Thursday - 22 October 2020 - 11:32 PM

प्रतापगढ़ : DM के खिलाफ धरना देने वाले SDM को पहले मिला आश्वासन और फिर…

जुबिली न्‍यूज डेस्‍क

उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ में शुक्रवार को जिलाधिकारी बंगले पर उस वक्त हडकम्प मच गया जब जिलाधिकारी के साथ ही दो एसडीएम पर गंभीर आरोप लगाकर एक अतिरिक्त एसडीएम अपनी पत्नी के साथ धरने पर बैठ गए.

हालांकि अतिरिक्त एसडीएम विनीत कुमार उपाध्याय का धरना करीब चार घंटा बाद समाप्त हो गया। उनको डीएम से पट्टा आवंटन में घपले पर कार्रवाई का आश्वासन भी मिला। लेकिन शाम को शासन ने पीसीएस अफसर उप जिलाधिकारी विनीत कुमार उपाध्याय के खिलाफ अनुशासनिका कार्रवाई करते हुए निलंबित कर दिया।

बता दें कि उत्तर प्रदेश में शीर्ष प्रशासनिक व पुलिस अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के आरोपों की बाढ़ सी आ गई है।

प्रतापगढ़ में जिलाधिकारी डॉ. रुपेश कुमार कलेक्ट्रेट परिसर के निकट अपने सरकारी बंगले में रहते हैं। शुक्रवार को दिन में करीब उनके आवास में एक बजे अतिरिक्त एसडीएम विनीत उपाध्याय अपनी पत्नी के साथ धरने पर बैठ गए।

उनका आरोप है कि उनके खिलाफ एक जांच में एडीएम (एफआर) ने गलत रिपोर्ट लगा दी। इससे नाराज अतिरिक्त एसडीएम विनीत उपाध्याय ने डीएम डॉ. रुपेश कुमार और दो एसडीएम सहित कई कर्मचारियों पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है।

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इसके बाद से वह डीएम आवास के अंदर धरने पर बैठे हैं और बाहर पुलिस का पहरा है। वहां पर सिर्फ मीडिया के प्रवेश पर रोक लगी है। पुलिस व प्रशासनिक अफसरों को प्रवेश मिल रहा है। पीसीएस अधिकारी विनीत उपाध्याय ने डीएम डॉ.रुपेश कुमार पर फाइलें दबाने का गंभीर आरोप लगाया है। विनीत उपाध्याय का आरोप है कि एसडीएम सदर, एडीएम वित्त तथा डीएम डॉ. रुपेश कुमार ने मिलकर भ्रष्टाचार किया है। अब मेरे आरोप लगाने के बाद भी डीएम भ्रष्टाचार की जांच नहीं करवा रहे हैं।

एसडीएम को मनाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं पर विनीत उपाध्याय आरोपी अफसरों पर कार्यवाई की मांग पर अड़े हैं। एसडीएम के धरने से डीएम आवास पर हड़कंप मच गया है। सीओ समेत भारी पुलिस बल मौके पर मौजूद है। वहीं, डीएम बंगले में मीडिया के प्रवेश पर रोक लगा दी गई है।

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लालगंज इलाके के ददुआ गाजान में फर्जी तरीके से जमीन खरीदकर उस पर मान्यता ली गई है। इसका संचालन ददुआ गाजान की बजाय लालगंज से किया जा रहा है। इसी की जांच करके जब उन्‍होंने रिपोर्ट तैयार की तो स्थानीय नेताओं और प्रशासनिक अधिकारियों का उन पर दबाव शुरू हो गया। इस जमीन को सदर एसडीएम मोहनलाल गुप्ता ने अवैध तरीके से पट्टा कराया था जिसकी रिपोर्ट डीएम के माध्यम से शासन को जाना था, लेकिन डीएम ने इस रिपोर्ट को नहीं भेजा।

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