और इस तरह जिन्दा हो गयी बुंदेलखंड की बरुआ नदी

उत्कर्ष सिन्हा

पानी की समस्या से जूझते बुंदेलखंड को जल सहेलियों के रूप में एक नया मसीहा मिल गया है. बुंदेलखंड की जल सहेलियों  ने अपने गाँव में पहले भी जल संरक्षण के कई बेहतरीन काम किये हैं मगर ललितपुर जिले के बरुआ नदी को लम्बे समय की चरणबद्ध कोशिश के बाद पुनर्जीवित कर देना किसी चमत्कार से कम नहीं है.

बीते 3 जून को जब झाँसी मंडल के मंडलायुक्त अजय शंकर ने बरुआ नदी की आरती की तब ये नदी पानी के प्रवाह से भरी हुयी थी. नदी में पानी देख कर ये सोचना भी मुश्किल था कि महज कुछ समय पहले इस नदी का अस्तित्व ही मिट चूका था और इसका प्रवाह क्षेत्र बिलकुल सूखा हो चुका था .

बरुआ नदी को पुनर्जीवित करने का बीड़ा बुंदेलखंड के भागीरथ कहे जाने वाले संजय सिंह ने कुछ वर्षो पहले उठाया था. दुनिया भर में पहचान बना चुका परमार्थ समाजसेवी संगठन बुंदेलखंड के सूखे इलाकों में पानी लाने की मुहीम में बीते 25 वर्षो से जुटा हुआ है.

13 किमी लम्बी बरुआ नदी करेंगा नदी से निकलकर जामिनी नदी में मिलती है.  नदी पर हो रहे अवैध खनन के कारण यह नदी अपने अस्तित्व को जिन्दा नहीं रख पा रही है लेकिन परमार्थ के अथक प्रयासों के द्वारा इस संकल्प में स्थानीय प्रशासन भी सहयोगी बना और फिर सबके साझा प्रयासों ने इसको पुनर्जीवन प्रदान किया .

13 किमी लम्बी बरुआ नदी के पुनर्जीवन के लिए स्थानीय प्रशासन ने परमार्थ के साथ मिलकर 2020 से मनरेगा के द्वारा कार्य करवाया और इसके लिए 27.75 लाख का आकलन तैयार किया गया है.

2 साल की कोशिशों के बाद 800 मीटर लम्बी एवं 1.5 मीटर गहरी नदी में अंततः पानी आना प्रारंभ हो गया नदी के आस पास लगभग 1500 वृक्षारोपण का का कार्य करवाया गया है .

जल सहेली इमरती ने बताया कि पहले उसके गाँव में कीचड युक्त पानी आता था फिर उसने गाँव की अन्य महिलाओं के सहयोग से गाँव में ही कुआं खोद डाला जिससे आज उस गाँव में 12 महीने पानी उपलब्ध होने लगा है .साथ ही उन्होंने गाँव में 2 चैकडैम का भी निर्माण करवाया है |

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3 जून को एविनी गाँव में बरुआ नदी के किनारे पर्यावरण सम्मलेन एवं बरुआ नदी पुनर्जीवन समारोह का आयोजन किया गया, जिसमे मुख्य अतिथि के रूप में मंडलायुक्त झाँसी मंडल अजय शंकर पाण्डेय जी उपस्थित रहे . कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन के साथ बुन्देली लोक सांस्कृतिक कार्यक्रम के साथ हुई . इसके बाद बरुआ नदी का उद्घाटन नदी आरती के साथ किया गया .

संजय सिंह ने कहा कि मंडलायुक्त के तत्वाधान में बुंदेलखंड जल संरक्षण समिति का गठन किया गया है , और उनके अथक प्रयासों से बुंदेलखंड में नदियों के पुनर्जीवन एवं जल संरचनाओं का निर्माण हुआ है |

नगर पंचायत अध्यक्ष तालबेहट श्री मती मुक्ता सोनी ने बताया कि जल को बचने के लिए जोइतनी मदद प्रशाशन करता है उससे ज्यादा आम आदमी का कर्तव्य है कि वह जल को संरक्षित करके अपने कर्तव्यों का निर्वहन करमन | हमें हर वह संभव कार्य करने हिंगे जिससे जल को संरक्षित किया जा सके |

नदी के पुर्नजीवन कार्यक्रम में अजय शंकर पाण्डेय ने जल के महत्व के बारे में बताते हुए कहा कि जल बुंदेलखंड ही नहीं बल्कि पूरे विश्व की चिंता का विषय है, बुंदेलखंड जितन जल की समस्या से गुजरा है उतना देश  में कोई नही, हम यहाँ के लिए योजनाओं पर वैज्ञानिक रूप से आगे बढ़ रहे हैं .जल संरक्षण से जुड़े सभी विभाग जल को बचने के लिए लगातार प्रयासरत हैं |

अजय शंकर ने कहा कि अब बरुआ नाले को नदी का रूप दिया जाए यह नाला नहीं बल्कि नदी है , साथ ही मुख्य विकास अधिकारी ललितपुर को  निर्देश दिया की जितनी ग्राम पंचायतों में यह नदी गुजरती है उन सभी गांवों में नदी जल संरक्षण समिति का गठन किया जाएँ एवं जिस ग्राम पंचायत में इस नदी के पानी को अविरल किया जायेगा उसे आर्थिक दंड देना होगा एवं जिस गाँव में इसे बचाया जायेगा उस गाँव को सम्मानित किया जायेगा .

खनन के बारे में बात करते हुए कहा कि अगर इस नदी पर खनन की घटना होती है तो वह पुलिस प्रशासन पर व्यक्तिगत कार्यवाही करेंगे.

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