Tuesday - 30 November 2021 - 8:36 PM

कृषि कानूनों की वापसी पर क्या बोलीं उमा भारती

जुबिली स्पेशल डेस्क

भोपाल। हाल में पीएम मोदी ने तीनों कृषि कानून वापस लेने की घोषणा की थी। इसके बाद राजनीतिक दलों में इसको लेकर तमाम तरह की प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है।

उधर मध्य प्रदेश की पूर्व सीएम और भाजपा की वरिष्ठ नेता उमा भारती का भी बयान सामने आ रहा है। उन्होंने सरकार के इस बड़े कदम पर सवाल उठाया है।

उन्होंने ट्वीट के माध्यम से कहा है कि किसानों को ना समझा पाना हमारे कार्यकर्ताओं की कमी है। उन्होंने इस दौरान कई ट्वीट कर अपनी बात रखते हुए कहा है कि मैं पिछले 4 दिनों से वाराणसी में गंगा किनारे हूं. 19 नवंबर 2021 को हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब तीनों कृषि कानूनों की वापसी की घोषणा की तो मैं अवाक रह गई।

इसलिए 3 दिन बाद प्रतिक्रिया दे रही हूं। प्रधानमंत्री ने कानूनों की वापसी करते समय जो कहा वह मेरे जैसे लोगों को बहुत व्यथित कर गया। अगर कृषि कानूनों की महत्ता प्रधानमंत्री किसानों को नहीं समझा पाए तो उसमें हम सब भाजपा कार्यकर्ताओं की कमी है. हम क्यूं नहीं किसानों से ठीक से संपर्क और संवाद कर सके।

उमा भारती ने लिखा कि प्रधानमंत्री बहुत गहरी सोच एवं समस्या के जड़ को समझने वाले प्रधानमंत्री हैं. जो समस्या की जड़ समझता है वह समाधान भी पूर्णत: से करता है. भारत की जनता और नरेंद्र मोदी जी का आपस का समन्वय, विश्व के राजनीतिक लोकतांत्रिक इतिहास में अभूतपूर्व है।

उमा भारती ने कहा कि कृषि कानूनों के संबंध में विपक्ष के निरंतर दुष्प्रचार का सामना हम नहीं कर सके। इसी कारण से उस दिन प्रधानमंत्री के संबोधन से मैं बहुत व्यथित हो रही थी. मेरे नेता माननीय नरेंद्र मोदी जी ने तो कानूनों को वापस लेते हुए भी अपनी महानता स्थापित की। हमारे देश का ऐसा अनोखा नेता युग-युग जिए, सफल रहे। यही मैं बाबा विश्वनाथ एवं मां गंगा से प्रार्थना करती हूं।

बता दें कि जब कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहे किसानों के आंदोलन शुरू किया था तब सरकार ने साफ कर दिया था वो इसे वापस नहीं लेंगी। इतना ही नहीं विपक्ष ने इस पूरे मामले पर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था।

साल भर से ये आंदोलन चल रहा है। इस दौरान 700 से ज्यादा किसानों की अपनी जान तक गवांनी पड़ी लेकिन मोदी सरकार को इससे भी फर्क नहीं पड़ा।

हालात इतने खराब थे कि उस सरकार की नजरों के सामने ये सब हो रहा था लेकिन मोदी सरकार टस से मस तक नहीं हुई। इस दौरान सरकार और किसानों के बीच एक नहीं कई बार बातचीत हुई लेकिन उसका नतीजा भी शून्य निकला।

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