Friday - 19 August 2022 - 1:03 PM

डंके की चोट पर : सियासत की चाशनी ने भर दिया इन धर्मगुरुओं में ज़हर

शबाहत हुसैन विजेता

बिस्मिल्ला खान की शहनाई की धुन के साथ काशी विश्वनाथ मन्दिर के द्वार खोलने वाले हिन्दुस्तान में कुछ संतों ने सियासत की चाशनी इतनी ज्यादा पी ली है कि वह अपना मूल काम ही भूल गए हैं. जिन संतों पर समाज को जोड़ने का दारोमदार रहता है. जो संत समाज को जो रब है वही राम है सिखाने का काम करते रहे हैं वो अब हुकूमत के लालच में 20 बनाम 80 का खेल खेलने में लग गए हैं.

एक संत हैं साक्षी महाराज. उन्नाव से बीजेपी के टिकट पर सांसद बने हैं. उनके बयान हमेशा से तोड़फोड़ कराने वाले ही रहे हैं. वह मुंह खोलते हैं तो यह भूल जाते हैं कि प्रदेश और देश में उन्हीं की पार्टी की सरकार है. वह हमेशा विपक्ष की भूमिका में रहते हैं. इतना ज़हर उगलते हैं कि सरकार की मुश्किलें कम नहीं होने पाएं.

यह ऐसे संत हैं जो धार्मिक कार्यों से कहीं ज्यादा सोशल मीडिया पर एक्टिव रहते हैं. 66 साल के हैं. इनके बयान सुनने वाला यकीन नहीं करेगा कि यह पीएचडी हैं. इनके बयान दरअसल इनकी संगत का असर बताते हैं. उन्नाव से बीजेपी विधायक कुलदीप सेंगर के यह बहुत करीबी दोस्त हैं. सेंगर रेप केस में जेल में हैं और साक्षी महाराज जेल में भी बलात्कार के आरोपित विधायक से मिलने जाते हैं. इनके लिए यह कोई शर्माने वाला अपराध नहीं है. साल 2000 में खुद इन पर एक स्कूल प्रिंसिपल ने रेप का इल्जाम लगाया था. मुकदमा भी दर्ज हुआ था. तब यह समाजवादी पार्टी से राज्यसभा सांसद थे. रेप के इल्जाम में यह तिहाड़ जेल में रहे हैं. यह संसद की सीढ़ियों पर खड़े होकर नाथूराम गोडसे के मन्दिर की वकालत कर चुके हैं.

साक्षी महाराज ने हिन्दुओं से कहा है कि वह अपने घरों पर असली तीर कमान और कोल्ड ड्रिक की बोतलें रखें क्योंकि जब जिहादी हमला करने आयेंगे तब पुलिस बचाने नहीं आयेगी. वह खुद दड़बे में छुप जायेगी. साक्षी महाराज को कोई फर्क नहीं पड़ता कि इस बयान से हिन्दू-मुसलमानों में नफरत बढ़ेगी और उन्हीं की पार्टी की सरकार में क़ानून व्यवस्था खराब होगी.

क़ानून व्यवस्था की इन्हें कभी भी फ़िक्र नहीं रही है. यह बीजेपी के सांसद हैं लेकिन इन्हीं पर कल्याण सिंह की कैबिनेट के ताकतवर मंत्री ब्रह्म दत्त द्विवेदी की हत्या की साज़िश का इल्जाम लगा था. सबूत नहीं मिले और यह छूट गए.

साक्षी महाराज चुनाव के दौर में तो हिन्दू-मुसलमान के मुद्दे के सिवाय कुछ बोलते ही नहीं. इनके दोस्त कुलदीप सेंगर को जेल होने के बाद उन्नाव की बांगरमऊ सीट खाली हो गई. उपचुनाव में फायर ब्रांड साक्षी महाराज नुक्कड़ सभा में पहुंचे तो बोले कि अनुपात के हिसाब से श्मशान और कब्रिस्तान होने चाहिए. गाँव में एक मुसलमान होता है और बहुत बड़ी जगह कब्रिस्तान को दे दी जाती है. हिन्दू अपने खेतों की मेढ़ पर या गंगा किनारे दाह संस्कार करता है.

साक्षी महाराज की शिक्षा के बारे में शुरू में ही बता दिया था ताकि कोई यह न समझे किन यह अज्ञानता वश बोल जाते हैं. हकीकत में इनका मकसद ही नफरत फैलाना होता है. सितम्बर 2021 में मोहर्रम में साक्षी महाराज ने कहा था कि मुसलमान ताजिये के साथ जाते हुए कहते हैं कि हाय हुसैन हम न हुए. उन्होंने सवाल उठाया कि हुसैन को मारने वाले कौन थे. साक्षी महाराज ने कहा कि यह तालिबानी सोच के लोग धरती के दुश्मन हैं. अफगानिस्तान से भगा दिए गए तो हिन्दुस्तान आ गए. यहाँ से भी भगा दिए जाएं तो समुद्र में डूब मरने के अलावा कोई जगह नहीं मिलेगी.

हिन्दुस्तान में नफरत का व्यापार करने वाले साक्षी महाराज अकेले नहीं हैं. याद करिये उत्तर प्रदेश के ही एक पुजारी बजरंग मुनि का वीडियो वायरल हुआ था. इसमें बजरंग मुनि खुलेआम मुसलमान औरतों के अपहरण और बलात्कार की धमकी देता नज़र आ रहा है.

29 सितम्बर 2015 को वाराणसी में संतों पर हुए लाठीचार्ज के बाद पातालपुरी मठ के महंत से मुलाक़ात करने पहुंची साध्वी प्राची ने कहा था कि हिन्दुओं की किसी भी पूजा पद्धति में मुसलमानों का जाना उचित नहीं है. उन्होंने कहा कि पता नहीं कौन आतंकवादी हिन्दुओं की पूजा पद्धति में पहुँच जाए और वहां पर पता नहीं कौन सी घटना घट जाए. साध्वी प्राची ने हर की पैडी हरिद्वार, वाराणसी और वृन्दावन में मुसलमानों के जाने पर रोक लगाने की बात कही.

साध्वी प्राची अपने 2015 वाले बयान पर अभी तक कायम हैं. 20 अप्रैल2022 को उन्होंने कहा कि हिन्दुओं की चार धाम यात्रा में किसी भी मुसलमान के जाने पर पूरी तरह से प्रतिबन्ध होना चाहिए. उन्होंने कहा कि यह अभी 20 फीसदी हैं तो हमारी धार्मिक यात्रा पर पत्थरबाज़ी करते हैं, गोलियां चलाते हैं. यही 50 फीसदी हो गए तो हिन्दुओं के लिए शोभायात्रा निकालना मुश्किल हो जायेगा.

इससे पहले 25 जुलाई 2019 को साध्वी प्राची ने बागपत में कहा था कि हिन्दू मुसलमान कारीगरों के हाथ से बनी कांवड़ न खरीदें. वह इतने पर ही नहीं रुकीं. उन्होंने कहा कि आज़ादी के बाद जो मुसलमान हिन्दुस्तान में रह गए वह इंसानियत से रहें. अगर गुर्राए तो बर्दाश्त नहीं किया जायेगा. उन्होंने हिन्दुओं से कहा कि वह एक हाथ में माला और दूसरे में भाला उठा लें. अगर किसी ने आँख दिखाई तो भला से काम लें.

साध्वी प्राची भी खूब पढ़ी-लिखी हैं. साक्षी महाराज की तरह से एमए पीएचडी हैं. हरियाणा के आर्य कन्या महाविद्यालय गुरुकुल में प्रिंसिपल रही हैं. हिन्दू-मुसलमान के बीच दरार डालने का काम वही संत बढ़चढ़कर करते रहे हैं जो खूब पढ़े लिखे हैं. जिन्होंने अच्छे स्कूल कालेज और यूनिवर्सिटी से पढ़ने के बाद भगवा चोला पहना है.

इतिहास गवाह है कि समाज में तोड़फोड़ की सबसे बड़ी ज़िम्मेदारी वही लोग उठाते हैं जिन्होंने समाज का भला करने के लिए ज़िन्दगी का एक बड़ा हिस्सा पढ़ाई में गुज़ार दिया. यह मंथन सरकारों और अदालतों को करना चाहिए कि आखिर उच्च शिक्षित लोग समाज की बर्बादी के ज़िम्मेदार क्यों बन जाते हैं. क्या बेरोजगारी इसकी वजह है या फिर तोड़फोड़ के काम में बेशुमार पैसा है. गोरखनाथ मन्दिर का हमलावर मुर्तजा अब्बासी केमिकल इंजीनियर है. ओसामा बिन लादेन सिविल इंजीनियर था. कई डॉक्टर भी तोड़फोड़ में बिजी हैं.

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