Weather Alert: कई राज्यों में बदलेगा मौसम, इतने जून से बारिश की संभावना

उत्तर भारत में मौसम का मिजाज तेजी से बदल रहा है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, पिछले कई दिनों से पड़ रही भीषण गर्मी के बाद अब लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश और मध्य भारत के कई इलाकों में तापमान अभी भी 40 से 44 डिग्री सेल्सियस के बीच बना हुआ है, लेकिन गरज-चमक और हल्की बारिश के कारण मौसम में बदलाव देखने को मिल सकता है।

मौसम विभाग के मुताबिक सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से उत्तर-पश्चिम भारत के कई राज्यों में 19 जून तक बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। इससे लू के प्रभाव में कमी आएगी और तापमान में गिरावट दर्ज की जा सकती है।

IMD के अनुसार दिल्ली-एनसीआर, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 19 जून तक छिटपुट बारिश होने की संभावना है। बादलों की आवाजाही के चलते दिल्ली में भीषण गर्मी से राहत मिल सकती है। कई स्थानों पर गरज-चमक के साथ हल्की बारिश दर्ज की जा सकती है।

जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में भी 19 जून तक रुक-रुक कर बारिश होने की संभावना जताई गई है। पर्वतीय क्षेत्रों में मौसम सुहावना बना रहेगा और कुछ इलाकों में गरज के साथ बारिश हो सकती है।

मौसम विभाग का कहना है कि दिल्ली, पंजाब और हरियाणा सहित उत्तर-पश्चिम भारत के कुछ हिस्सों में 17 जून तक अधिकतम तापमान में 4 से 6 डिग्री सेल्सियस तक की बढ़ोतरी हो सकती है। वहीं मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में तापमान फिलहाल स्थिर रहने की संभावना है।

देश के अधिकांश अन्य हिस्सों में 19 जून तक तापमान में कोई बड़ा बदलाव देखने को नहीं मिलेगा और मौसम सामान्य बना रहेगा।

राजस्थान के पश्चिमी इलाकों में गर्मी का प्रकोप अभी भी बरकरार है। कई जिलों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के आसपास पहुंच रहा है। हालांकि पूर्वी राजस्थान के कुछ क्षेत्रों में आंधी और हल्की बारिश की संभावना जताई गई है, जिससे लोगों को आंशिक राहत मिल सकती है।

जून का आधा महीना बीत जाने के बावजूद मुंबई और महाराष्ट्र के कई हिस्सों में मानसून की जोरदार बारिश अभी तक नहीं हुई है। इससे इस साल मानसून के सामान्य पैटर्न पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

सबसे बड़ी चिंता मुंबई को पानी उपलब्ध कराने वाले जलाशयों के जलस्तर को लेकर है। रिपोर्ट के मुताबिक शहर को जलापूर्ति करने वाले प्रमुख जलाशयों में जल भंडारण क्षमता 10 प्रतिशत से भी कम रह गई है। यदि जल्द पर्याप्त बारिश नहीं हुई तो आने वाले दिनों में जल संकट की आशंका बढ़ सकती है।

देश के कई राज्यों में किसान मानसून की सक्रियता का इंतजार कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगले कुछ दिनों में बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं, जिससे खेती-किसानी और जल संसाधनों को राहत मिलेगी।

Related Articles

Back to top button