Thursday - 29 October 2020 - 7:22 PM

डोनाल्ड ट्रंप की झूठ बोलने की आदत, कोरोनावायरस और बेरोजगारी है अमरीकी चुनाव का मुद्दा

शेष नारायण सिंह

अमरीकी राष्ट्रपति के चुनाव में राष्ट्रपति के डिबेट का बड़ा महत्व होता है। उपराष्ट्रपति पद के डिबेट का उतना महत्व नहीं माना जाता लेकिन इस बार पूरे देश का ध्यान उपराष्ट्रपति के डिबेट पर भी था। शायद इसका कारण यह है कि राष्ट्रपति के पद के दोनों ही उम्मीदवारों की उम्र बहुत ज़्यादा है। जो बाइडेन तो 77 साल के हैं जबकि डोनाल्ड ट्रंप 74 साल के हैं।

राष्ट्रपति पद के उम्मीदवारों का पहला डिबेट राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के बीच बीच में बोलते रहने के कारण काफी निराशाजनक रहा था। उसके बाद वे कोरोना वायरस से संक्रमित हो गए। पूरे प्रचार अभियान में उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवारों का डिबेट केवल एक बार होता है।

आज साल्ट लेक सिटी में हुए डिबेट में मौजूदा उपराष्ट्रपति माइक पेंस और डेमोक्रेटिक उम्मीदवार कमला हैरिस के बीच खासी दिलचस्प बहस हुई। बहस के केंद्र में कोरोना वायरस और उसके प्रबंधन को ही रहा। उपराष्ट्रपति माइक पेंस इस बार भी डोनाल्ड ट्रंप के साथ उम्मीदवार हैं।

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बहस की शुरुआत में ही कमला हैरिस ने ट्रंप प्रशासन के कोरोनावायरस महामारी से निपटने के तरीकों को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि दो लाख दस हज़ार से अधिक अमरीकी लोग इस बीमाई से मर चुके हैं और करीब 75 लाख लोग कोरोनावायरस से पीड़ित हैं।

अमरीकी अवाम ने देख लिया है कि मौजूदा प्रशासन इतनी भयानक बीमारी से लड़ने में नाकाम रहा है।इस बीमारी से मुकाबला करने वाली जमातों के अगले दस्ते के लोगों को इस सरकार ने मरने के लिए छोड़ दिया था उनकी रक्षा का कोई भी इंतजाम नहीं किया गया था।।

ट्रंप ने कोरोनावायरस की महामारी को कम करके आंका और लोगों को मास्क पहनने के मामले में निरुत्साहित किया। उन्होंने आरोप लगाया कि इतनी भयानक बीमारी से मुकाबला करने में ट्रंप बुरी तरह से नाकाम रहे हैं और कोरोनावायरस को लेकर लगातार झूठ बोला है।

उन्होंने आरोप लगाया कि उनके गैरजिम्मेदार रवैये के कारण ही कोरोना की बीमारी व्हाइट हाउस में भी फैल गयी। डोनाल्ड ट्रंप खुद संक्रमित जो गए।ट्रंप के बार बार बोले गए झूठ का बचाव कर पाना उपराष्ट्रपति माइक पेंस के लिए टेढ़ी खीर साबित हो रहा था क्योंकि वे खुद ही व्हाइट हाउस के कोरोनावायरस टास्क फ़ोर्स के प्रमुख हैं। ऐसे माहौल में कोरोनावायरस अमरीकी चुनाव का मुख्य मुद्दा बन गया है। कमला हैरिस ने यह बात बार बार दोहराई और रिपब्लिकन उम्मीदवार माइक पेंस को मुश्किल में डालती रहीं।

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अब अमरीकी राष्ट्रपति पद के लिए मतदान के लिए एक महीने से कम का समय है। कोरोनावायरस मुख्य चुनावी मुद्दा है , ट्रंप के लाख कोशिश करने के बाद भी इस बीमारी से हो रहे नुक्सान के लिए उनको ही ज़िम्मेदार माना जा रहा है। डोनाल्ड ट्रंप ने अपने पहले के राष्ट्रपति ओबामा के स्वास्थ्य कार्यक्रम ओबामाकेयर का मजाक उड़ाया था और उसको खतम कर दिया था वह भी अमरीकी लोगों के दिमाग में हैं। अपने कार्यकाल के अंतिम साल में ओबामा ने देश को आगाह किया था कि अगर कहीं 1918 के स्पैनिश फ़्लू जैसी किसी बीमारी का प्रकोप हो जाए तो उसके लिए स्वास्थ्य सुविधाओं और मेडिकल शोध के क्षेत्र में देश को तैयार रहना पडेगा।उसके लिए उन्होंने काम भी शुरू कर दिया था लेकिन डोनाल्ड ट्रंप ने उसको बंद कर दिया।

आज के उपराष्ट्रपति पद की बहस में कमला हैरिस ने इस मुद्दे को समझाया। बीमारी के प्रबंधन में डोनाल्ड ट्रंप की नाकाबिलियत को भी कमला हैरिस ने रेखांकित किया। माइक पेंस ने उनको यह कहकर घेरने की कोशिश की कि कोरोना की वैक्सीन के विकास में जो बाइडेन अडंगा लगा रहे हैं लेकिन अमरीकी अवाम को मालूम है कि यह सच नहीं है।

बीमारी के फैलने को को लेकर माइक पेंस ने जब यह बताने की कोशिश की कि जब केवल पांच लोग कोरोनावायरस से बीमार थे तभी राष्ट्रपति ट्रंप ने चीन से अमरीका की यात्रा पर रोक लगा दी थी लेकिन सच्चाई इससे अलग है। सीएनएन की टीम ने बहस खतम होने के तुरंत बाद बता दिया कि ट्रंप ओर माइकेल पेंस झूठ बोल रहे हैं। आंकड़े कोई और कहानी कह रहे हैं।

आज की बहस के पहले हुए चुनाव पूर्व सर्वेक्षणों में राष्ट्रपति ट्रंप करीब 16 अंक पीछे थे। जो बाइडेन 58 प्रतिशत का समर्थन पा रहे थे जबकि डोनाल्ड ट्रंप केवल 41 प्रतिशत पर थे। ज़ाहिर है आज के डिबेट में उनके उपराष्ट्रपति की निरुत्तरता उनकी लोकप्रियता को और कम करेगी। आज हालांकि कोरोनावायरस का मुद्दा छाया रहा लेकिन अमरीकी जनता की निगाह में सबसे बड़ी मुसीबत बेरोजगारी है।

अमरीकी अर्थव्यवस्था की तबाही के लिए ट्रंप के लगातार बोले जा रहे झूठ सबसे ज़्यादा ज़िम्मेदार हैं क्योंकि उन्होंने सच्चाई को देश और उद्योग के सामने नहीं रखा जिसका नतीजा यह है कि कोरोनावायरस के हमले से बचने के लिए सही तैयारी नहीं हो सकी।

व्यापार के समझौतों को लेकर भी माइक पेंस को बहुत कठिन सवालों के जवाब देने पड़े। उन जवाबों को सुनकर तो ऐसा लगा जैसे वे खुद भी अपने जवाब से संतुष्ट नहीं हैं। चीन के साथ व्यापार के संतुलन पर भी कमला हैरिस ने अपने प्रतिद्वंदी को तबीयत से घेरा। अमरीका में लाखों लोग बेरोजगार हुए हैं और यह पूरे देश में चिंता का विषय है। माइक पेंस इस विषय पर बात से बचना चाहते थे लेकिन डेमोक्रेटिक उम्मीदवार उनको बार बार घेरकर वहीं ला रही थीं।

उन्होंने डोनाल्ड ट्रंप के टैक्स वाले कारनामे को भी उठाया। डोनाल्ड ट्रंप अमरीका में एक बड़े उद्योगपति हैं लेकिन पिछले कई वर्षों से केवल 750 डालर का इनकम टैक्स दे रहे हैं। यह बात अमरीका में अब सभी जानते हैं। इस विषय पर भी कमला हैरिस ने उनको जवाब देने के लिए मजबूर कर दिया लेकिन जब कोई जवाब है ही नहीं तो क्या जवाब देंगे। उपराष्ट्रपति माइक पेंस बगले झांकते देखे गए।

माइकेल पेंस के लिए भी कुछ ऐसे मौके मिले जब वे डेमोक्रेटिक पार्टी को घेरने में सफल हुए। जब कमला हैरिस ने कहा कि ट्रंप का प्रशासन चीन से व्यापार युद्ध हार गया है। आपकी नीतियों के चलते तीन लाख कारखाना मजदूरों की नौकरियाँ खतम हुई हैं और किसानों को भारी नुकसान हुआ है और वे दिवालिया होने को बाध्य हो गए हैं।इस बात का माइक पेंस ने ऐसा जवाब दिया कि कमला हैरिस की बोलती बंद हो गयी।

पेंस ने कहा कि डेमोक्रेटिक उम्मीदवार जो बाइडेन ने उस बिल के पक्ष में वोट दिया था जिसके बाद चीन का अमरीका से परमानेंट व्यापारिक सम्बन्ध कायम हो गया था।उसी कानून के कारण ही चीन विश्व व्यापार संगठन में शामिल होने में कामयाब रहा और उसकी अर्थव्यवस्था इतनी मज़बूत हो गयी कि वह आज अमरीका से मुकाबला कर रहा है। पेंस ने आरोप लगाया कि चीन की व्यापारिक सफलता में बाइडेन की भूमिका एक चीयरलीडर की रही है और चीन की व्यापारिक सफलता में जो बाइडेन का बड़ा योगदान है। लेकिन यहीं वे एक लूज़ बाल दे बैठे।

उन्होंने कहा कि मैं अमरीकी अवाम की तरफ से बोल रहा हूँ क्योंकि उनका सम्मान करता हूँ ।अब कठिन जवाब लेने की उनकी बारी थी। कमला हैरिस ने कहा कि आप लोगों का सम्मान तब कर रहे होते हैं जब आप सच बोलते हैं।

डोनाल्ड ट्रंप के झूठ का बचाव करने के चक्कर में माइक पेंस को भी कई बार झूठ बोलना पड़ा। सबसे बड़ा झूठ उन्होंने तब बोला जब उन्होंने दावा किया कि कोरोनावायरस के बारे में राष्ट्रपति ट्रंप हमेशा ही सच बोलते रहे हैं। सी एन एन के डैनियल डेल का दावा है कि यह तो झूठ का पहाड़ है क्योंकि कोरोनावायरस महामारी के दौरान ट्रंप ने सैकड़ों बार झूठे दावे किये हैं।

उन्होंने यात्रा पर रोक के बारे में, बीमारी की जाँच के बारे में हाइड्रोक्लोरोक्विन के असर के बारे में , देश में उपलब्ध वेंटिलेटर के बारे में उन्होंने झूठ बोला। एक बार तो उन्होंने खुद ही कहा था कि मैं इसको कम करके पेश कर्ता रहा था क्योंकि मैं नहीं चाहता था कि अवाम में घबड़ाहट पैदा हो जाय।

आनन फानन में सुप्रीम कोर्ट की एक जज की तैनाती को भी कमला हैरिस ने मुद्दा बनाया। देश की सबसे बड़ी अदालत की एक जज जस्टिस रुथ गिन्सबर्ग की बीते 18 सितम्बर को मृत्यु हो गयी थी। अमरीकी सुप्रीम कोर्ट में जजों के नियुक्ति जीवनभर के लिए होती है वे रिटायर नहीं होतीं। रुथ की जगह पर उन्होंने अपनी एक समर्थक एमी बारेट को जज बना दिया।

आम तौर पर माना जाता है कि अगर चुनाव आसन्न हों तो राष्ट्रपति को इस तरह की हड़बड़ी नहीं करनी चाहिए लेकिन ट्रंप के बारे में अमरीकी जनमानस में यह चर्चा है कि वे चुनाव के बाद भी सत्ता से चिपकने की कोशिश करेंगे। अगर बहुत बड़े अंतर से हार गए तब तो शायद नहीं लेकिन अगर उनकी हार का अंतर कम रहा तो वे आसानी से हार नहीं मानेंगे। मुमकिन है कि वे सुप्रीम कोर्ट जायेंगे और वहां अगर अपनी भक्त कोई जज हो तो उनके पक्ष में फैसला होने की संभावना ज़्यादा रहेगी। जब जज की जल्दबाजी में की गयी नियुक्ति पर कमला हैरिस ने सवाल उठाया तो माइक पेंस ने कहा कि इतना ज़रूरी पद खाली रखना ठीक नहीं होगा।

हैरिस ने उनको याद दिलाया कि आज डोनाल्ड ट्रंप की सरकार अपने अंतिम दौर में है। जस व्यक्ति को जीवन भर के लिए जज बनाया जा रहा है उसके लिए इतनी जल्दबाजी की कोई ज़रूरत नहीं थी। माइक पेंस अपनी ट्रंप लाइन पर चलते रहे तो उनको डेमोक्रेटिक उम्मीदवार ने याद दिलाया कि इतिहास में कई बार हुआ है, उनको याद दिलाया गया कि अमरीका के सोलहवें राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन सन 1864 में जब दुबारा राष्ट्रपति पद का चुनाव लड़ रहे थे तो चुनाव के 27 दिन पहले सुप्रीम कोर्ट के एक जज की मृत्यु हो गयी।

जब उनसे नई नियुक्ति के बारे में बात की गयी तो उन्होंने बताया कि अमरीकी अवाम 27 दिन बाद अपना नया राष्ट्रपति चुनने वाली है। अगर मैं चुना गया तो मैं इस बात पर विचार करुंगा। अमरीका जनता की इच्छा का सम्मान होना ज़रूरी है,” इस जवाब के बाद माइक पेंस की हालत देखने लायक थी।

अमरीकी चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप का झूठ केंद्रीय भाव है। मीडिया से लेकर राजनेता तक सभी उसी विषय पर बात कर रहे हैं। अगले चार हफ़्तों में दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा। फिलहाल तो जो बाइडेन और कमला हैरिस का पलड़ा भारी दिख रहा है।

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(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं, यह लेख उनकी फेसबुक वाल से लिया गया है)

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