Sunday - 20 October 2019 - 6:23 AM

भर्ती बोर्ड के बेतुके फरमान से अधर में अटका पुलिस अभियार्थियों का भविष्य

न्यूज़ डेस्क

पिछली सरकार में 2013 में निकली सिपाही भर्ती की प्रक्रिया अभी भी जारी है। इससे साफ़ पता चल रहा है कि सरकार युवाओं के भविष्य के लिए कितनी ठोस कदम उठा रही है। हालांकि इस भर्ती को सुप्रीम कोर्ट ने जल्द ही पूरी करने के निर्देश दिए है। दरअसल सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती और प्रोन्नति बोर्ड ने सिपाही भर्ती में मेडिकल और प्रमाण पत्र सत्यापन की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

लेकिन बोर्ड ने जो प्रक्रिया शुरु उसको लेकर बोर्ड के सदस्य लापरवाही दिखा रहे है। पहले तो बोर्ड के सदस्यों ने अभियार्थियों का मेडिकल लेने से मना कर दिया। उसके बाद अभियार्थियों से उल जलूल निवास प्रमाण पत्र की मांग कर रहे है। बोर्ड के ऐसा करने से साफ़ जाहिर हो रहा है कि वो इस भर्ती को तय समय में पूरी करने के मूड में नहीं है। इसको लेकर अभियार्थियों ने कड़ा विरोध किया है।

मेडिकल कराने आये शुभम ने बताया कि यहाँ हम सभी योग्य अभ्यर्थियों से मूल निवास प्रमाण पत्र अगस्त 2010 से अगस्त 2013 तक का ही स्वीकार किया जा रहा है। जबकि इसी भर्ती में कुछ माह पहले भी मेडिकल और प्रमाण पत्र सत्यापन की प्रक्रिया हुई थी जिसमें इस तरह के कोई ऐसा नियम नही लगाया गया।

वहीं, प्रवेश ने बताया कि इस भर्ती का परिणाम एक अक्टूबर 2019 को बोर्ड की वेबसाइट पर जारी किया गया। जबकि भर्ती साल 2013 की है. ऐसे में हम लोग 2013 या उससे तीन साल पहले का निवास प्रमाण पत्र कहाँ से लाकर दे सकते है। उसने कहा कि पहले बोर्ड के सदस्य हमारा मेडिकल ही नही कराना चाह रहे थे और कह रहे थे की सबको एब्सेंट दिखा दिया जाएगा। ऐसे में हम लोगों ने उनसे लिखित में यह करने को कहा तब उन्होंने म मेडिकल कराने की बात की।

अभियार्थियों ने बताया कि पूर्व में 2011 में निरस्त हुई सिपाही भर्ती के अभ्यर्थियों को जैसे हैं। वैसे ही (यथारूप) अप्लाई माना गया और उनको उम्र तथा फ़ीस आदि में भी पूर्ण छूट प्रदान की गयी थी। उस समय निवास प्रमाण पत्र के सम्बन्ध में ऐसी कोई टिप्पणी नहीं की गयी थी।  जबकि नियम के अनुसार, निवास प्रमाण पत्र तीन वर्ष के लिये वैध माना जाता है उसके अनुसार भी 2011 के अनुसार निवास प्रमाणपत्र 2008 से मांगा जाना चाहिए। जो कि यहां नहीं हो रहा है।

मेडिकल के लिए आई अभ्यर्थी प्रियंका त्रिपाठी का कहना है कि हमें यहां बताया गया है की जिनके भी निवास प्रमाण पत्र अगस्त 2010 से अगस्त 2013 के बीच नहीं हैं। उनको उत्तर प्रदेश से बाहर का माना जाएगा और पुरुषों की जनरल सूची में शामिल किया जाएगा। लगभग सभी महिला अभ्यर्थी ख़ुद ब ख़ुद बाहर हो जाएगी। और उनका भविष्य खराब हो जायेगा।

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