वोट के लिए धमकी देने वाली अकेली नेता नहीं है मेनका

स्पेशल डेस्क

चुनाव का पहला चरण कल ही समाप्त हुआ है। अगले चरण के लिए नेताओं ने अपनी पूरी ताकत झोंकनी दी है। लोकसभा चुनाव को लेकर यूपी में जुब़ानी जंग तेज होती दिख रही है। आलम तो यह है कि नेताओं की जुब़ान उनके काबू में नजर नहीं आ रही है। वोट की खातिर बेकाबू होती नेताओं की जुबान असल मुद्दों से भटकती दिख रही है। वोट की खातिर इस चुनाव में अली और बजरंग बली की इंट्री पहले ही हो चुकी है तो दूसरी ओर मुसलमानों का वोट किसको मिले इसको लेकर उठापटक राजनीतिक दलों में देखने को मिल रही है। बसपा सुप्रीमो मायावजी के बाद सुल्तानपुर लोकसभा सीट के लिए मेनका गांधी ने चुनावी मर्यादाओं को भूलते हुए खुलेआम मुसलमानों को वोट के लिए धमकाया है।


उधर इस पूरे मामले में सुल्तानपुर के डीएम दिव्य प्रकाश गिरी ने सफाई देते हुए कहा है कि मामले की जांच की जा रही है और पूरी रिपोर्ट चुनाव आयोग को जल्द भेजी जायेगी। शुक्रवार का दिन सियासी घमासान और तेज होता दिखा जब आजम खान ने योगी के उस बयान पर तीखा हमला बोला है जिसमें सूबे के मुखिया ने अली और बजरंग बली को लेकर बयान दिया था। इसके बाद शुक्रवार को मेनका गांधी ने अपने बयान से एक बार फिर यूपी की सियासत में एकाएक नया मुद्दा दे दिया है।

मेनका ने खुलेआम मुसलमानों को धमकाया

सुलतानपुर से कभी मेनका गांधी के पुत्र वरूण गांधी चुनाव लड़ते थे लेकिन इस बार मां-बेटे की सीट अदला-बदली की गई है। ऐसे में मेनका सुलतानपुर का किंग बनने के लिए अपना पूरा जोर लगा रही है। उन्होंने एक जनसभा में मुसलमानों को लेकर यहां कहा कि मैं तो चुनाव जीत रहीं हूं, ऐसे में आप हमारा साथ दीजिए वरना कल जब आप काम के लिए हमारे पास आओगे तो समझ लीजिए मैं क्या करूंगी। मैं कोई महात्मा गांधी की छठी औलाद नहीं हूं। इतना ही नहीं मेनका यही नहीं रूकी और कहा कि मेरे फॉउंडेशन ने आपके लिए 1000 करोड़ रुपए खर्च किए हैं, लेकिन जब चुनाव आता है तो आप कहते हैं कि हम बीजेपी को वोट नहीं करेंगे।

मैं तो इलेक्शन पार कर (जीत) चुकी हूं। ये जीत आपके बिना भी होगी तो खट्टी होगी। ऐसे में जब रिजल्ट आएगा और आपके बूथ से 50 वोट या 100 वोट आएगा। ऐसे में आप मेरे पास काम के लिए आओगे तो समझ लीजिए। मेनका यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और इसको लेकर कांग्रेस ने उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

चुनाव में हनुमान और अली की इंट्री से भी चढ़ा सियासी पारा

कुछ माह पूर्व पांच राज्यों में विधानसभा के चुनाव के दौरान हनुमान जी का आगमन हुआ था। उस चुनाव में नेताओं ने बजरंग बली की जाति पर बड़ा रिसर्च किया था। अब जब देश में लोकसभा चुनाव हो रहा है तो एक बार फिर बजरंग बली सियासत में आ गए हैं। बजरंग बली के नाम पर सियासत जारी है। इस लोकसभा चुनाव में बजरंग बली की एंट्री भी रोचक है। बसपा सुप्रीमो मायावती ने मेरठ में जनसभा को संबोधित करते हुए मुसलमानों से अपील की कि बीजेपी को वोट न देकर सपा-बसपा गठबंधन को दें। फिर क्या, जब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 9 अप्रैल को मेरठ में एक जनसभा को संबोधित करने पहुंचे तो गठबंधन पर निशाना साधते हुए कहा कि उनके पास अली है तो हमारे पास बजरंग बली। इस मामले में योगी आदित्यनाथ और मायावती को चुनाव आयोग की नोटिस भी मिल चुकी है।

योगी के बयान पर आजम ने किया पलटवार

बजरंग बली पर सियासत यहीं नहीं रूकी। इसे आगे बढ़ाया सपा नेता व रामपुर के उम्मीदार आजम खां ने। उन्होंने तो बजरंग बली और अली पर एक नारा ही दे दिया। रामपुर में 11 अप्रैल को एक जनसभा को संबोधित करते हुए सपा उम्मीदवार ने कहा कि, ‘मेरा तो दिल कमजोर नहीं हुआ योगी जी। आपने कहा था कि हनुमान जी दलित थे। फिर किसी ने कहा हनुमान जी ठाकुर थे। फिर पता चला कि वे ठाकुर नहीं थे, वे जाट थे। फिर किसी ने कहा कि वे हिंदुस्तान के थे ही नहीं, वे तो श्रीलंका के थे।

Related Articles

Back to top button