Friday - 27 November 2020 - 2:52 PM

लक्ष्मी विलास के बाद RBI ने लगाई एक और बैंक पर भी पाबंदी

जुबिली न्‍यूज डेस्‍क 

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने लक्ष्मी विलास के बाद एक और बैंक पर पाबंदी लगा दी है। आरबीआई ने महाराष्ट्र के जालना जिले में मंता अर्बन कोऑपरेटिव बैंक पर पैसों के भुगतान और कर्ज के लेनदेन को लेकर छह माह के लिए पाबंदी लगा दी है। आरबीआई के मुताबिक उसने इस बैंक को कुछ निर्देश दिए हैं, जो 17 नवंबर 2020 को बैंक बंद होने के बाद से छह माह तक प्रभावी होंगे।

इन निर्देशों के अनुसार, यह बैंक आरबीआई की अनुमति के बिना कोई कर्ज या उधार नहीं दे सकेगा और न ही पुराने कर्जों का नवीनीकरण या कोई निवेश कर सकेगा। बैंक पर नई जमा राशि स्वीकार करने पर भी पाबंदी लगा दी गई है। वह कोई भुगतान भी नहीं कर सकेगा और ना ही भुगतान करने का कोई समझौता कर सकेगा। हालांकि, आरबीआई ने पाबंदी का आधार नहीं बताया है।

लक्ष्मी विलास बैंक संकट क्या है?

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आपको बता दें कि पिछले साल सितंबर में रिजर्व बैंक को पंजाब एंड महाराष्ट्र को-ऑपरेटिव बैंक (पीएमसी) में हो रहे कथित घोटाले का पता चला था। इस घोटाले के सामने आते ही आरबीआई ने बैंक पर पाबंदी लगा दी थी। बैंक को संकट से बचाने के लिए आरबीआई ने 24 सितंबर 2019 को पैसे निकालने पर एक सीमा या मोरेटोरियम लगा दी थी।

इससे पहले वित्तीय संकट से गुजर रहे निजी क्षेत्र के लक्ष्मी विलास बैंक पर एक महीने तक के लिए पाबंदियां लगा दी गई हैं। इस पाबंदी में बैंक का कोई खाताधारक ज्यादा से ज्यादा 25,000 रुपये तक की निकासी कर सकेगा।

बैंक की खस्ता वित्तीय हालत को देखते हुए यह कदम उठाया गया है। भारतीय रिजर्व बैंक ने एक बयान में कहा कि बैंक की ओर से विश्वसनीय पुनरोद्धार योजना नहीं पेश करने की स्थिति में जमाधारकों के हित में यह फैसला किया गया है। साथ ही बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र की स्थिरिता के हितों का भी ख्याल रखा गया है।

आरबीआई ने एक अन्य विज्ञप्ति में कहा कि बेंगलुरु स्थित Shushruati Souharda Sahakara Bank Niyamita पर नियामकीय अनुपालन नहीं करने को लेकर 20 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। भारतीय रिजर्व बैंक ने मंगलवार को यह जानकारी दी।

इसके अलावा केंद्रीय बैंक ने Deccan Urban Co-operative Bank, Vijayapura, Karnataka पर भी एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। आरबीआई ने कहा है कि 17 नवंबर, 2020 को कामकाज बंद होने से छह माह के लिए ये निर्देश प्रभावी होंगे और इसकी समीक्षा की जाएगी।

हालांकि, आरबीआई ने साथ ही स्पष्ट किया है कि इस निर्देश को आरबीआई द्वारा सहकारी बैंक का लाइसेंस रद्द किए जाने के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।

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