Saturday - 31 July 2021 - 11:46 PM

जब राजपूतों के दरवाजों से गुज़रा घोड़े पर सवार अनुसूचित जाति का दूल्हा

जुबिली न्यूज़ ब्यूरो

नई दिल्ली. भिवानी जिले के गोविन्दपुरा गाँव में 300 साल पुरानी एक परम्परा टूटी तो खबर दूर-दूर तक फैल गई. अनुसूचित जाति का एक दूल्हा घोड़े पे सवार होकर राजपूतों के घरों के सामने से आन-बान और शान से गुज़रा. यह पहली बार हुआ कि इस रास्ते से इतनी धूम से किसी की बारात गुज़री हो.

हरियाणा के भिवानी जिले में एक गाँव है गोबिंदपुरा. यह गाँव तीन सौ साल पहले बसाया गया था. इस गाँव में दो ही बिरादरियां रहती हैं. एक है राजपूत समाज और दूसरा है हेड़ी समाज. हेड़ी समाज के लोग अनुसूचित जाति से आते हैं. गाँव में राजपूतों की तादाद 1200 है और हेड़ी समाज की 800. दोनों में कभी टकराव नहीं हुआ क्योंकि हेड़ी समाज ने कभी कोई ऐसा काम ही नहीं किया कि राजपूत समाज को नागवार गुज़रे.

इस गाँव के लोग हालांकि शुरू से ही यही चाहते थे कि दोनों समाज के लोग मिल जुलकर रहें. कोई किसी का दिल न दुखाये. राजपूत समाज भी चाहता था कि हेड़ी समाज में शादियाँ हो तो दूल्हा घोड़े पर सवार होकर जाए यह मामला एक बार पंचायत के सामने भी गया थ लेकिन पंचायत में इस बात को लेकर सहमति नहीं बन पाई.

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पंचायत में बात नहीं बनी तो गाँव के कुछ राजपूतों ने सरपंच बीर सिंह के साथ मिलकर 300 साल पुरानी परम्परा को तोड़ने का फैसला किया और हेड़ी समाज के दूल्हा विजय को पहली बार घोड़े पर सवार कर दुल्हन के घर के लिए रवाना किया. एहतियात के तौर पर इस दौरान गाँव में पुलिस तैनात की गई थी लेकिन गाँव के किसी भी राजपूत ने इस शादी का विरोध नहीं किया. हेड़ी समाज के लोगों में इस बात को लेकर खुशी की लहर है कि राजपूतों ने उनके समाज को भी सम्मान से जीने का अवसर दिया है.

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