का धार्मिक मामलों से कोई लेना देना नहीं है।”

वहीं इस मामले में पाकिस्तान हिंदू काउंसिल के नेता और राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के सदस्य डॉ. जयपाल ने डीडब्ल्यू से कहा, “हम इस बात का स्वागत करते हैं कि सरकार ने मंदिर बनाने का काम शुरू कर दिया है, लेकिन मैं इस बारे में चिंतित हूं और मुझे अफसोस भी है कि कुछ तत्व इसका विरोध कर रहे हैं। उन्हें कायदे आजम का 11 अगस्त का भाषण सुनना चाहिए जिनमें जिन्नाह ने सभी नागरिकों को बराबर अधिकार देने की बात कही है। तो जो लोग विरोध कर रहे हैं, उन्हें समझना चाहिए कि हम भी बराबर के नागरिक हैं। “

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