वेनेजुएला संकट पर UNSC में बवाल, अमेरिका पर ‘अंतरराष्ट्रीय अपराध’ का आरोप

जुबिली स्पेशल डेस्क
वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के कथित अपहरण को लेकर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की आपात बैठक जबरदस्त हंगामे के बीच हुई।
रूस, चीन और कोलंबिया समेत कई देशों ने अमेरिका और पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के इस “न्यू नॉर्मल” पर तीखा हमला बोला।
चौतरफा घिरे अमेरिका ने सफाई देते हुए कहा कि उसका वेनेजुएला पर कब्जा करने का कोई इरादा नहीं है और यह कार्रवाई केवल ड्रग्स के खिलाफ कानून प्रवर्तन अभियान का हिस्सा थी।
हालांकि रूस और कोलंबिया ने संयुक्त रूप से अमेरिका की इस कार्रवाई को ‘अंतरराष्ट्रीय अपराध’ बताते हुए इसे वेनेजुएला की संप्रभुता पर सीधा हमला करार दिया। रूस ने दो टूक कहा कि वाशिंगटन ने वेनेजुएला की आज़ादी को कुचलते हुए दुनिया के सामने एक बेहद खतरनाक मिसाल कायम की है।
“मादुरो और उनकी पत्नी को तुरंत रिहा करे अमेरिका”
UNSC में रूस के प्रतिनिधि ने अमेरिका की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि इस सशस्त्र कार्रवाई को किसी भी तरह से जायज़ नहीं ठहराया जा सकता।
रूस ने वेनेजुएला के लोगों के साथ एकजुटता जताते हुए मांग की कि अमेरिका राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को बिना शर्त तुरंत रिहा करे। रूसी प्रतिनिधि ने कहा कि अमेरिका ने बातचीत और कूटनीति को दरकिनार कर बंदूक के बल पर लोकतंत्र की हत्या की है। रूसी दूतावास ने इस कार्रवाई को ‘राजकीय आतंकवाद’ की संज्ञा दी।
कोलंबिया की आपत्ति
कोलंबिया के अनुरोध पर ही UNSC की यह आपात बैठक बुलाई गई थी। कोलंबियाई प्रतिनिधि ने अमेरिका की सैन्य कार्रवाई को वेनेजुएला की राजनीतिक स्वतंत्रता और क्षेत्रीय अखंडता का खुला उल्लंघन बताया।
उन्होंने कहा कि 3 जनवरी को की गई कार्रवाई में अमेरिका ने किसी भी अंतरराष्ट्रीय कानून और नियम का सम्मान नहीं किया। कोलंबिया ने तनाव कम करने के लिए तत्काल संवाद और कूटनीतिक पहल की मांग की।
संयुक्त राष्ट्र की चेतावनी
संयुक्त राष्ट्र की अंडर-सेक्रेटरी जनरल रोज़मेरी डिकार्लो ने परिषद को ब्रीफ करते हुए स्थिति को बेहद गंभीर बताया। उन्होंने चेतावनी दी कि 3 जनवरी की कार्रवाई ने एक खतरनाक मिसाल कायम कर दी है, जिससे भविष्य में किसी भी देश की संप्रभुता खतरे में पड़ सकती है। उन्होंने कहा कि हालात अब भी संभाले जा सकते हैं, बशर्ते अंतरराष्ट्रीय कानून को सर्वोपरि रखा जाए।
अमेरिका की सफाई
अमेरिका ने अपने बचाव में चौंकाने वाला बयान देते हुए कहा, “हम किसी देश पर कब्जा नहीं कर रहे हैं। यह कोई युद्ध नहीं, बल्कि एक ‘लॉ एनफोर्समेंट एक्शन’ था।”
अमेरिका ने निकोलस मादुरो को वेनेजुएला का राष्ट्रपति मानने से इनकार करते हुए उन्हें ‘नार्को-ट्रैफिकर’ बताया। अमेरिकी प्रतिनिधि के मुताबिक मादुरो ने पश्चिमी गोलार्ध को अस्थिर करने की कोशिश की, इसलिए उन पर अमेरिकी अदालत में मुकदमा चलाया जाएगा।
भारत समेत दुनिया की नजर
UNSC की यह बैठक भले ही किसी ठोस नतीजे के बिना खत्म होती दिख रही हो, लेकिन इसने वैश्विक राजनीति को साफ तौर पर दो खेमों में बांट दिया है।
एक तरफ अमेरिका अपनी कार्रवाई को कानून के दायरे में बता रहा है, तो दूसरी ओर रूस और लैटिन अमेरिकी देश इसे साम्राज्यवाद का नया और खतरनाक रूप करार दे रहे हैं। यदि अमेरिका ने मादुरो को रिहा नहीं किया, तो लैटिन अमेरिका में बड़े और विनाशकारी संघर्ष की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।


