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	<title>बिल क्लिंटन Archives &#060; Jubilee Post | जुबिली पोस्ट</title>
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	<description>News &#38; Information Portal</description>
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		<title>डंके की चोट पर : वक्त के गाल पर हमेशा के लिए रुका एक आंसू है ताजमहल</title>
		<link>https://www.jubileepost.in/taj-mahal-is-a-tear-that-stopped-on-the-cheek-of-time-forever/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Syed Mohammad Abbas]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 19 May 2022 10:02:43 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Main Slider]]></category>
		<category><![CDATA[ओपिनियन]]></category>
		<category><![CDATA[जुबिली डिबेट]]></category>
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		<category><![CDATA[डॉ. रजनीश कुमार]]></category>
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		<category><![CDATA[बीजेपी सांसद दिया कुमारी]]></category>
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		<category><![CDATA[शबाहत हुसैन विजेता]]></category>
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		<category><![CDATA[संगीत सोम]]></category>
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					<description><![CDATA[शबाहत हुसैन विजेता अमरीकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन ताजमहल के सामने आकर खड़े हुए तो बस खड़े ही रह गए. एक दम विस्मित, आश्चर्यचकित. मुंह से शब्द निकलना मुश्किल हो गया. जब सामान्य हुए तो बोले कि इस दुनिया में दो तरह के लोग हैं. एक वह जिन्होंने ताजमहल देखा है और दूसरे वह जिन्होंने ताजमहल &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #0000ff;"><strong><img loading="lazy" decoding="async" class="alignleft wp-image-87885 size-thumbnail" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2019/03/Shabahat-Husain-Vijeta-150x150.jpg" alt="" width="150" height="150" />शबाहत हुसैन विजेता</strong></span></p>
<p>अमरीकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन ताजमहल के सामने आकर खड़े हुए तो बस खड़े ही रह गए. एक दम विस्मित, आश्चर्यचकित. मुंह से शब्द निकलना मुश्किल हो गया. जब सामान्य हुए तो बोले कि इस दुनिया में दो तरह के लोग हैं. एक वह जिन्होंने ताजमहल देखा है और दूसरे वह जिन्होंने ताजमहल नहीं देखा है.</p>
<p>गुरुदेव रवीन्द्र नाथ टैगोर ने ताजमहल को वक्त के गाल पर हमेशा के लिए रुक जाने वाला आंसू करार दिया. रवीन्द्र नाथ टैगोर ने ताजमहल की ख़ूबसूरती को परखा तो इसे बनाने वाले शाहजहाँ के दिल में भी झांककर देखा. बादशाह जानता था कि वक्त के थपेड़ों में उसकी बादशाहत, उसकी बेशुमार दौलत और ताकत सब कुछ खत्म हो जायेगी. वक्त की आंधी तो उसकी यादों को भी उड़ा ले जायेगी, लेकिन जिस मुमताज़ को ज़िन्दगी से भी ज्यादा चाहा उसके लिए बादशाह ने कुछ ऐसा करने का फैसला किया कि सब कुछ खत्म हो जाए मगर मोहब्बत की तासीर कभी खत्म न होने पाए. बीवी की मोहब्बत में 22 साल तक यमुना के किनारे खड़े होकर उसके मकबरे की तामीर को बेहतर और भी बेहतर बनाने में जुटा रहा.</p>
<p>ताजमहल बनाते वक्त शाहजहाँ जिस मनोदशा से गुज़र रहा था शायद उसी को पढ़कर टैगोर ने कहा होगा कि ताजमहल वक्त के गाल पर हमेशा के लिए रुक जाने वाला आंसू है.</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter wp-image-255634 size-full" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2022/05/Tajmahal.jpg" alt="" width="640" height="361" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2022/05/Tajmahal.jpg 640w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2022/05/Tajmahal-300x169.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 640px) 100vw, 640px" /></p>
<p>मुग़ल बादशाहों पर लगने वाले इल्जामों की बहुत लम्बी फेहरिस्त है. यही वजह है कि इल्जामों के छींटे ताजमहल पर पड़ना भी लाज़मी हैं. ताजमहल को विवादों के घेरे में लाने की तैयारी एक दो साल से नहीं बल्कि एक सदी से चल रही है. ताजमहल को हिन्दू-मुस्लिम बवाल का मुद्दा बनाया जा रहा है. बीजेपी के फायर ब्रांड नेता संगीत सोम ताजमहल को आक्रमणकारियों की निशानी बता चुके हैं. जब संगीत सोम ने ज़हर उगला था तब उन्हें तेजो महालय का ज्ञान नहीं था. 2017 में संगीत सोम ने ताजमहल को भारतीय संस्कृति के लिए काला धब्बा बताया था.</p>
<p>नये-नये इतिहासकार ताजमहल के तहखाने में बने 22 कमरों को खुलवाना चाहते हैं. ज्ञानवापी की तरह उसका वीडियोग्राफी सर्वे करवाना चाहते हैं. वह उन 22 कमरों में शिव मन्दिर से जुड़े सबूत ढूंढना चाहते हैं मगर न उनके साथ अदालत है न सरकार क्योंकि ताजमहल तो कमाऊ पूत है. देश के विभिन्न स्मारकों के पर्यटन से होने वाली कमाई का 19 फीसदी हिस्सा अकेले ताजमहल ही देता है. हर साल दो लाख विदेशी पर्यटक ताजमहल देखने आते हैं. हर विदेशी पर्यटक ग्यारह सौ रुपये का टिकट खरीदकर ताजमहल में घुसता है.</p>
<p>इस बार जब 22 कमरों का मामला उठा तो डॉ. रजनीश कुमार इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुँच गए. कमरों को खुलवाकर जांच की मांग करने लगे. अदालत ने न सिर्फ उनकी याचिका खारिज की बल्कि उन्हें ताजमहल पर पढ़ने और रिसर्च करने की राय भी दे डाली. इसी बीच राजस्थान से बीजेपी सांसद दिया कुमारी की भी इंट्री इस विवाद में हो गई. उन्होंने दावा किया कि ताजमहल की ज़मीन उनके राजघराने की है. ताजमहल के कमरों में राजघराने से सम्बंधित कुछ अंश आज भी मौजूद हैं.</p>
<p>दिया कुमारी ने अपने दावे से पहले अगर इतिहास को भी पढ़ा होता तो शायद उन्होंने ऐसा कोई दावा नहीं किया होता क्योंकि इतिहास यह बताता है कि ताजमहल से पहले यमुना के किनारे जयपुर के महाराजा जयसिंह का आलीशान महल हुआ करता था. ताजमहल बनाने के लिए जब जगह की तलाश शुरू हुई तो शाहजहाँ को वही जगह पसंद आई जहाँ पर महाराजा जयसिंह का महल था.</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter wp-image-153220 size-full" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2020/02/taj-mahal.jpg" alt="" width="694" height="518" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2020/02/taj-mahal.jpg 694w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2020/02/taj-mahal-300x224.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 694px) 100vw, 694px" /></p>
<p>महाराजा जयसिंह कोई साधारण आदमी नहीं थे जो उनके महल को शाहजहाँ ने यूं ही हड़प लिया होगा. जयपुर राजघराने से इस मुद्दे पर बात की गई. आपसी सहमति के बाद इस महल के बदले आगरा शहर के बीचोबीच महाराजा जयसिंह को एक विशाल महल दिया गया. इसके बाद उस महल को ध्वस्त किया गया तो इतना मलबा निकला कि उसे हटाने में ही कई साल लग जाने का अंदेशा हो गया. ऐसे में बादशाह ने एलान किया आगरा और आसपास के किसान जितनी चाहें उतनी ईंटें उठा ले जाएं. इसके बाद तो लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी. देखते ही देखते पूरा मलबा लोग उठा ले गए.</p>
<p>शाहजहाँ आगरा में मोहब्बत का स्मारक बना रहा था. शाहजहाँ जानता था कि हमेशा के लिए कोई नहीं आया. जो पैदा हुआ है उसे एक दिन मर ही जाना है. इस वजह से वह मुमताज़ की याद में बन रहे स्मारक में कोई भी विवाद छोड़कर नहीं जाना चाहते थे तो फिर राजपूताना विरासत की चीज़ों को वह ताजमहल के तहखाने में क्यों सुरक्षित रखवाने का काम करते. उन्होंने तो महल के बदले महल दे दिया ताकि आने वाले दिनों में विवाद की कोई गुंजाइश ही न रह जाए.</p>
<p>शाहजहाँ ने यमुना नदी के किनारे पर ताजमहल को बनाया था तो इसका आर्किटेक्चर इस तरह से तैयार किया गया था कि इमारत की नींव को पानी की नमी हमेशा मिलती रहे. ताजमहल समेत मुग़ल बादशाहों की तमाम इमारतें नदियों के किनारों पर ही बनाई गईं ताकि नदी के पानी की नमी से इमारत को मजबूती मिलती रहे. नींव में लकड़ी की शहतीरें लगाईं गईं क्योंकि लकड़ी पानी पी लेती है और देर तक नम बनी रहती है.</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter wp-image-256233 size-full" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2022/05/taj-mahal.jpg" alt="" width="640" height="349" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2022/05/taj-mahal.jpg 640w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2022/05/taj-mahal-300x164.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 640px) 100vw, 640px" /></p>
<p>ताजमहल बनाने से पहले उसकी नींव की जगह पर 50 कुएं बनाए गए. उन कुओं तक यमुना का पानी लगातार पहुँचता रहे इसका इंतजाम किया गया. यह कुएं 80 मीटर तक गहरे हैं. इन कुओं में चिकनी मिट्टी और ऐसी सामग्री भरी गई है जो कुओं को कभी भी सूखने न दें.</p>
<p>ताजमहल के नीचे शाहजहाँ ने वह 22 कमरे भी बनाये जिन्हें लेकर सवाल उठाये जा रहे हैं. अब सुनिये इन 22 कमरों की दास्तान. यूनीवर्सिटी ऑफ़ वियना में एशियन आर्ट की प्रोफ़ेसर एमा कोच ने लिखा है कि बादशाह ने यह सुन्दर और हवादार जगह इसलिए बनाई होगी ताकि शहंशाह जब मकबरे में अपने घर की महिलाओं के साथ आयें तो इस जगह पर न सिर्फ उन्हें ठंडक मुहैया हो बल्कि वहां तक प्रकृति की रौशनी भी पहुँचती हो. एमा कोच के मुताबिक़ ऐसे तहखाने मुग़ल स्थापत्य कला का हिस्सा रहे हैं. पाकिस्तान के लाहौर में मुग़ल किले में नदी की तरफ खुलने वाले ऐसे कमरों को पूरी श्रंखला है. उनके अनुसार शाहजहाँ ताजमहल में आमतौर पर नदी के रास्ते आते थे. वह नाव से घाट पर बनी सीढ़ियों पर उतरते थे और मकबरे में दाखिल होते थे.</p>
<p>बादशाह ने ताजमहल के तहखाने में यह कमरे गर्मियों में इस्तेमाल के लिए बनवाये थे. इन 22 कमरों में 15 कमरे नदी की साइड में बने हैं. इनके अलावा सात और कमरे हैं जो काफी बड़े हैं. दो कमरे अष्टकोणीय कमरे हैं जो खूबसूरत मेहराबों, रंगीन नक्काशी और जालीदार पैटर्न की वजह से किसी को भी अपनी तरफ खींच सकते हैं.</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter wp-image-256234 size-full" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2022/05/Tajmahal-2.jpg" alt="" width="640" height="480" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2022/05/Tajmahal-2.jpg 640w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2022/05/Tajmahal-2-300x225.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 640px) 100vw, 640px" /></p>
<p>दिल्ली की इतिहासकार राणा सफवी आगरा में ही पली बढ़ी हैं. उनका कहना है कि यह कमरे तो 1978 तक पर्यटकों के लिए खुलते रहे हैं. 1978 में आगरा में ज़बरदस्त बाढ़ आई थी तो इन कमरों में पानी भर गया था. पानी उतरा तो कमरों में रेत भर गई थी. इसके बाद आगरा के जिला प्रशासन ने इन कमरों को पर्यटकों के लिए बंद करने का फैसला किया. वास्तव में इन कमरों में ऐसा कुछ भी नहीं है जो किसी से कुछ छुपाने वाला हो. इन कमरों को भारतीय पुरातत्व विभाग अब भी खुलवाकर उनकी साफ़-सफाई और मरम्मत इत्यादि करवाता रहता है.</p>
<p>1978 में आगरा के प्रशासन संभालने वाले अधिकारी तो अभी भी होंगे. उनसे बातचीत कर पूरे मामले को सार्वजानिक किया जाना चाहिए था ताकि अगर कोई ग़लतफ़हमी फैलाने का काम कर रहा है तो उसे हमेशा के लिए जवाब मिल जाए.</p>
<p>मोहब्बत की निशानी ताजमहल को बनाने में शाहजहाँ ने 22 साल का वक्त लगाया. उसने इस इमारत के हर पहलू पर खूब रिसर्च की. इमारत में लगने वाले पत्थरों तक को हीरे की तरह से परखा. संगमरमर पर कुरान की आयतें लिखने के लिए सऊदी अरब से कारीगर बुलवाए गए. पत्थरों को ख़ूबसूरती से तराशने के लिए बलूचिस्तान से कारीगर आगरा पहुंचे. संगमरमर पर नक्काशी की तकनीक सीखने के लिए कुछ कारीगरों को इटली भेजा गया. उज्बेकिस्तान के बुखारा से भी कारीगरों को बुलाया गया. ताजमहल को इस शानदार तरीके से तैयार करने के लिए शाहजहाँ ने जो जतन किये वह सब इतिहास की किताबों में दर्ज है.</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter wp-image-256235 size-full" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2022/05/Tajmahal-3.jpg" alt="" width="640" height="427" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2022/05/Tajmahal-3.jpg 640w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2022/05/Tajmahal-3-300x200.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 640px) 100vw, 640px" /></p>
<p>इतिहास की समझ रखने वाले यह बात जानते हैं कि दुनिया भर से कलाकारों को बुलाकर आगरा में यमुना के किनारे शाहजहाँ ने मुमताज़ की मोहब्बत की जो दास्तान पत्थरों पर उकेरी उसे संगीतकार संगीत में नहीं ढाल सकता. कलाकार उसे कैनवस पर नहीं उकेर सकता, मोहब्बत करने वाला ऐसी ही कोई दूसरी दास्तान नहीं लिख सकता.</p>
<blockquote><p><img loading="lazy" decoding="async" class="size-full wp-image-104687 alignright" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2019/05/Danke-Chote-Par.jpg" alt="" width="150" height="150" /><span style="color: #ff0000;"><strong>ताजमहल के खिलाफ जो ज़हर उगला जा रहा है वो कोई नया थोड़े ही है. शाहजहाँ ने खुद ताजमहल बनाने के बाद नफरत के कई पत्थर अपने सर पर खाए हैं. उसी के अपने बेटे औरंगजेब ने उसे लालकिले में कैद कर दिया था. लालकिले में बने एक सूराख से जिंदगी की आख़री सांस तक ताजमहल को निहारते रहने वाला शाहजहाँ मरने के बाद मुमताज़ की बगल में दफ्न कर दिया गया. शायद लालकिले के सूराख के पास बैठे शाहजहाँ की आँखों से आंसू बनकर जो मोहब्बत बहती रही होगी उसी को रवीन्द्र नाथ टैगोर ने इतनी शिद्दत से महसूस किया होगा.</strong></span></p></blockquote>
<p>ताजमहल ने साल 2018 में सरकार को 145 करोड़ रुपये कमाकर दिए. हर साल यह इमारत करोड़ों कमाकर देती है. लोग खुशी-खुशी महंगा टिकट खरीदकर ताज के दीदार के लिए दौड़े चले आते हैं. दुनिया भर के टूरिस्ट ताज की ख़ूबसूरती को अपनी आँखों में बसाकर साथ ले जाना चाहते हैं.</p>
<p>ताजमहल मुसलमान ने बनाया यह महज़ एक इत्तेफाक है. यह तो बेपनाह मोहब्बत की निशानी है. मोहब्बत किसी मज़हब का नाम थोड़े ही है. मोहब्बत क्या होती है यह तो हज़रत अमीर खुसरो ही बता पाएंगे. छाप तिलक सब छीनी रे मोसे नैना मिलाई के. या फिर मोहब्बत को समझ पाए गुरुदेव रवीन्द्र नाथ टैगोर जिन्होंने इतनी विशाल इमारत को गाल पर रुके आंसू की बूँद में देख लिया. बिल क्लिंटन की बात को सोचता हूँ तो लगता है कि इस दुनिया में सिर्फ दो तरह के लोग हैं एक वो जो मोहब्बत को समझ पाए और दूसरे वो जो मोहब्बत को नहीं समझ पाए.</p>
<p><span style="color: #993300;"><strong>यह भी पढ़ें : <a style="color: #993300;" href="https://www.jubileepost.in/i-will-not-let-me-sell-the-land-of-this-soil/">डंके की चोट पर : सौगंध मुझे इस मिट्टी की मैं देश नहीं बिकने दूंगा</a></strong></span></p>
<p><span style="color: #993300;"><strong>यह भी पढ़ें : <a style="color: #993300;" href="https://www.jubileepost.in/i-was-also-silent-on-his-murder-now-my-number-has-come/">डंके की चोट पर : उसके कत्ल पे मैं भी चुप था, मेरा नम्बर अब आया</a></strong></span></p>
<p><span style="color: #993300;"><strong>यह भी पढ़ें : <a style="color: #993300;" href="https://www.jubileepost.in/the-syrup-of-politics-filled-these-religious-leaders-with-poison/">डंके की चोट पर : सियासत की चाशनी ने भर दिया इन धर्मगुरुओं में ज़हर</a></strong></span></p>
<p><span style="color: #993300;"><strong>यह भी पढ़ें : <a style="color: #993300;" href="https://www.jubileepost.in/pulkit-mishra-is-neither-a-saint-nor-a-guru-of-the-prime-minister-this-is-a-fraud-only-a-fraud/">डंके की चोट पर : पुलकित मिश्रा न संत है न प्रधानमन्त्री का गुरू यह फ्राड है सिर्फ फ्राड</a></strong></span></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>आज की दुनिया अहंकार , तानाशाही, अव्यवस्था और एनार्की के खिलाफ है</title>
		<link>https://www.jubileepost.in/world-is-against-anancy/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Utkarsh Sinha]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 24 Jan 2021 10:11:41 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Main Slider]]></category>
		<category><![CDATA[ओपिनियन]]></category>
		<category><![CDATA[जुबिली डिबेट]]></category>
		<category><![CDATA[अमरीकी राष्ट्रपति]]></category>
		<category><![CDATA[एन्ड्र जॉन्सन]]></category>
		<category><![CDATA[कल्याणकारी राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[तानाशाही]]></category>
		<category><![CDATA[बिल क्लिंटन]]></category>
		<category><![CDATA[सर्वोच्च न्यायालय]]></category>
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					<description><![CDATA[डॉ. सी. पी. राय अमरीका के निचले सदन ने ट्रम्प खिलाफ आये महाभियोग का प्रस्ताव 197 के मुकाबले 232 वोट से पास कर दिया था । ट्रम्प शायद अमरीका के पहले राष्ट्रपति है जिनके चुनाव जीतते ही जो उन्होने इलेक्टौरल वोट से जीता था जबकी जनता के वोट मे उन्हे हिलेरी क्लिंटन से 65 लाख &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #0000ff;"><strong>डॉ. सी. पी. राय</strong></span></p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignleft wp-image-207561 size-thumbnail" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2021/01/rai-150x150.jpg" alt="" width="150" height="150" />अमरीका के निचले सदन ने ट्रम्प खिलाफ आये महाभियोग का प्रस्ताव 197 के मुकाबले 232 वोट से पास कर दिया था ।</p>
<p>ट्रम्प शायद अमरीका के पहले राष्ट्रपति है जिनके चुनाव जीतते ही जो उन्होने इलेक्टौरल वोट से जीता था जबकी जनता के वोट मे उन्हे हिलेरी क्लिंटन से 65 लाख वोट कम मिले थे पर उनकी विवादास्पद घोषणाओ के कारन तमाम शहरो मे 50/50 हजार लोगो का शान्त जुलुस उनके खिलाफ निकला था ।</p>
<p>और शायद वो इकलौते है जिनके फौज के जर्नल ने कह दिया की वो अमरीका के संविधान को जानते और मानते है न की किसी ट्रम्प को तथा पुलिस के प्रमुख ने कह दिया की यदि उन्हे कोई कायदे की बात करनी हो तो करे अन्यथा अपना मुह बन्द ही रखे । पर ये भी शायद केवल अमरीका मे ही सम्भव है बल्कि भारत मे तो हम अभी कल्पना भी नही कर सकते की ऐसे कोई सत्ताधीशो को संविधान और कर्तव्य का आइना दिखा देगा ।</p>
<p>वो पहले अमरीकी राष्ट्रपति है जिनके खिलाफ दो बार ये प्रस्ताव लाया गया । इनके पहले तीन राष्ट्रपतियो एन्ड्र जॉन्सन 1868 ,  बिल क्लिंटन 1998 तथा निक्सन के खिलाफ भी वाटर गेट पर महाभियोग आया था जिसमे निक्सन ने पद छोड दिया था और बाकी दोनो के खिलाफ भी कार्यवाही पूरी नही हुयी ।पूर्व मे ट्रम्प के खिलाफ भी आगे नही बढा महाभियोग क्योकी समर्थन नही मिला ।पर इस बार कांग्रेस मे खुद उन्ही की पार्टी रिपब्लिकन सांसदो ने भी महाभियोग का समर्थन किया और अब ये सीनेट मे विचार के लिये जायेगा जहा बडी  कार्यवाही के लिये 100 मे 67 सांसदो की जरूरत होगी जो रिपब्लिकन के मदद के बिना नही होगा पर केवल बहुमत से उन्हे आगे किसी की ऐसे पद के लिये अयोग्य ठहराया जा सकता है पर इसके लिये अभी इन्तजार करना होगा ।</p>
<p>वैसे नये राष्ट्रपति जो बिडेन ने आगे कुछ ज्यादा करने मे अरुचि दिखाया है और पूरे अमरीका को साथ लेकर चलने की बात किया है पर उनकी पार्टी सहित अमरीका मे महाभियोग को मुकाम तक पहुचाने पर जोर है ताकी फिर कोई ऐसी हिमाकत न कर सके जो पिछ्ले दिनो अमेरिकी संसद मे हुयी ।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter wp-image-195288 size-full" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2020/11/Donald-Trump-5.jpg" alt="" width="795" height="447" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2020/11/Donald-Trump-5.jpg 795w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2020/11/Donald-Trump-5-300x169.jpg 300w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2020/11/Donald-Trump-5-768x432.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 795px) 100vw, 795px" /></p>
<p>अमरीका के राष्ट्रपति हो या पूर्व राष्ट्रपति उनका पद ग्रहण और विदाई बहुत ही गरिमा पूर्ण होती है जिससे ट्रम्प वंचित रहें ।</p>
<p>क्या ये सबक बन पायेगा दुनिया के उन तमाम नेताओ के लिये जो खुद और खुद की सत्ता को किसी भी तरह कायम रखना चाहते है और संस्थाओ तथा स्थापित परम्पराओ से ऊपर खुद को समझ कर उन्हे खत्म करने मे लगे हुये है । दुनिया बदल रही है और आज की दुनिया अहंकार , तानाशाही , अव्यवस्था और एनार्की के खिलाफ है ।</p>
<p>चीन ने अपने को लोहे की दीवार या आयरन कर्टेन मे कैद कर रखा था और वहाँ एक ही माओ कमीज और एक ही घड़ी नीचे से ऊपर तक सब पहनते थे पर चीन को वो लोहे की दीवार गिराना पडा और खुली अर्थवयवस्था की तरफ तथा दुनिया से व्यापार की तरफ कदम बढ़ाना पडा और दुनिया को चीन मे तथा चीनियो को दुनिया मे जाने आने की आज़ादी देनी पडी ।</p>
<blockquote><p><span style="color: #ff0000;"><strong>चीन मे 1989 मे वहां के भ्रस्टाचार और तमाम समस्याओ के खिलाफ तिनमीन चौक पर हुये छात्र आन्दोलन पर गोली और टैंक सभी का प्रयोग हुआ और वहाँ लाशे ही लाशे थी पर आज उसी चीन के होंगकोंग मे लगातार आन्दोलन मे टैंक और गोली का इस्तेमाल 1989 की तरह नही हो पा रहा है ।</strong></span></p></blockquote>
<p>रुस मे गोर्बाचोव बहुत मजबूत नेता हुये और नोबल पुरस्कार भी पाया पर गलास्नोस्त और पेरोस्त्राईका के उनके फैसलो ने रुस की टुकडे टुकडे कर दिया और  उसके बाद के चुनाव मे भी गोर्बाचोव राष्ट्रपति पद के लिये खड़े हुये पर रुस की जनता ने उनको ऐसे अंजाम तक पहुचाया की आज उनका कही नाम ही नही है । आज की तारीख मे तानाशाही केवल नार्थ कोरिया जैसे छोटे देशो मे देखने को मिलती है पर वहां भी अभी तानाशाह ने जनता से खेद प्रकट किया की वो शायद जनता को मजबूत नही कर सके और उसकी आकांक्षाओ को पूरा नही कर सके ।</p>
<p>पिछ्ले ही साल मैं ईरान मे गया था जिसे मैं तानाशाही मुल्क समझता था पर हमारे पहुचने के पहले ही वहा आन्दोलन हुआ था छात्रो का और वहा भी चुनाव मे तमाम दल हिस्सा लेते है ।</p>
<blockquote><p><span style="color: #ff0000;"><strong>तानाशाही ,अव्यवस्था और एनार्की ऐसा और भी तमाम देशो का इतिहास रहा है ,पर किसी तरह अकारण ही सत्ता पा गये अयोग्य लोग आमतौर पर असफल होते है पर स्वीकार नही करते है , अपनी अयोग्यता अपने अहंकार से ढकने की कोशिश करते है और अपने देश का नुक्सान कर भविष्य के प्रति भयभीत होकर किसी भी तरह सत्ता मे काबिज रहने की कोशिश करते है और तब उनका परिणाम ट्रम्प और गोर्बाचोव जैसा होता रहा है और होगा भी ।</strong></span></p></blockquote>
<p>क्या ये अमरीका और ट्रम्प का सबक बन पायेगा नजीर और सबक दुनिया के उन तमाम नेताओ के लिये जो खुद और खुद की सत्ता को किसी भी तरह कायम रखना चाहते है और संस्थाओ तथा स्थापित परम्पराओ से ऊपर खुद को समझ कर उन्हे खत्म करने मे लगे हुये है ।</p>
<p>अमरीका मे तो अभी इन्तजार करना होगा 20जनवरी के बाद के एक दो महीने तक की अमरीका अपने भविष्य की चौकसी कैसे करता है और क्या बुनियाद रखता है तथा कैसी दीवार खड़ी करता है सख्त फैसले की कि फिर कोई ट्रम्प या तो सत्ता ही न पाये या ऐसी हिमाकत ही न कर पाये और न उसके आह्वान पर एनार्की फैलाने की कोई हिम्मत कर पाये ।</p>
<p>और निगाह रखना होगा ऐसे ही आचार विचार वाले दुनिया के अन्य लोगो पर भी कि बो सबक लेकर ठिठक जाते है या ऐसे मंसूबे पाले ही रहता है ।</p>
<blockquote><p><span style="color: #ff0000;"><strong>भारत दुनिया का आबादी के हिसाब से सबसे बडा लोकतंत्र है जो परिपक्व होने के इन्तजार मे है पर उसपर ग्रहण लगाने की कोशिशे भी हो रही है ।अमरीका मे तो चुनाव लड़ने के लिये भी चुनाव होता है और नीचे स्कूल सिटी से लेकर हाई कोर्ट के जज से लेकर ऊपर तक चुनाव होता है और सर्वोच्च न्यायालय के न्यायधीश मनोनीत होते है फिर भी फूहड़ हरकते और राजनीतिक प्रतिबद्धता उनके कर्यो मे परिलक्षित नही होती पर भारत?</strong></span></p></blockquote>
<p>अब एक सुनहरे भविष्य  ,सच्चे लोकतंत्र, कल्याणकारी राज्य और केवल संविधान तथा कानून के शासन के लिये आवाज उठाने का समय है और आवाज उठाने का  अहंकार ग्रस्त नेतृत्व ,  तानाशाही , हिटलर शाही , किसी भी तरह की एनार्की और आवश्यक संस्थाओ के निस्पक्ष्ता के लिये उनपर हमले के खिलाफ और इंसानियत के वजूद और स्वर्णिम भविष्य के लिये और ये आवाजे अब रुकेंगी नही ।</p>
<p><em>(लेखक वरिष्ठ पत्रकार और स्वतंत्र राजनीतिक चिंतक हैं)</em></p>
<p>&nbsp;</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>क्या अमरीका से दुनिया को कोई सबक़ मिलेगा ?</title>
		<link>https://www.jubileepost.in/world-get-a-lesson-from-america-joe-biden-take-oath-of-new-president/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Ali Raza]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 21 Jan 2021 06:49:53 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Main Slider]]></category>
		<category><![CDATA[ओपिनियन]]></category>
		<category><![CDATA[अमरीकी]]></category>
		<category><![CDATA[उप राष्ट्रपति पेंस]]></category>
		<category><![CDATA[ओबामा]]></category>
		<category><![CDATA[गार्ड ऑफ आनर]]></category>
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		<category><![CDATA[जुबिली पोस्ट हिंदी खबर]]></category>
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					<description><![CDATA[डॉ. सी पी राय एक ग़लत फ़ैसला देश को कहा पहुँचा देता है और व्यवस्था तथा समाज को कितना छिन्न भिन्न कर देता है ? कोई अयोग्य और ग़लत व्यक्ति किसी नारे या भावना में सत्ता तो पा सकता हैं पर उसके योग्य वो सफल लोगों का अनुसरण कर, योग्य लोगों से सलाह कर और &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h4><strong><span style="color: #0000ff"><img loading="lazy" decoding="async" class=" wp-image-175412 alignleft" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2020/06/cp-rai.jpg" alt="" width="141" height="141" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2020/06/cp-rai.jpg 186w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2020/06/cp-rai-150x150.jpg 150w" sizes="auto, (max-width: 141px) 100vw, 141px" />डॉ. सी पी राय</span></strong></h4>
<p>एक ग़लत फ़ैसला देश को कहा पहुँचा देता है और व्यवस्था तथा समाज को कितना छिन्न भिन्न कर देता है ? कोई अयोग्य और ग़लत व्यक्ति किसी नारे या भावना में सत्ता तो पा सकता हैं पर उसके योग्य वो सफल लोगों का अनुसरण कर, योग्य लोगों से सलाह कर और सबको साथ लेकर तथा ख़ुद को उसके लिए बदलने की इच्छा से ही सिद्ध कर सकता है । ये अमरीका ने 20 जनवरी 2017 से 20 जनवरी 2021 तक देखा और दुनिया के कई देश अभी भी देख रहे है ।</p>
<p>आज अमेरिका का दिन है। आज लोकतंत्र का दिन है। आज अमरीकी एकता का दिन है। मैं पूरे अमरीका का राष्ट्रपति हूँ। अब सबकी बात सुनी जायेगी और सबके लिये किया जायेगा। मतभिन्नता हो सकती है पर विभाजन नही।अमरीका मे किसी भी तरह के और किसी भी आधार के नफरत के लिये जगह नही है।</p>
<p>हमारे विचार अलग हो सकते है पर हम सब पहले और अन्त मे अमरीकी है। हमारे सामने पहले भी चुनौतियां आयी है और हमे विभाजित तथा कमजोर करने वाली ताकतें नई नहीं है, पर अमरीका ने हमेशा इन पर जीत हासिल किया है ।</p>
<p>पिछ्ले दिनो जो हुआ वो अमरीका की 200 साल से ज्यादा की परम्पराओं और लोकतंत्र पर हमला था पर अब ये दुबारा नहीं होगा और कभी नहीं होगा । हम ताकत के उदाहरण से नही बल्की उदाहरण की ताकत से चलेंगे ।</p>
<blockquote><p><span style="color: #ff0000">आज अमरीका मे 46 वे राष्ट्रपति जो बाइडेन ने राष्ट्रपति पद की शपथ लेने के बाद कुछ इस तरह से देश को संबोधित किया और आश्वस्त किया कि अमरीका अपनी सभी चुनौतियों पर एकजुट रह कर विजय पायेगा और पूरा अमरीका एक होकर लडे़गा वो चाहे अभी की आपदा हो या रोजगार का सवाल हो या आने वाली पीढियों के भविष्य का सवाल और उनके लिये समर्थ तथा सक्षम अमरीका बनाने का सवाल हो ।</span></p></blockquote>
<p>इसके पहले आज पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने 19 वी शताब्दी से अब तक की परम्परा को दरकिनार करते हुये राष्ट्रपति के शपथ ग्रहण समारोह में हिस्सा नही लेने का फैसला किया और पहले ही राष्ट्रपति भवन वाइट हाउस छोड़ गये । मैने पिछ्ले साल ट्रम्प की शपथ के दिन ही जो उनके बारे मे लिखा था पूरी तरह सही साबित हुआ ।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter wp-image-206983 size-full" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2021/01/navbharat-times-2.jpg" alt="" width="540" height="405" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2021/01/navbharat-times-2.jpg 540w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2021/01/navbharat-times-2-300x225.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 540px) 100vw, 540px" /></p>
<p>यद्दपि सिस्टम ने उनको सम्मानजनक तरीके से और स्थापित परम्परा से ही विदा किया जिसमें उन्हे गार्ड ऑफ आनर देने से लेकर उनकी मर्जी से स्थान तक उसी सम्मान से पहुंचाने तक सब हुआ पर जहां वाइट हाउस पर मुश्किल से 100/200 लोग थे</p>
<p>वहीं, जहां गार्ड ऑफ आनर के बाद ट्रम्प ने अपना आखिरी सम्बोधन दिया वहा भी मुट्ठी भर लोग ही आये और उनके विदाई कार्यक्रम मे खुद उनकी ही पार्टी का कोई मह्त्वपूर्ण व्यक्ति शामिल नहीं हुआ ।</p>
<p>जबकी बिडेन के शपथग्रहण मे जॉर्ज बुश, बिल क्लिंटन ,ओबामा सहित कई पूर्व राष्ट्रपति और वर्तमान उप राष्ट्रपति पेंस,तमाम विदेशी मेहमान सहित वो तमाम लोग मौजूद थे जो ऐसे अवसर पर होते है ।</p>
<p>ये अलग बात है कि ट्रम्प के द्वारा करवाये गये हुडडंग के कारण पूरा समारोह स्थल इस बार छावनी बना हुआ था तो कोरोना के कारण हर बार की तरह लाखों की भीड वाला कार्यक्रम नही था और व्यवस्थाओ मे कटौती कर दी गई थी ।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter wp-image-206984 size-full" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2021/01/04_12_2018-kamala-harris-us_18713450.jpg" alt="" width="650" height="540" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2021/01/04_12_2018-kamala-harris-us_18713450.jpg 650w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2021/01/04_12_2018-kamala-harris-us_18713450-300x249.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 650px) 100vw, 650px" /></p>
<blockquote><p><span style="color: #ff0000">अमरीका ने एक नया इतिहास भी बनाया इस बार 200 साल से ज्यादा का लोकतंत्र होने के बावजूद आज तक कोई महिला राष्ट्रपति या उप राष्ट्रपति नही हुयी थी जो इस बार हो गया और वही कमला हैरिस के शपथ के साथ पहले अमरीकी एशियायी ने भी इतना बड़े पद पर बैठने का सौभाग्य पाया ।</span></p></blockquote>
<p>आज देश को संबोधित करते हुये बिडेन खुद भी भावुक थे और लोगो को भी उन्होने भावुक किया और उनका लगातार जोर अमरीका की एकता , अमरीका के संविधान की सर्वोच्च्ता और लोकतंत्र की रक्षा तथा उसकी मजबूती पर था ।</p>
<p>चुकी अमरीका के राष्ट्रपति का शपथग्रहण था तो पूरी दुनिया की निगाह उसपर थी और संदेश भी स्प्ष्ट था लोकतंत्र के प्रति प्रतिबद्धता और संविधान की रक्षा । शायद दुनिया मे लोकतंत्र और संविधान से खिलवाड़ करने की इच्छा रखने वालो को कुछ सबका मिला होगा और ट्रम्प के प्रति अमरीका के व्यवहार ने भी शायद चेतावनी का काम किया होगा की व्यव्स्थाओं , संस्थाओं , मान्यताओं , परम्पराओं लोकतंत्र, संविधान से खिलवाड़ आप को किस स्थिति में पहुंचा सकता है ।</p>
<p><strong>(लेखक स्वतंत्र राजनीतिक चिंतक और वरिष्ठ पत्रकार हैं)</strong></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>फंस ही गए डोनाल्ड ट्रंप, निचले सदन में महाभियोग प्रस्ताव पास</title>
		<link>https://www.jubileepost.in/donald-trump-trapped-impeachment-motion-passed-in-lower-house/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Syed Mohammad Abbas]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 14 Jan 2021 05:00:22 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[कुमार भवेश चंद्र अमेरिकी लोकतंत्र पर कालिख पोतने वाले ट्रंप अब अपनी करनी की वजह से फंसते नजर आ रहे हैं। यह तय हो गया है कि अमेरिकी राष्ट्रपति के तौर पर गरिमामय विदाई से वह वंचित रहेंगे। विवादों में रहना उनकी नियति रही। राष्ट्रपति चुने जाने से लेकर पूरे कार्यकाल में, और अब जब &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #000080;"><strong>कुमार भवेश चंद्र</strong></span></p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="wp-image-139339 alignleft" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2019/11/kumar-bhavesh-150x150.jpg" alt="" width="120" height="120" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2019/11/kumar-bhavesh-150x150.jpg 150w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2019/11/kumar-bhavesh.jpg 270w" sizes="auto, (max-width: 120px) 100vw, 120px" /></p>
<p>अमेरिकी लोकतंत्र पर कालिख पोतने वाले ट्रंप अब अपनी करनी की वजह से फंसते नजर आ रहे हैं। यह तय हो गया है कि अमेरिकी राष्ट्रपति के तौर पर गरिमामय विदाई से वह वंचित रहेंगे। विवादों में रहना उनकी नियति रही।</p>
<p>राष्ट्रपति चुने जाने से लेकर पूरे कार्यकाल में, और अब जब राष्ट्रपति के रूप में उनकी विदाई का आखिरी हफ्ता आ गया है वे विवादों के बादशाह बन गए हैं। अमेरिका के निचले सदन यानी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव ने उनके खिलाफ महाभियोग लाने के प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी है।</p>
<p>अमेरिका यह भी एक नया इतिहास होगा कि कोई राष्ट्रपति अपने पूरे कार्यकाल में दूसरी बार महाभियोग का सामना करने जा रहा है। राष्ट्रपति रहते हुए उन पर अपने ही देश में विद्रोह को हवा देने के आरोप लगे।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter size-full wp-image-204791" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2021/01/trump-capital.jpg" alt="" width="970" height="545" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2021/01/trump-capital.jpg 970w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2021/01/trump-capital-300x169.jpg 300w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2021/01/trump-capital-768x432.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 970px) 100vw, 970px" /></p>
<p>पिछले ही हफ्ते चुनाव नतीजों को अमेरिकी पार्लियामेंट की स्वीकृति देने के लिए संसदीय कार्यवाही के दौरान उनका और उनके समर्थकों का जो रवैया सामने आया, पूरी दुनिया में उसकी आलोचना हुई। उनकी सार्वजनिक अपील को अमेरिकी लोकतंत्र को शर्मसार करने वाला कदम बताया गया। दुनिया के प्रमुख नेताओं ने उनके इस कृत्य की आलोचना की। अमेरिकी संसद पर ट्रंप भक्तों के हमले की तीखी निंदा हुई।</p>
<p>इन सबने डोनल्ड ट्रंप को अपनी ही पार्टी की नजरों में गिरा दिया। हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव में ट्रंप के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पर 10 रिपब्लिकन सांसदों के वोट बताते हैं कि उनकी प्रतिष्ठा अब उनकी पार्टी में भी नहीं बची है। उनके खिलाफ महाभियोग चलाने का प्रस्ताव पूर्ण बहुमत से पास हुआ है।</p>
<p><span style="color: #800000;"><strong>यह भी पढ़ें :  <a style="color: #800000;" href="https://www.jubileepost.in/who-warning-said-can-be-more-difficult-than-before/">WHO की चेतावनी, कहा- पहले से अधिक कठिन हो सकता…</a></strong></span></p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter size-full wp-image-205861" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2021/01/america-mahabhiyog.jpg" alt="" width="737" height="399" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2021/01/america-mahabhiyog.jpg 737w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2021/01/america-mahabhiyog-300x162.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 737px) 100vw, 737px" /></p>
<blockquote><p><span style="color: #ff0000;"><strong>अमेरिकी मीडिया के अनुसार प्रस्ताव के पक्ष में 232 वोट पड़े जबकि विरोध में 197 वोट डाले गए। महाभियोग के पक्ष में वोट करने वाले सांसदों की साफ राय थी कि पिछले दिनों संसद हुए फसाद के लिए ट्रंप पूरी तरह जिम्मेदार है। हालांकि प्रस्ताव पारित होने से ठीक पहले ट्रंप को सदबुद्धि आ गई थी और उन्होंने कहा कि अब वे किसी तरह की हिंसा के पक्ष में नहीं।</strong></span></p></blockquote>
<p>उन्होंने अपने लोगों से अपील भी की कि अब किसी तरह की हिंसा नहीं होनी चाहिए। कानून तोड़ने या इसी तरह की किसी तरह की कार्रवाई का वे विरोध करते हैं। लेकिन उनके आदर्शवादी भाषण का वोटिंग पर कोई असर नहीं हुआ। तनाव और माहौल को शांत करने की अमेरिकी नागरिकों से उनकी अपील के बावजूद उनकी ही पार्टी के 10 सांसदों ने उनके खिलाफ मतदान किया और नतीजा ये हुआ कि महाभियोग को साफ बहुमत के साथ पारित कर दिया गया।</p>
<p>महाभियोग पर बहस के दौरान भी ट्रंप को सांसदों की खूब खरी खोटी सुननी पड़ी। कहा गया कि अमेरिकी संसद में उस दिन जो भी हुआ उसे विरोध नहीं बल्कि विद्रोह कहना चाहिए। यह अमेरिका के लोकतंत्र पर संगठित विरोध था और दुखद है कि इसे अमेरिकी राष्ट्रपति ने इसे भड़काया। सबसे कड़ा आक्षेप हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव की स्पीकर नैंसी पेलोसी लगाया।</p>
<p><span style="color: #800000;"><strong>यह भी पढ़ें : <a style="color: #800000;" href="https://www.jubileepost.in/%e0%a4%a4%e0%a5%8b-%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%93%e0%a4%b5%e0%a5%88%e0%a4%b8%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%aa%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%9f%e0%a5%80-%e0%a4%ac%e0%a5%80/">…तो क्या ओवैसी की पार्टी बीजेपी की ‘बी टीम’ है?</a></strong></span></p>
<p><span style="color: #800000;"><strong>यह भी पढ़ें :  <a style="color: #800000;" href="https://www.jubileepost.in/now-this-congress-leader-has-raised-questions-on-kovaxin/">कोवैक्सीन पर इस कांग्रेस नेता ने उठाया सवाल, कहा-भारतीय “गिनी सूअर” नहीं</a></strong></span></p>
<figure id="attachment_205858" aria-describedby="caption-attachment-205858" style="width: 800px" class="wp-caption aligncenter"><img loading="lazy" decoding="async" class="wp-image-205858 size-full" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2021/01/nancy-poly.jpg" alt="" width="800" height="450" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2021/01/nancy-poly.jpg 800w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2021/01/nancy-poly-300x169.jpg 300w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2021/01/nancy-poly-768x432.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 800px) 100vw, 800px" /><figcaption id="caption-attachment-205858" class="wp-caption-text">नैंसी पेलोसी.</figcaption></figure>
<p>उन्होंने तो यहां तक कह दिया कि ट्रंप देश के लिए खतरा बन चुके हैं। उन्होंने साफ कहा कि ट्रंप ने देश के खिलाफ विद्रोह के लिए लोगों को उकसाया। ट्रंप ने चुनाव के नतीजों को कभी स्वीकार नहीं किया और उसके बारे में बार-बार झूठ बोला। लोकतंत्र पर बेवजह शक किया गया।</p>
<p>पेलोसी ने कहा कि महाभियोग का यह संवैधानिक तरीका ट्रंप से अमेरिकी गणतंत्र को सुरक्षित करेगा। उन्होंने इसे लगातार नुकसान पहुंचाया है। रिपब्लिकन पार्टी के जिम जॉर्डन ने ट्रंप का बचाव किया। उन्होंने  कहा कि डेमोक्रेट्स राष्ट्रपति ट्रंप को समय से पहले हटाने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन उनकी बात का समर्थन उनकी ही पार्टी के 10 सांसदों ने नहीं किया।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter size-full wp-image-205857" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2021/01/cnn-image-1.jpg" alt="" width="800" height="450" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2021/01/cnn-image-1.jpg 800w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2021/01/cnn-image-1-300x169.jpg 300w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2021/01/cnn-image-1-768x432.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 800px) 100vw, 800px" /></p>
<p>बहरहाल ट्रंप के खिलाफ महाभियोग का यह प्रस्ताव अब अमेरिकी सीनेट यानी वहां के उच्च सदन में विचार के लिए रखा जाएगा। और अमेरिका समेत पूरी दुनिया की नजर वहां से आने वाले फैसले पर टिकी है। 2019 में ट्रंप के खिलाफ लाए गए महाभियोग को सीनेट ने नामंजूर कर दिया था।</p>
<p><span style="color: #800000;"><strong>यह भी पढ़ें : <a style="color: #800000;" href="https://www.jubileepost.in/if-the-temperature-increases-like-this-the-drought-will-increase/">ऐसे ही तापमान बढ़ता रहा तो बढ़ जाएगी सूखे…</a></strong></span></p>
<p><span style="color: #800000;"><strong>यह भी पढ़ें : <a style="color: #800000;" href="https://www.jubileepost.in/who-warning-said-can-be-more-difficult-than-before/">WHO की चेतावनी, कहा- पहले से अधिक कठिन हो सकता…</a></strong></span></p>
<p>यही एक उम्मीद बाकी है कि ट्रंप को किसी तरह की राहत मिले। लेकिन हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव मे जिस तरह से उनकी ही पार्टी के सांसदों ने उनका साथ नहीं दिया है उससे किसी भी तरह के नतीजे का अनुमान मुश्किल नहीं है। हाल में संसद पर ट्रंप समर्थकों के हमले के बाद पार्टी के भीतर भी उनको लेकर समर्थन कम हुआ है।</p>
<p>अमेरिका के इतिहास में राष्ट्रपति के ऊपर इस तरह के महाभियोग का मामला केवल तीन बार सामने आया है। 1998 में मोनिका लेविंस्की की वजह से विवादों में आए बिल क्लिंटन को महाभियोग का सामना करना पड़ा था जबकि उससे भी पहले 1868 में एंड्रयू जॉनसन ने ऐसे ही संसदीय अपमान का सामना किया था। अमेरिकी इतिहास में यह भी दिलचस्प है कि ट्रंप को अपने कार्यकाल की समाप्ति के आखिरी हफ्ते में इस तरह के महाभियोग का सामना करने की नौबत आ रही है।</p>
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		<title>प्रीस्ट और पालिटीशियन इस मुल्क के लिए सबसे बड़ा खतरा हैं : गोपाल दास नीरज</title>
		<link>https://www.jubileepost.in/priest-and-politician-are-the-biggest-threat-to-this-country-gopal-das-neeraj/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Syed Mohammad Abbas]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 04 Jan 2021 11:56:50 +0000</pubDate>
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		<category><![CDATA[लिट्फेस्ट]]></category>
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					<description><![CDATA[गीत सम्राट गोपाल दास नीरज का आज जन्मदिन है. यह इंटरव्यू दो दशक से भी ज्यादा पुराना है. राजभवन के कवि सम्मेलन के बाद होटल के कमरे में नीरज जी के साथ रात-भर बातचीत हुई थी. व्यंग्यकार सर्वेश अस्थाना भी साथ थे. सुबह के चार बज गए तो वह उठ खड़े हुए. नीरज जी बोले &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #ff0000;"><strong>गीत सम्राट गोपाल दास नीरज का आज जन्मदिन है. यह इंटरव्यू दो दशक से भी ज्यादा पुराना है. राजभवन के कवि सम्मेलन के बाद होटल के कमरे में नीरज जी के साथ रात-भर बातचीत हुई थी. व्यंग्यकार सर्वेश अस्थाना भी साथ थे. सुबह के चार बज गए तो वह उठ खड़े हुए. नीरज जी बोले एक घंटा और बैठो, फिर तुम लोग घर चले जाना और मैं स्टेशन. चले जाओगे तो सो जाऊँगा और मेरी ट्रेन छूट जायेगी.</strong></span></p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>इस मुलाक़ात के बाद नीरज जी से मुलाकातों का सिलसिला सा चल निकला. नीरज जी आज नहीं हैं तो वह पल बड़े अनमोल लगते हैं जो उनके साथ गुज़ारे. उन्हें मंचों पर कवितायें पढ़ते देखा. मंच पर अभिनय करते देखा. नवयुग गर्ल्स कालेज में उनके एकल काव्य पाठ के दौरान उन्हें असली हीरो की शक्ल में देखा. आटोग्राफ के लिए उन्हें लोगों से घिरा देखा.</strong></span></p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>गोपाल दास नीरज जिन्होंने फिल्मों के लिए लिखा. जो सत्ता के करीब रहकर भी सत्ता से दूर रहे. भाषा संस्थान के अध्यक्ष के तौर पर जब उन्हें कैबिनेट मंत्री का दर्जा मिला था तब भी अपनी जेब से पैसे निकालकर चाय मंगवाकर पिलाते थे.</strong></span></p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>गोपाल दास नीरज का लखनऊ में सर्वेश अस्थाना से बड़ा ख़ास रिश्ता था. इस रिश्ते की गहराई को समझना हो तो गन्ना संस्थान में नीरज जी नाटक में अभिनय कर रहे थे. हाल में लोग आ चुके थे. इसी बीच किसी बात को लेकर नीरज जी के बेटे और सर्वेश अस्थाना में कहासुनी शुरू हो गई. नीरज जी बीच में आ गए. दोनों को अलग किया क्योंकि शो शुरू होने वाला था. शो के बाद सर्वेश नीरज जी के बगल में बैठे थे और बेटा सामने.</strong></span></p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>स्मृतियों में इतना कुछ उभर रहा है कि लिखना बंद नहीं होगा. जुबिली पोस्ट के पाठकों के लिए दो दशक से ज्यादा पुराना इंटरव्यू ज्यों का त्यों पेश कर रहा हूँ. इंटरव्यू पुराना है लेकिन पढ़िएगा तो हालात वहीं नज़र आयेंगे जहाँ तब थे.</strong></span></p>
<p><span style="color: #0000ff;"><strong>शबाहत हुसैन विजेता</strong></span></p>
<p>बाल ठाकरे राष्ट्रवादी व्यक्ति थे लेकिन थोड़ा बहक गये थे। बहके तो अमरीकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन भी थे लेकिन वह हद से ज्यादा बहक गये थे। बाल ठाकरे ने महाराष्ट्र का चौधरी बनने की जद्दोजहद की थी तो क्लिंटन ने पूरी दुनिया का चौधरी बनना चाहा था। नतीजा क्या हुआ उनके गुनाहों की गगरी कभी मोनिका लेविंस्की के नाम पर चटकती नजर आयी तो कभी सद्दाम हुसैन के नाम पर फूटती नजर आयी। हिन्दी कविता के काल पुरुष गोपाल दास नीरज ईश्वर को छोड़कर हर विषय पर बड़ी बेबाकी से बोलते हैं। वह कम लोगों से प्रभावित होते हैं लेकिन सद्दाम हुसैन का प्रभाव उनके जेहन पर इस हद तक है कि वह कहते हैं :- <span style="color: #993300;"><strong>&#8216;बारूद के पहाड़ पर वह नाम लिखेंगे, हम कर्बला का फिर नया पैगाम लिखेंगे, मर्दानगी का जिक्र कहीं जब भी छिड़ेगा, सब लोग बड़े फख्र से सद्दाम लिखेंगे</strong></span>। यह पंक्तियां सुनाते हुए नीरज के चेहरे पर सद्दाम हुसैन के कई रूप तैर जाते हैं। ईराक की सत्ता संभालते हुए अमरीका के सामने न झुकना, सत्ता से बेदखल हो जाने के बाद भी खुद को शासक मानते रहना, अदालत में सुनवाई के दौरान खुद का परिचय देते हुए &#8216;आई एम प्रेसीडेंट आफ ईराक कहना और फांसी की सजा हो जाने पर चेहरे पर डर का कोई भाव न आना, फांसी का फंदा खुद ही अपने गले में डालकर मौत को गले लगा लेने के हुनर ने सद्दाम को हिन्दी कविता के काल पुरुष के जेहन में अमर कर दिया है।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class=" wp-image-204355 aligncenter" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2021/01/Neeraj-3-300x172.jpg" alt="" width="574" height="329" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2021/01/Neeraj-3-300x172.jpg 300w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2021/01/Neeraj-3.jpg 640w" sizes="auto, (max-width: 574px) 100vw, 574px" /></p>
<p>भगवान श्रीकृष्ण, राम कृष्ण परमहंस, महावीर, गौतम, बुद्ध, आचार्य रजनीश और मदर टेरेसा गोपाल दास नीरज की गुड बुक्स में हैं। वह इन पर रात भर धारा प्रवाह बोल सकते हैं। कुछ साल पहले नीरज जी से रात भर बात हुई थी और बात करते हुए वह न तो थकते नजर आये थे और न ही नींद उन पर हावी होती नजर आयी थी। हिन्दी कविता के अलावा भी तमाम मुद्दों पर नीरज जी पैनी नजर रखते हैं। विज्ञान कभी नीरज जी का विषय नहीं रहा लेकिन जेनेटिक्स इंजीनियरिंग पर उनकी नालेज किसी वैज्ञानिक से कम नहीं है।</p>
<p>नीरज का मानना है कि कुष्ठ, एड्स टीबी, ब्लड कैंसर और असाध्य रोगों से पीडि़त व्यक्ति को बच्चे पैदा करने का अधिकार नहीं होना चाहिए। वह कहते हैं कि पपीते तक की नस्ल सुधारने पर शोध हो रहा है। अच्छे जानवर कैसे पैदा हों इस पर वैज्ञानिक मगजमारी कर रहे हैं। विदेशों में अच्छे मनुष्य पैदा करने के लिए &#8216;स्पर्म बैंक खोले जा चुके हैं। क्लोनिंग के जरिये दूसरे नीरज और आइंसटीन पैदा करने में वैज्ञानिक सफल हो गये हैं तो फिर इसकी क्या जरूरत है कि कुष्ठरोगी भी अपनी जमात बढ़ाता रहे और एड्स पीडि़त भी खतरे की घंटी बजाता रहे। उनका कहना है कि जब विज्ञान के जरिये हम मनचाही योग्यता के बच्चे पैदा कर सकते हैं तो बुद्ध और आइंसटीन क्यों न पैदा करें।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class=" wp-image-204356" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2021/01/Neeraj-4-300x249.jpg" alt="" width="573" height="476" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2021/01/Neeraj-4-300x249.jpg 300w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2021/01/Neeraj-4.jpg 578w" sizes="auto, (max-width: 573px) 100vw, 573px" /></p>
<p>नीरज को हिन्दुस्तान के लिए प्रीस्ट और पालिटीशियन सबसे बड़ा खतरा नजर आते हैं। वह चाहते हैं कि बुद्धिजीवी तबका राजनीति में आये। और माफियाओं को इस क्षेत्र से बेदखल करे। मंडल, कमंडल और कश्मीर की समस्याओं को वह राजनीति की देन मानते हैं। उनका कहना है कि राजनेताओं के बेटे राजनेता तो बन रहे हैं लेकिन क्वालिटी नदारद होती जा रही है। कुर्सी और पैसे की हवस हिन्दुस्तान को छोटे से छोटा करती जा रही है। वह कहते हैं कि अभी हाल में चर्च में जो घटनाएं घटीं वह हिन्दुओं को बदनाम करने के लिए अंजाम दी गयीं। नेताओं के स्वार्थ ने देश की मुख्य समस्याओं को बनाए और बचाए रखने में कोई कसर नहीं छोड़ी। पहले हिन्दू-मुसलमान लड़ाए, फिर हिन्दू- सरदार लड़ाए, फिर हिन्दू- इसाई लड़ाए। अब किसको लड़ाएं यह सोचने की जरूरत नहीं है। अब तो 33 फीसदी महिला आरक्षण के जरिये लिंग भेद की लड़ाई शुरू हो चुकी है। नीरज की नजर में लिंग भेद का संघर्ष सबसे खतरनाक संघर्ष होगा।</p>
<p>चेहरे पर हताशा की थकान लाकर नीरज बोलते जाते हैं। मैं बहुत हताश होता हूं जब मंच से थर्ड ग्रेड की कविता सराही जाती है और शानदार कविता श्रोताओं तक आते-आते मर जाती है। मैं तब भी हताश हुआ था जब अपनी चौधराहट कायम करने के लिए अमरीकी राष्ट्रपति ने बसरा पर मिसाइलें छोड़कर हजारों निर्दोषों को मरवा दिया था। गुजरात में जो हालात बने थे उसने भी मुझे हताश किया था लेकिन जब सोचता हूं कि लालची नेताओं के बनाये 33 प्रतिशत आरक्षण के पुल पर चढ़कर महिलाएं जब राजनीति में आएंगी, उनके मासूम बच्चे मां के प्यार को तरसेंगे, पति हीन भावना से ग्रस्त होंगे, संयुक्त परिवार टूटेंगे, स्त्री की हया और हिन्दू समाज के संस्कार टूटेंगे, राजनीति और बराबरी के चक्कर में महिलाएं जब पुरुष बन जाएंगी तो हिन्दुस्तान में होने वाली सबसे बड़ी टूटन को सोचकर मैं सबसे ज्यादा निराश होता हूं।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class=" wp-image-204357 aligncenter" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2021/01/Neeraj-2-252x300.jpg" alt="" width="551" height="656" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2021/01/Neeraj-2-252x300.jpg 252w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2021/01/Neeraj-2.jpg 480w" sizes="auto, (max-width: 551px) 100vw, 551px" /></p>
<p>आज के माहौल में नीरज को कोई संत नजर नहीं आता। वह संत उसे मानते हैं जिसके निकट बैठने भर से मनुष्य के अंदर रूपान्तरण की प्रक्रिया शुरू हो जाए। यह प्रक्रिया नीरज के जीवन में दो ही लोग पैदा कर सके, एक आचार्य रजनीश और दूसरी मदर टेरेसा। 1965 की एक घटना याद करते हुए नीरज जी बताते हैं कि मां ने मुझे एक लिफाफा भेजा जिसमें कोई संदेश नहीं सिर्फ एक गुलाब का फूल था। मैंने जैसे ही फूल हाथ में पकड़ा होंठ बोल उठे, &#8216;मां मत ऐसे टेर कि मेरा तन अकुलाए- मन अकुलाए।</p>
<p>प्रगति के मामले में हिन्दुस्तान के लगातार पिछड़ते जाने के लिए नीरज ईश्वर को दोषी ठहराते हैं। ईश्वर के सम्बन्ध में उनकी सोच इन पंक्तियों में स्पष्टï होती है:-&#8216;कहते जिसे खुदा वह दिमागों का खलल है, जैसे कि नदी हो के भी सहराओं में जल है। वह चाहते हैं कि जिस ईश्वर की पूजा होती है उसकी मृत्यु हो जाए। साथ ही विश्वास भी जताते हैं कि 21 वीं सदी में ईश्वर का जन्म कर्म में होगा। वैज्ञानिक आधार पर अपने कथन की पुष्टि करते हुए वह कहते हैं कि ईश्वर के मानने वाले यह स्वीकारते हैं कि पदार्थ ऊर्जा में और ऊर्जा पदार्थ में बदल सकती है। इसी प्रक्रिया से मनुष्य का शरीर नष्ट होता है तो आत्मा दूसरा शरीर पा जाती है। ऐसा विज्ञान रोज साबित करता है। वह हमें ऊर्जा के जरिये एक छोटे से कैसेट में बदलता है फिर उसे फैलाकर घर-घर में टेलीविजन के जरिये से पहुंचा देता है।</p>
<p>नीरज चाहते हैं कि मनुष्य अपने चौथाई दिमाग के प्रयोग से ऊपर उठे, अपने को जीते, ईश्वर को मंदिर में नहीं कर्म में तलाशे, शेष तीन चौथाई दिमाग क्रियाशील कर &#8216;सुपर माइंड डेवलप करे। दिमाग को बुद्ध और कृष्ण की तर्ज पर इस्तेमाल करे। तब वह दिन दूर नहीं जब न तो वह पांच-पांच दिन क्रिकेट की कमेन्ट्री सुनकर वक्त बर्बाद करेगा और न ही रात-रात भर कवि सम्मेलन के लिए जागेगा। नीरज का मानना है कि सरकार दो घंटे से ज्यादा चलने वाले कवि सम्मेलनों पर प्रतिबंध लगाए ताकि इस गरीब का देश का नागरिक कुछ समय अपने देश के विकास के चिन्तन के लिए बचा पाए।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class=" wp-image-204358 aligncenter" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2021/01/Neeraj-300x252.jpg" alt="" width="573" height="481" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2021/01/Neeraj-300x252.jpg 300w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2021/01/Neeraj.jpg 571w" sizes="auto, (max-width: 573px) 100vw, 573px" /></p>
<p>यह सोचकर नीरज बहुत दुखी होते हैं कि सवा अरब जनसंख्या वाले देश में एक भी अखबार ऐसा नहीं जिसका प्रसार 50 लाख से ज्यादा हो। उन्हें यह देखकर शर्म आती है कि एक अखबार पूरी ट्रेन पढ़ लेती है। वह चाहते हैं कि अखबार खरीदने वाले ऐसे लोगों को मुफ्त में अखबार न पढऩे दें जो सिगरेट पर सिगरेट फूंकते हैं लेकिन खबरें पढऩे लिए पैसा नहीं खर्च करते। धर्म, राजनीति, ज्ञान और कला सब कुछ पैसे पर आधारित हो जाने से भी नीरज बड़े निराश दिखते हैं। वह इस बात को हिन्दी साहित्य का दुर्भाग्य मानते हैं कि 73 साल से कविता के मंचों पर सक्रिय और लोकप्रिय नीरज के काव्य संग्रह ग्यारह सौ से बाइस सौ की संख्या से ज्यादा कभी प्रकाशित नहीं हुए। वह कहते हैं कि एक-एक मिनट जोड़ो तो शायद चालीस साल मैंने मंचों पर ही गंवा दिये। यह समय रीडिंग रूम में बीतता तो कितना साहित्य लिख जाता। वह इसे शर्म की बात मानते हैं कि देश का सबसे लोकप्रिय कवि मंचों पर जीविका तलाशता फिरता है। उनका कहना है कि लंदन के किसी कवि ने इतना लिखा होतो हैलीकाप्टर का मालिक होता।</p>
<p>आज की कविता को नीरज विषय भ्रमित मानते हैं। होली, दीवाली, दर्शन और रोमांस पर लिखी कविताएं वह वक्त की बर्बादी मानते हैं। अपने फिल्मी कैरियर से नीरज पूरी तरह से संतुष्ट हैं लेकिन आज जो फिल्मी गीत आ रहे हैं उन्हें वह गीत की श्रेणी में नहीं रखना चाहते। राजनीति में बुद्धिजीवियों के आने की जोरदार वकालत करने वाले नीरज सबसे अच्छे राजनीतिक दल के सवाल पर बोलते हैं कि किसे अच्छा कहें, सब एक से हैं। प्रीस्ट और पालिटीशियन देश की बर्बादी की जड़ हैं। राजनीति बड़ी घृणास्पद है। यह इस देश को बर्बाद करके छोड़ेगी।</p>
<p><span style="color: #993300;"><strong>यह भी पढ़ें : <a style="color: #993300;" href="https://www.jubileepost.in/atal-politics-continues-from-ekana-to-frontier-gandhi/">डंके की चोट पर : इकाना से सीमान्त गांधी तक जारी है अटल सियासत</a></strong></span></p>
<p><span style="color: #993300;"><strong>यह भी पढ़ें : <a style="color: #993300;" href="https://www.jubileepost.in/the-spirits-of-many-kings-breathe-in-this-king/">इस राजा में कई राजाओं की रूहें सांस लेती हैं</a></strong></span></p>
<p><span style="color: #993300;"><strong>यह भी पढ़ें : <a style="color: #993300;" href="https://www.jubileepost.in/the-last-mughal-emperors-teacher-is-sleeping-on-the-footpath-of-delhi/">डंके की चोट पर : दिल्ली के फुटपाथ पर सो रहा है आख़री मुग़ल बादशाह का टीचर</a></strong></span></p>
<p><span style="color: #993300;"><strong>यह भी पढ़ें : <a style="color: #993300;" href="https://www.jubileepost.in/love-refuses-to-obey-such-a-law/">डंके की चोट पर : मोहब्बत ऐसे क़ानून को मानने से इनकार करती है</a></strong></span></p>
<p>ईश्वर के अस्तित्व को नकारने वाले नीरज को अगले जन्म पर पूरा भरोसा है। भले ही वह उर्दू के शायर बनें लेकिन रहेंगे रचनाधर्मिता में ही। कहते हैं कि कोई भी चीज नष्ट नहीं होती है। अगले जन्म में वही चीज प्रारब्ध बनती है जो पिछले जन्म का संचय था। मेरी आज की लोकप्रियता 90 बरस की तपस्या नहीं पिछले जन्मों के संचय का योग है। सात सौ पांच जन्म के बाद सिद्धार्थ गौतम बुद्ध बन सके थे। हर व्यक्ति को अगले जन्म का प्रारब्ध अच्छा बनाने के लिए इस जन्म में अच्छे कर्मों का संचय जरूर करना चाहिए।</p>
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