Monday - 26 October 2020 - 11:50 AM

पार्टी में बदलाव कर ‘मायावती’ की जगह लेना चाह रहे हैं अखिलेश

हेमेंद्र त्रिपाठी 

लखनऊ के समाजवादी पार्टी मुख्यालय में अब सिर्फ डा.  लोहिया नहीं बल्कि उनके साथ बाबा साहब अंबेडकर भी अपनी जगह बना चुके हैं। पार्टी कार्यालय के आडिटोरिम में डा.  लोहिया के साथ साथ अंबेडकर की तस्वीर भी एक नए समीकरण का संकेत  बन रही है ।  उत्‍तर प्रदेश में साल 2022 में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है।

पार्टी में बड़ा परिवर्तन इस बात की तरफ इशारा है कि समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव  चाहते हैं कि बहुजन समाज पार्टी से असंतुष्ट या पार्टी से निकाले जाने वाले लोग इस बात को समझें कि बसपा के बाद उनका दूसरा ठिकाना कांग्रेस या बीजेपी नहीं, बल्कि समाजवादी पार्टी है।

दरअसल, बहुजन समाज पार्टी से 2019 के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने जो गठबंधन किया था, उसमें सीटों के बंटवारे में सपा एक कदम नीचे ही रही थी। यही नहीं, साल 2019 के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी को बहुजन समाज पार्टी की तुलना में भारी नुकसान उठाना पड़ा था।

तमाम राजनीतिक जानकारों ने समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं और आम लोगों ने भी माना कि समाजवादी पार्टी ने आत्मघाती कदम उठाते हुए बहुजन समाज पार्टी को आगे बढ़ने और फलने का खूब मौका दिया।

समाजवादी पार्टी की तुलना में बहुजन समाज पार्टी को दोगुना सीटें लोकसभा चुनाव में मिली। लेकिन, अखिलेश यादव यही सोच कर के उस वक्त सब्र कर लिया हो कि 2019 का लोकसभा चुनाव उनकी किस्मत में नहीं था। डॉ राम मनोहर लोहिया के साथ डॉ भीमराव अंबेडकर की फोटो के साथ समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव इस बात को बताने की कोशिश कर रहे हैं कि वह दलितों के नेता भी हो सकते हैं।

गठबंधन के नुकसान का आँकलन करने के साथ ही अखिलेश ने यह भी समझ लिया कि इस गठबंधन के दौरान जमीनी स्तर पर सपा और बसपा के कार्यकर्ताओं का जुड़ाव किया जाना नामुमकिन नहीं है ।

इसलिए अखिलेश लगातार इस बात को भी बताने की कोशिश कर रहे हैं कि दलित वर्ग से जुड़े चेहरों को मंच पर महत्व दी जाए। इसी दिशा में बढ़ते हुए पिछले दिनों में जिस तरह से समाजवादी पार्टी की कई सारे पदाधिकारियों का फेरबदल हुआ है तो उसमें भी सपा मुखिया ने दलित वर्ग से आने वाले लोगों को अच्छी खासी तरजीह दी।

ऐसा इसलिए भी कहा जा रहा है क्‍योंकि लोकसभा चुनाव में बना गठबंधन टूटने के बाद से बहुजन समाज पार्टी छोड़कर समाजवादी पार्टी में आने वालों का सिलसिला थम नहीं रहा है। एक के बाद एक कद्दावर बसपा नेता हाथी को छोड़ साइकिल पर सवारी करना पसंद कर रहे हैं। शनिवार को आधा दर्जन बसपा नेताओं को सपा में शामिल कराने के बाद सोमवार को पूर्व मंत्री राम प्रसाद चौधरी समर्थकों के साथ सपा की सदस्यता ग्रहण करेंगे।

बस्ती मंडल के असरदार नेता माने जाने वाले राम प्रसाद चौधरी के साथ पूर्व सांसद अरविंद चौधरी, पूर्व विधायक दूध राम, राजेंद्र चौधरी व नंदू चौधरी के अलावा छह जिला पंचायत सदस्य व पूर्व ब्लाक प्रमुख अखिलेश यादव के समक्ष समाजवादी पार्टी में शामिल होंगे। इससे पूर्व शनिवार को कभी मायावती के करीबी रहे सीएल वर्मा व पूर्व मंत्री रघुनाथ प्रसाद शंखवार भी समाजवादी हो गए थे।

समाजवादी पार्टी में शामिल होने के लिए मची भगदड़ के सवाल पर बसपा के एक पूर्व मंत्री का कहना है कि समाजवादी पार्टी में शामिल होने वाले अधिकतर वे नेता हैं, जिनको संगठन विरोधी कार्यों के आरोप में बसपा से निष्कासित किया जा चुका है। उधर, समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता व पूर्व मंत्री राजेंद्र चौधरी ने कहा कि आम जनता में सपा की नीतियों के प्रति भरोसा बढ़ा है। इसलिए बसपा ही नहीं अन्य दलों के कार्यकर्ताओं की पहली पसंद समाजवादी पार्टी ही है।

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