Wednesday - 1 April 2020 - 11:27 PM

बच्चों को सिखायें क्यों बोले ‘Sorry’

न्यूज़ डेस्क

नई दिल्ली। कहते है गलतियां करने से बच्चे बड़े होते है, लेकिन बच्चे अपनी गलतियां मानने से बड़े होते है। हर मां- बाप को अपने बच्चों को उनकी गलती मानने के लिए उकसाना चाहिए।

लेकिन सवाल यह आता है कि ‘सॉरी’ शब्द बोलने से आखिर क्या होता है? क्या सच में बच्चा माफ़ी मान लेता है? या उसे अपनी गलती का एहसास हो जाता है?

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ऐसे सवाल मां-बाप अक्सर पेरेंटिंग एडवाइसर से पूछते हुए नजर आते है। आज हम आपके लिए कुछ ऐसे ही सवालों का जवाब लेकर आए है। यह आपके और आपके बच्चों की रिलेशनशिप में सुधार भी लाएगा और आपका रिश्ता खुद-ब-खुद निखर कर बाहर आएगा।

जब कोई भी इंसान ‘सॉरी’ नहीं बोल पाता… यहां तक कि जब उसकी गलती भी हो तो इसका मतलब है कि उस इंसान में ईगो है। अगर हम बच्चे को छोटी ही उम्र से सॉरी बोलना सिखाएंगे तो उसमें आत्मज्ञान आएगा। वो खुद ही समझदार हो जाएगा। अहंकार और घमंड तो दूर उसमें किसी के लिए बुरी भावना भी नहीं आएगी।

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घर में कई बार दादा या दादी भी बच्चों के साथ बच्चे बन जाते है। तब अक्सर बच्चे उन्हें उल्टा जवाब देने लगते है। अगर तब आप उन्हें किसी और की गलतियों के लिए भी सॉरी बोलना सिखाएंगी तब वो सबका सम्मान सीखेंगे। ऐसे उन्हें सबका महत्व समझ आएगा।

जब आपके बच्चे की गलती हो तो बड़े हो या छोटे हर किसी से सॉरी मांगना उन्हें जरूर सिखाए। ऐसे वो हर उम्र के लोगों की इज्जत करना सीखेंगे। आपको भी मांगनी पड़ेगी अपनी गलती पर सॉरी।

अब ऐसा तो नहीं है कि हमेशा बच्चे ही गलतियां करेंगे। कई बार आपसे भी गलतियां हो जाती है। तब आपको भी उन्हें स्वीकारना होगा और सामने आकर माफ़ी मांगनी होगी इससे बच्चे यह सीखेंगे कि आप नहीं करती कोई भेदभाव। आप में है अपनी गलतियों को स्वीकारने की क्षमता। आप नहीं करते बड़ी गलतियों को नजरअंदाज।

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