Sunday - 29 January 2023 - 8:48 PM

रेपो रेट घटने के बाद किन चीजों पर पड़ेगा फर्क

न्यूज डेस्क

देश में एक बार फिर से मोदी सरकार बनने के बाद रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया ने आज पहली मौद्रिक समीक्षा बैठक की। इस बैठक में आरबीआई ने एक बार फिर से रेपो रेट को कम करके लोगों को बड़ा तोहफा दिया है। आरबीआई ने रेपो रेट में 0.25 प्रतिशत की कटौती की है। आपको बता दें कि अब रेपो रेट की दर 6% से घटकर 5.75% हो गयी है।

आरबीआई ने लगातार तीसरी बार अपने रेपो रेट की दर में कमी की है। इससे पहले पिछली दो बैठकों में भी उसने 0.25% की कटौती कर चुका है। ऐसा इतिहास में पहली बार हुआ है जब आरबीआई के गवर्नर की नियुक्ति के बाद लगातार तीसरी बार रेपो रेट में कमी की गयी है। आपको बता दें कि उर्जित पटेल के इस्तीफे के बाद शक्तिकांत दास को गवर्नर नियुक्त किया गया था।

ब्याज दर होगी कम

आरबीआई के इस फैसले के बाद बैंकों को अपनी ब्‍याज दर कम करनी पड़ेगी। इससे उन लोगों को फायदा मिलेगा जिनकी होम या ऑटो लोन की ईएमआई चल रही है। इसके अलावा बैंक से नए लोन लेने की स्थिति में भी पहले के मुकाबले ज्‍यादा राहत मिलेगी।

जीडीपी का अनुमान घटाया

इसके साथ ही रिजर्व बैंक ने जीडीपी के अनुमान को कम कर दिया है। इसके मुताबिक जीडीपी ग्रोथ रेट 7 फीसदी रहने का अनुमान है। पहले यह दर 7.2 फीसदी रहने का अनुमान लगाया था। वहीं केंद्रीय बैंक ने 2019-20 की पहली छमाही में महंगाई दर 3 से 3.1 फीसदी तक रहने का अनुमान जताया है। वहीं साल की दूसरी छमाही में यह आंकड़ा 3.4%-3.7% तक रह सकता है।

क्या होती है जीडीपी दर

सकल घरेलू उत्पाद (GDP) या जीडीपी या सकल घरेलू आय (GDI), एक अर्थव्यवस्था के आर्थिक प्रदर्शन का एक बुनियादी माप है। यह एक वर्ष में एक राष्ट्र की सीमा के भीतर सभी अंतिम माल और सेवाओ का बाजार मूल्य होता है।

नहीं देना होगा एक्‍स्‍ट्रा चार्ज

आरबीआई की इस बैठक में ऑनलाइन ट्रांजेक्‍शन करने वालों की लिए भी एक अच्छी खबर है। रिज़र्व बैंक ने RTGS और NEFT लेनदेन पर लगाए गए शुल्क को हटा दिया है। इसका मतलब है कि अब RTGS और NEFT के जरिए ट्रांजेक्‍शन करने वालों को किसी भी तरह का एक्‍स्‍ट्रा चार्ज नहीं देना होगा।

क्‍या है RTGS और NEFT

रियल टाइम ग्रॉस सेटलमेंट (RTGS) सिस्टम के तहत मनी ट्रांसफर का काम तुरंत होता है। आरटीजीएस का उपयोग मुख्यत: बड़ी राशि को ट्रांसफर करने के लिए होता है। इसके तहत न्यूनतम दो लाख रुपये भेजे जा सकते हैं और अधिकतम राशि भेजने की कोई सीमा नहीं है। अलग-अलग बैंकों का आरटीजीएस चार्ज अमाउंट के हिसाब से अलग-अलग होता है। वहीं, नेशनल इलेक्ट्रॉनिक फंड ट्रांसफर (NEFT) में ट्रांसफर के लिए न्यूनतम और अधिकतम पैसे की सीमा नहीं है। यह चार्ज भी अमाउंट के हिसाब से बढ़ता जाता है।

क्या होता है रेपो रेट

रेपो दर से संबंध उस दर से है जिस पर वाणिज्यिक बैंक धन की कमी के मामले में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) से धन लेते हैं। यह मुद्रास्फीति को नियंत्रण में रखने के लिए आरबीआई के मुख्य उपकरणों में से एक है। वर्तमान में भारतीय रिजर्व बैंक ने रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट की कटौती कर इसे 6 फीसदी से घटाकर 5.75 फीसदी कर दिया गया है।

ATM ट्रांजेक्‍शन चार्ज पर भी जल्‍द फैसला संभव

आरबीआई की ओर से एटीएम ट्रांजेक्‍शन चार्ज को लेकर भी बड़े फैसले लेने के संकेत दिए गए हैं। केंद्रीय बैंक ने बैठक में एक समिति का गठन करने का निर्णय लिया है। इस समिति के जरिए ATM शुल्क से जुड़े मामलों की समीक्षा की जाएगी। यह समिति अपनी पहली बैठक के दो महीने के भीतर अपनी सिफारिशें आरबीआई को बताएगी।

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