Sunday - 23 January 2022 - 2:14 AM

केंद्र सरकार ने बताया कि आखिर क्यों बंगाल के पूर्व मुख्य सचिव को तलब किया

जुबिली न्यूज डेस्क

पश्चिम बंगाल में भले ही यास चक्रवात थम गया है, लेकिन बंगाल के पूर्व मुख्य सचिव अलापन बंद्योपाध्याय को लेकर सियासी तूफान जारी है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ आधे घंटे की देरी से पहुंचने की वजह से अलापन बंधोपाध्याय को लेकर पिछले कई दिनों से केंद्र सरकार और ममता सरकार आमने-सामने हैं।

सूत्रों के अनुसार मंगलवार को मोदी सरकार ने बंगाल के पूर्व मुख्य सचिव को तलब करने के अपने कदम का बचाव किया और उनके ट्रांसफर के आदेश को ‘संवैधानिक’ बताया।

केंद्र सरकार के मुताबिक यह आदेश पूरी तरह से संवैधानिक है क्योंकि मुख्य सचिव, अखिल भारतीय सेवा अधिकारी होते हैं। उन्होंने अपने संवैधानिक कर्तव्यों की उपेक्षा की, वह प्रधानमंत्री के समक्ष नहीं पेश हुए और न ही बंगाल सरकार का कोई भी अधिकारी प्रधानमंत्री की समीक्षा बैठक में शामिल हुआ।

सूत्रों के मुताबिक वह बिना उचित कारण बताए मुख्यमंत्री के साथ बैठक से निकल गए।

यह भी पढ़ें : कोरोना की दूसरी लहर में भारत में 594 डॉक्टरों की मौत

यह भी पढ़ें :  अर्थव्यवस्था सुधारने के लिए मोदी सरकार से चिदंबरम ने क्या कहा?

दरअसल पीएम के बैठक में मुख्य सचिव के शामिल न होने पर पूर्व मुख्य सचिव अलापन को केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के लिए तलब किया गया था। इस पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खासा नाराज हुईं थी और उन्होंने पीएम को पत्र भेजकर कहा था कि वह अलापन को दिल्ली नहीं भेजेंगी।

यास तूफान पर मोदी की बैठक में शामिल न होने वाल बंगाल के पूर्व मुख्य सचिव अलापन बंद्योपाध्याय को दिल्ली तलब किया गया था और उन्हें सोमवार सुबह 10 बजे नार्थ ब्लॉक में डिपार्टमेंट ऑफ पर्नसल एंड ट्रेनिंग को रिपोर्ट करना था, मगर वे नहीं आए।

यह भी पढ़ें :  महाराष्ट्र : सिर्फ एक जिले में मई में 9 हजार बच्चे हुए कोरोना संक्रमित

यह भी पढ़ें :  इस मासूम बच्ची ने आखिर किस बात की PM मोदी से की शिकायत, देखें क्यूट VIDEO 

उसके अगले दिन ही उन्होंने अपने पद से रिटायरमेंट की घोषणा कर दी। अलापन बंद्योपाध्याय सोमवार को बंगाल के मुख्य सचिव के पद से सेवानिवृत्त हो गए और अब वह बंगाल सरकार के मुख्य सलाहकार हैं।

तब केंद्र सरकार ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर अलापन बंदोपाध्याय को अनुशासनात्मक कार्रवाई से बचाने का आरोप लगाया था।

सूत्रों ने कहा कि मुख्य सचिव की सेवानिवृत्ति से पता चलता है कि ममता बनर्जी बैकफुट पर हैं। वह जानती हैं कि मामले के तथ्य मुख्य सचिव के खिलाफ हैं और उनका व्यवहार ऐसा था कि यह सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई को आमंत्रित करेगा क्योंकि वह एक अखिल भारतीय सेवा अधिकारी हैं और यह सुनिश्चित करना उनका कर्तव्य है कि समीक्षा बैठक निर्धारित समय के अनुसार हो।

अखिल भारतीय अधिकारियों से राजनीति का हिस्सा होने की उम्मीद नहीं की जाती है। ममता बनर्जी यह सब जानती हैं और उनकी सेवानिवृत्ति उन्हें बचाने के लिए अंतिम बोली है।

सूत्रों ने आगे कहा कि पीएम मोदी से तीन महीने के लिए मुख्य सचिव के विस्तार की पुष्टि करने का अनुरोध करने से लेकर अब उन्हें सेवानिवृत्त करने तक ममता बनर्जी ने कुछ ही घंटों में एक बड़ा यू-टर्न ले लिया है। इससे पहले ममता बनर्जी ने पूर्व मुख्य सचिव के बारे में केंद्र के कदम को एकतरफा आदेश कहा था और तर्क दिया कि यह आदेश कानूनी रूप से “अस्थिर, अभूतपूर्व, असंवैधानिक” है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य के साथ बिना परामर्श के यह फैसला लिया गया।

केंद्रीय कार्मिक मंत्रालय ने बंद्योपाध्याय को कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) को रिपोर्ट नहीं करने के लिए कारण बताओ नोटिस भी जारी किया।

वहीं सीएम ममता ने पूर्व मुख्य सचिव को केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर ट्रांसफर करने के केंद्र सरकार के फैसले पर भी सवाल उठाए क्योंकि उन्हें हाल ही में तीन महीने का विस्तार मिला था।

यह भी पढ़ें : दिल्ली में बाबा रामदेव के खिलाफ डॉक्टरों का विरोध-प्रदर्शन 

यह भी पढ़ें : एक महीने में 17 बार बढ़ी पेट्रोल-डीजल की कीमत, बना नया रिकॉर्ड 

केंद्र सरकार के सूत्रों ने कहा कि भारत सरकार ने मुख्य सचिव की सेवा का विस्तार करने पर सहमति व्यक्त की थी, यह दर्शाता है कि केंद्र पश्चिम बंगाल के साथ पूर्ण सहयोग और द्वेष के बिना काम कर रहा है।

English

Powered by themekiller.com anime4online.com animextoon.com apk4phone.com tengag.com moviekillers.com