Saturday - 3 December 2022 - 6:35 PM

यूपी का राजदरबार…

सीएम हुए हाईटेक

राजेंद्र कुमार

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी अब हाईटेक हो गए हैं। वह भी अब आईएएस अफसरों की तरह की कंप्यूटर और आईपैड पर सरकारी योजनाओं का ब्यौरा देखने लगे हैं। यही नही मुख्यमंत्री अब चुनावी सभाओं में भी आईपैड पर अपने भाषण के बुलेट प्वांइट पढ़कर भाषण देने लगें हैं।

गंगा यात्रा के दौरान बीते दिनों सीएम ने मुजफ्फरनगर की जनसभा में आईपैड पर अपने भाषण के बुलेट प्वांइट पढ़कर भाषण दिया था। जिसकी फोटोग्राफ मुख्यमंत्री सचिवालय के अफसर दिखा रहें हैं।

और यह भी बता रहे हैं कि मुख्यमंत्री अपने ‘दर्पण’ डैशबोर्ड से सरकारी योजनाओं की प्रगति की ऑनलाइन मॉनीटरिंग पहले से ही कर रहे हैं। अब जल्दी ही भाषण से ई-ऑफिस तक तकनीक का वह बढ़-चढ़कर उपयोग करते नजर आएंगे।

इन्ही अफसरों के अनुसार मुख्यमंत्री अब सोशल मीडिया पर भी अपने आईपैड के जरिये नजर रखने लगे हैं। बीते दिनों मुख्यमंत्री के कहने पर गंगा यात्रा को लेकर “हर-हर गंगे” और फर्रुखाबाद में सनकी अपराधी के चंगुल से 23 बच्चों को सकुशल मुक्त कराने को लेकर ट्वीटर पर “स्लूट यूपी पुलिस” हैशटैग ट्रेंड कराया गया।

यह दोनों हैशटैग ट्वीटर पर पहले नंबर पर तो नहीं आ सके और पांचवे नबंर पर कई घंटे तक ट्रेंड किये। इसी दरमियान इस दोनों हैशटैग के विरोध में सरकार के खिलाफ एक हैशटैग ट्वीटर पर चलने लगा। जिसे मुख्यमंत्री ने देखा तो उन्होंने अधिकारियों से इसका जवाब देने को कहा, जिस पर “हर दिल में योगी” हैशटैग ट्रेंड किया गया।

तब कहीं जाकर सरकार के खिलाफ चलाया गया हैशटैग डाऊन हुआ। और इसके चलते ही नौकरशाही के तमाम अफसरों को भी पता चला कि मुख्यमंत्री सोशल मीडिया पर भी नजर रख रहें हैं।

सिस्टम से काम

बिहार में जन्मे साहब की आदत सिस्टम के तहत हर काम करने की है। इकनामिक्स की पढ़ाई पढ़े साहब प्रोफेसर सरीखा अनुशासन अपने मातहतों पर भी लागू करते हैं। यही वजह है कि वो हर रोज सुबह दस बजे अपने मातहतों के साथ मीटिंग करते हैं। सचिव से लेकर विशेष सचिव तक को दिनभर में खुद क्या करना है।

और महकमें के जिलों में तैनात अफसरों से क्या कार्य करवाना है? यह सब इस मीटिंग में ही तय कर देते हैं।

उसके बाद फिर वह दिनभर अपने मातहत को फोन नहीं करते। और बिना किसी से मिले जुले अपनी फाइलों को निपटातें हैं। इसी दरमियान खेती किसानी को बढ़ावा देने संबंधी शोध आदि को पढ़ते हैं। फिर अगले दिन की मीटिंग में साहब सबसे पहले अपने मातहतों से यह पूछते हैं कि एक दिन पहले बताये गए कार्य पूरे हुए या नहीं।

यह रिपोर्ट लेने के बाद साहब खेती किसानी को लाभप्रद बनाने संबंधी पढ़े हुए शोधों के आधार पर सूबे की खेती किसानी को कैसे बेहतर बनाया जा सकता है? इस पर अपने मातहतों से चर्चा करते हैं। इस मीटिंग में ऐसी चर्चाओं के दौरान सचिव और विशेष सचिव उन मुददों को भी उठा देते हैं, जिन्हें जिलों में तैनात विभागीय अधिकारी साहब तक पंहुचा नही पाते।

इससे अब उन मातहतों का जलवा हो गया है, जिनके पास गाहे बगाहे ही कोई आता था। अब साहब के बनाये सिस्टम से विभाग के सचिव और विशेष सचिव के पास मिलने वालों का ताँता लगा रहता है। हर मिलने वाला वन डिस्टिक वन प्रोड्क्ट योजना का कोई ना कोई गिफ्ट भी लाता है।

आईएएस से खफा समिति के अध्यक्ष

राज्य विधान परिषद की आश्वासन समिति के अध्यक्ष सूबे के एक आईएएस से खांसे खफा हैं। तीस साल पहले ये साहब आईएएस बने थे। बेहद सरल स्वभाव वाले यह साहब लोगों से मिलने जुलने में बहुत संकोच करते हैं। लेकिन फाइलों पर नोटिंग करने में उनका कोई सानी नहीं हैं।

उनकी नोटिंग का कोई तोड़ नही होता है, मुख्यमंत्री को भी उनकी इस खूबी का पता है। जिसके चलते कोई उनके खिलाफ बोले यह मुख्यमंत्री को पसंद नही है। आश्वासन समिति के अध्यक्ष भी इससे अवगत हैं, इसके बाद भी वह उक्त अधिकारी के रुष्ट रहते हैं। इसकी वजह है विधान परिषद की आश्वासन समिति की बैठकों में उक्त आईएएस का ना आना।

बीते करीब तीन सालों से उक्त अधिकारी को विधायकों से जुडी कई समस्याओं को लेकर बैठक में बुलाया जा रहा है, लेकिन उक्त अधिकारी कोई ना कोई कारण बताकर बैठक नही आते हैं और महकमें के विशेष सचिव को भेज देतें हैं। जिसे लेकर आश्वासन समिति के सदस्य अब उक्त आईएएस के खिलाफ समिति की अवमानना करने का नोटिस जारी करने के लिए समिति के अध्यक्ष पर दबाव बना रहे हैं।

अब चूंकि समिति के अध्यक्षजी जो विधान परिषद में 48 सालों से सदस्य हैं, यह जानते हैं कि उक्त अधिकारी को सीएम बहुत मानते हैं, इसलिए वह उनके खिलाफ समिति की अवमानना करने का नोटिस नही जारी कर रहे हैं। लेकिन अब समिति के अध्यक्षजी नाराजगी में उक्त अधिकारी के बहाने सूबे की नौकरशाही कैसे बेअंदाजी का व्यवहार कर रही है, यह लोगों को बताने में जुट गए हैं।

वो कहते कि कि मैं 48 सालों से विधान परिषद का सदस्य हूँ और तीस साल से नौकरी कर रहे आईएएस बीते करीब तीन साल से एक संसदीय समिति के बार-बार भेजे गए बुलावे पर आये नही हैं। नौकरशाही के बेअंदाजी का इससे बड़ा सबूत और क्या होगा।

जुगत में जुटे नेताजी

कानपुर शहर से उनका नाता रहा है। आज भी उनके परिवारीजन कानपुर में रहते हैं। अब कांग्रेस के इन नेताजी को लेकर इस वक्त बड़ी-बड़ी चर्चाएं चल रही हैं। वजह नेता के बदलते ‘हाव-भाव’ हैं। इन नेताजी की मंशा जय शाह की परछाईं बनने की है। यह नेताजी राजनीति के अलावा खेल की फील्ड में लंबे समय से बैटिंग कर रहे हैं, जिसके चलते उनका जय शाह के नजदीक दिखना स्वाभाविक है।

आये दिन जब उनकी फोटो जयशाह के साथ अखबारों में छपती है तो नेताजी पार्टी के लोगों को बहुत मासूमियत से बताते हैं कि मीडिया वाले विवाद खड़ा करने के लिए ऐसा करते हैं। नेताजी के इस जवाब से पार्टीजन संतुष्ट नही है। पार्टीजनों का कहना है कि नेताजी की कोशिश तो जय शाह को सीढ़ी बनाकर उनके पापा तक पहुंचने की है। वैसे भी नेताजी के लिए बीजेपी कोई पराई नहीं।

एक वक्त वह बीजेपी के हमदर्दों में शामिल थे। वर्ष 2004 में जब बीजेपी के बड़े नेता शाइनिंग इंडिया के झांसे में आकर जनता के मूड को समझने में चूक कर गए थे, तब यह नेता ही अकेले थे जिन्होंने सही वक्त पर हवा के रुख को भांप लिया था। और उन्होंने बीजेपी से दूरी बनाकर कांग्रेस में अपनी जगह तलाशने में भलाई समझी थी।

अब कांग्रेस अपने सबसे बुरे दिनों से गुजर रही है तो नेताजी को कांग्रेस में अपना भविष्य उज्ज्वल नही दिखता, तो दिल्ली की राजनीति में रंग चुके नेताजी की कोशिश किसी तरह बीजेपी के बिग बॉस का भरोसा जीतने की है। वाया जय शाह यह काम आसानी से हो सकता है, इसलिए उनकी पुरजोर कोशिश जय शाह की परछाईं बनने की है। इसे अब घाट-घाट का पानी पी चुके कांग्रेस के बड़े धुरंधर भी भांप चुके हैं।

चाचा दरकिनार

बसंत  पंचमी के दिन प्रसपा के मुखिया शिवपाल सिंह यादव का जन्मदिन था। पार्टी नेताओं ने उनका 65वां जन्मदिन सामाजिक न्याय व संकल्प दिवस के रूप में मनाया। इस दिन उन्हें प्रदेश भर के प्रसपा नेताओं ने बधाई दी, लेकिन उनके ही परिवारीजनों, जिनमे मुलायम सिंह यादव और सपा मुखिया अखिलेश यादव शामिल हैं ने सार्वजनिक रूप से हैप्पी बर्थडे नही कहा।

जबकि जन्मदिन पर शिवपाल सिंह यादव अपने बड़े भाई मुलायम सिंह यादव के घर जाकर आशीर्वाद लिया था। फिर भी मुलायम सिंह यादव ने ट्वीटर पर शिवपाल सिंह के जन्मदिन को लेकर कोई ट्वीट नहीं किया।

यही नही सपा मुखिया अखिलेश सिंह यादव ने भी अपने चाचा को जन्मदिन बधाई देने संबंधी कोई सार्वजनिक बयान नही दिया, जबकि इन्ही चाचा ने अखिलेश की पढ़ाई लिखाई में अहम भूमिका अदा की थी। फिर भी अखिलेश ने अपने सगे चाचा के जन्मदिन को लेकर कोई ट्वीट नही किया, जबकि गत 15 जनवरी को बसपा मुखिया मायावती को जिन्हें वह बुआ कहते हैं के जन्मदिन पर बधाई दी थी।

ऐसे में अब यह कहा जा रहा है कि सपा मुखिया अखिलेश यादव ने अपने चाचा के साथ हर तरह के रिश्तों से दूरी बना ली है। अब किसी भी दशा में सपा और प्रसपा में कोई राजनीतिक नजदीकी नही होगी। यह संकेत सपा मुखिया ने अपने चाचा को जन्मदिन के दिन सार्वजनिक बधाई ना देकर दे दिया है। और यह भी जता दिया है कि उन्होंने अपने चाचा को दरकिनार कर दिया है।

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अमेठी में आशियां

राहुल गांधी को चुनाव में पटखनी देने के बाद अब केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी अमेठी में अपना घर बनवाने जा रही हैं। वो जिला मुख्यालय गौरीगंज के नजदीक नेता रोड पर अपना घर बनवाएंगी। स्मृति के पति जुबिन ईरानी चिन्हित जमीन स्मृति के साथ अमेठी में देख भी ली है।

बताया जा रहा है जुबिन ईरानी को जमीन पसंद भी आ गई है। स्मृति ईरानी की इच्छा थी कि अमेठी में उनका आशियाना हो, इसको मूर्त रूप देने के लिए उनके कई करीबी लोग पिछले कई महीने से अमेठी में आवास के लिए जमीन की तलाश कर रहे थे।

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स्मृति के निजी सचिव विजय गुप्ता के अनुसार चिन्हित जमीन जुबिन ईरानी को पसंद आई है। और उन्होंने जल्द ही इसे खरीदकर कर आवास बनवाने की प्रक्रिया शुरू करने की इच्छा जताई है। अमेठी सांसद स्मृति ईरानी ने पिछले लोकसभा चुनाव में जनता से वादा किया था कि यदि वे अमेठी से सांसद चुनी गईं तो वे लोगों की सुविधा के लिए जिला मुख्यालय पर अपना घर बनवाएंगी।

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अब वह अपना वायदा पूरा करने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं और उनका यह फैसला गांधी परिवार को जरुर खटकेगा।

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