Thursday - 22 October 2020 - 10:18 PM

नए बैंकिंग कानून का ग्राहकों पर क्या पड़ेगा असर

जुबिली न्यूज़ डेस्क

लोकसभा के बाद राज्यसभा से भी बैंकिंग रेगुलेशन बिल को मंजूरी मिल गई है। इस नए कानून के तहत देश के सहकारी बैंक आरबीआई के सुपरविजन में काम करेंगे। इस नए कानून के पास होने के बाद केंद्र सरकार का कहना है कि इस कानून के तहत सहकारी बैंको को रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया के दायरे में लाया जाएगा।

इस बिल के पास के होने के बाद बैंक में लोगों के जमा पैसों की सुरक्षा की जा सकेगी। सहकारी बैंको की लगातार बिगडती वित्तीय सेहत और गड़बड़ी के मामलें सामने आने के बाद केंद्र सरकार बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट, 1949 में संशोधन करने का फैसला लिया था।

बता दें कि बीते जून में केंद्र सरकार ने सहकारी बैंकों को रिजर्व बैंक के तहत लाने के लिए एक अध्यादेश जारी किया था। अब इस अध्यादेश की जगह नया कानून लेगा। अभी तक देश में 1,482 अर्बन और 58 मल्टीस्टेट कॉपरेटिव बैंक हैं जोकि अब आरबीआई के तहत आएंगे। अब आरबीआई इन बैंकों के पुनर्गठन या विलय का भी फैसला ले सकते हैं।

इन सहकारी बैंकों के पुनर्गठन के लिए आरबीआई को बैंकिंग ट्रांजेक्शंस को मोरेटोरियम में रखने की जरूरत भी नहीं होगी। इसके अलावा आरबीआई यदि बैंक पर मोरेटोरियम लागू करते हैं तो फिर कॉपरेटिव बैंक कोई लोन जारी नहीं कर सकते और न ही जमा पूंजी का कोई निवेश कर सकते हैं।

आरबीआई के हाथों में कमान

जमाकर्ताओं के हितों की रक्षा के लिए आरबीआई बैंक किसी भी मल्टीस्टेट कॉपरेटिव बैंक के निदेशक बोर्ड को भंग कर सकता है और उसकी कमान अपने हाथ में ले सकता है। यही नहीं आरबीआई चाहे तो इन बैंकों को इस नियम से अलग कुछ छूट भी नोटिफिकेशन जारी करके दे सकता है, जोकि नौकरियों, बोर्ड निदेशकों की योग्यता के नियम और चेयरमैन की नियुक्ति जैसे मामलों में दी जा सकती है।

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बैंकिंग रेग्‍युलेशन एक्‍ट, 1949 में संशोधन का फैसला ग्राहकों के हित में है। इसके अनुसार अगर कोई भी बैंक डिफॉल्ट करता है तो बैंक में जमा 5 लाख रुपये तक की राशि पूरी तरह से सुरक्षित है। इस बार के बजट में वित्त मंत्री ने ये राशि बढ़ाकर 5 लाख रुपये कर दी थी।

जमा राशि पर 5 लाख रुपये तक का बीमा

डीआईसीजीसी एक्ट, 1961 की धारा 16 (1) के प्रावधानों के तहत, यदि कोई बैंक दिवालिया या डूब जाता है तो, कॉरपोरेशन हर जमाकर्ता को भुगतान करने के लिए जिम्‍मेदार होता है। उसकी जमा राशि पर 5 लाख रुपये तक का बीमा होता है। और अगर आपका एक ही बैंक की कई ब्रांच में खाता है तो सभी खातों में जमा पैसे और ब्‍याज को जोड़ा जाएगा।

इसके बाद केवल 5 लाख तक जमा को ही सुरक्षित माना जाएगा। अगर आपके किसी बैंक में एक से अधिक अकाउंट और एफडी हैं तो भी बैंक के डिफॉल्ट होने या डूबने के बाद 5 लाख रुपये ही मिलने की ही गारंटी है।

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