मंत्रियों की संपत्ति खुलासे से उठा नेपाल में तूफ़ान: सवालों में घिरी बालेन सरकार

रेनू श्रीवास्तव
काठमांडू. नेपाल की गिनती फ़िलहाल दक्षिण एशिया के सबसे भ्रष्ट देशों में हो रही है। ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल के Corruption Perceptions Index 2025 में नेपाल का स्कोर मात्र 34 रहा, जो 182 देशों में 109वें स्थान पर है। भाई-भतीजावाद, सरकारी ठेकों में रिश्वतखोरी, दलीय नियुक्तियां और निजी फायदे के लिए सार्वजनिक पदों का दुरुपयोग – ये आरोप पिछले दशकों से लगातार लगते आए हैं। जनता में भ्रष्टाचार के खिलाफ गहरा आक्रोश पनपा हुआ है।
इसी आक्रोश को भुनाते हुए रैपर से राजनेता बने प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह (बालेन शाह) की नई सरकार ने सत्ता संभालते ही भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ा कदम उठाया। सरकार ने 2006 (जनआंदोलन के बाद) से अब तक सार्वजनिक पदों पर रहे शीर्ष नेताओं, पूर्व प्रधानमंत्रियों, राष्ट्रपतियों और उच्च अधिकारियों की संपत्ति की जांच के लिए एक पांच सदस्यीय आयोग का गठन किया। इस आयोग की अध्यक्षता पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज राजेंद्र कुमार भंडारी करेंगे। जांच 2005-06 से 2025-26 तक के सभी पदधारियों तक फैली हुई है – इसमें सात पूर्व प्रधानमंत्री, तीन पूर्व राष्ट्रपति और सैकड़ों अधिकारी शामिल हैं।
सरकार का दावा है कि यह कदम पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करेगा। लेकिन इसी बीच जब सरकार ने अपने मंत्रियों की संपत्ति का विवरण सार्वजनिक किया, तो पूरे नेपाल में तूफान आ गया। सोशल मीडिया पर मीम्स, तंज और सवालों की बाढ़ आ गई। जो सरकार भ्रष्टाचार विरोध की मुखर वकालत कर रही थी, उसी के मंत्रियों की संपत्ति देखकर जनता चौंक गई।
मंत्रियों की संपत्ति: आंकड़े जो सवाल खड़े करते हैं
प्रधानमंत्री बालेन शाह ने घोषणा की कि उनके बैंक खाते में लगभग 14.6 मिलियन नेपाली रुपये (करीब 1.46 करोड़ भारतीय रुपये) हैं। उन्होंने अपनी मुख्य आय का स्रोत सोशल मीडिया बताया – फेसबुक पर 40 लाख फॉलोअर्स, यूट्यूब पर 12 लाख और एक्स पर 5 लाख। खुद के नाम पर कोई जमीन या मकान नहीं, लेकिन मां के नाम पर काठमांडू में 5 आना जमीन, धनुषा में 1.2 बिघा जमीन और मकान, तथा स्वर्गीय पिता के नाम पर महोत्तरी में 9 बिघा जमीन है। पत्नी सबिना काफ्ले के नाम पर 190 तोला सोना-चांदी और हीरे के आभूषण हैं, जो पैतृक संपत्ति बताए गए हैं।
वित्त मंत्री स्वर्णिम वाग्ले ने बैंक जमा करीब 90 लाख रुपये, शेयर निवेश करीब 19 मिलियन रुपये (कुछ रिपोर्ट्स में ज्यादा) और कुल संपत्ति 12 करोड़ रुपये से ऊपर बताई। उनके पास ललितपुर (भैंसेपाटी) में 5 करोड़ का मकान, सानेपा में 2 करोड़ का अपार्टमेंट, काव्रे में 3.75 करोड़ का अपार्टमेंट और तनहुं में 2 करोड़ की जमीन है। हाइड्रोपावर और बैंक शेयरों में बड़ा निवेश।
गृह मंत्री सुदन गुरुंग ने 43.1 मिलियन रुपये के शेयर निवेश, 89 तोला सोना, 6 किलो चांदी, बैंक बैलेंस और धनकुटा, चितवन, गोरखा में जमीन घोषित की। एक वाहन भी उनके नाम पर है।
ये आंकड़े देखकर जनता के मन में सवाल उठ खड़ा हुआ – “युवा नेता, इतना सोना और संपत्ति कैसे?” ये नेता “आम युवा” या “साधारण पृष्ठभूमि” से आने वाले बताए जाते थे। फिर 20-30 साल में इतनी बड़ी संपत्ति सिर्फ सोशल मीडिया, प्रोफेशनल इनकम या पैतृक संपत्ति से कैसे जुट गई?
सोशल मीडिया पर बवाल: मीम्स और तीखे सवाल
फेसबुक, इंस्टाग्राम, एक्स और टिकटॉक पर मंत्रियों की संपत्ति सूची की तस्वीरें वायरल हो गईं। मीम्स बन गए, शोशल मीडिया पर नेपाली जनता ने ऐसी प्रतिक्रिया देनी शुरू कर दी ;
- “कहते थे ‘हम आम युवा हैं’, अब 10-20 करोड़ के इन्वेस्टर नजर आ रहे हैं। यह सोशल मीडिया सेल्फी नहीं, भ्रष्टाचार कैलकुलेशन है!”
- “अगर इतने अमीर हो तो सरकारी पद पर क्यों? स्वतंत्र उद्यमी बनकर रहते तो बेहतर। जनता की निधि से निजी हित टकराने का खतरा तो रहेगा ही।”
- “जनता महंगाई और गरीबी से जूझ रही है, लेकिन इन नेताओं की संपत्ति पिछले दो दशकों में कई गुना बढ़ गई। पैसे का प्रवाह कहां से आया?”
वामपंथी छात्र संगठनों ने इसके खिलाफ काठमांडू में कई प्रदर्शन किए हैं । उन्होंने मांग की कि सिर्फ संपत्ति की सूची काफी नहीं – स्रोत की निष्पक्ष जांच, टैक्स रिटर्न और विस्तृत ब्योरा सार्वजनिक होना चाहिए। पूर्व मेयर हरका साम्पाङ ने भी कहा कि संपत्ति दिखाना पर्याप्त नहीं, उसका स्रोत स्पष्ट होना चाहिए, वरना शक स्वाभाविक है।
सरकार की दलील और चुनौती
सरकार का कहना है कि यह संपत्ति खुलासा पारदर्शिता का हिस्सा है। मंत्रियों ने 60 दिनों के अंदर विवरण जमा कर कानूनी प्रावधान का पालन किया। लेकिन विपक्ष और जनता कह रही है – जो नियम दूसरों पर लागू कर रहे हो, वही खुद पर भी सख्ती से लागू होना चाहिए।
अब बालेन शाह सरकार के सामने दोहरी चुनौती है, पहली पुराने नेताओं और अधिकारियों की संपत्ति की निष्पक्ष जांच कराना। और दूसरी खुद अपनी कैबिनेट की संपत्ति पर उठे सवालों का जवाब देना, ताकि “भ्रष्टाचार विरोधी छवि” स्टेज परफॉर्मेंस न लगे।
कई विश्लेषक कह रहे हैं कि अगर यह जांच निष्पक्ष हुई तो नेपाल में राजनीतिक संस्कृति बदल सकती है। लेकिन अगर यह राजनीतिक हथियार बन गया तो आक्रोश और बढ़ेगा। युवा आबादी, जो बालेन को “परिवर्तन का चेहरा” मानकर लाई थी, अब खुद उनसे जवाब मांग रही है।
नेपाल की राजनीति में यह एक अनोखा मोड़ है। एक तरफ भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त आयोग, दूसरी तरफ मंत्रियों की संपत्ति पर जनता का तीखा सवाल। क्या यह पारदर्शिता की नई शुरुआत होगी या सिर्फ एक और विवाद? समय बताएगा, लेकिन फिलहाल सोशल मीडिया पर “युवा नेता, इतना सोना कैसे?” वाला सवाल जोर-शोर से गूंज रहा है।
जनता अब इंतजार कर रही है – जांच आयोग न सिर्फ पुराने नेताओं, बल्कि वर्तमान सरकार पर भी समान नजर रखे। सच्ची पारदर्शिता तभी साबित होगी, जब नियम सबके लिए एक समान हों।



