Friday - 4 December 2020 - 2:12 PM

FATF की ग्रे लिस्ट में ही बना रहेगा पाकिस्तान

जुबिली न्‍यूज डेस्‍क

फाइनेंशिल एक्शन टॉस्क फोर्स की पेरिस में हुई ऑनलाइन बैठक में पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट में ही रखे जाने पर फिर से मुहर लग गई है। एफएटीफ ने बताया कि पाकिस्तानी सरकार आतंकवाद के खिलाफ 27 सूत्रीय एजेंडे को पूरा करने में विफल रही है। एफएटीएफ ने यह भी कहा कि पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंधित आतंकवादियों के खिलाफ भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है।

एफएटीएफ के ग्रे लिस्ट से फिर नहीं बचा पाकिस्तान, 6 प्रमुख काम को करने में  असमर्थ

इसके बाद अब पाकिस्तान एफएटीएफ के जाल में पूरी तरह से फंस चुका है। अगर उसे फाइनेंसिएल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) की निगरानी सूची से बाहर निकलना है तो भारत में आतंकी वारदात को अंजाम देने वाले आतंकियों जैसे दाउद इब्राहिम, जकी-उर-रहमान लखवी, जैश सरगना मौलाना मसूद अजहर और लश्कर सरगना हाफिज सईद और इनके सहयोगियों के समूचे अर्थ तंत्र को खत्म करना होगा और इसके सबूत अंतरराष्ट्रीय बिरादरी के सामने रखने होंगे।

आतंकी फंडिंग रोकने व गैर कानूनी तरीके से नकदी हस्तांतरण पर लगाम लगाने के लिए गठित एफएटीएफ ने शुक्रवार को कहा है कि पाकिस्तान अभी निगरानी सूची (ग्रे लिस्ट) में बना रहेगा। इससे बाहर निकलने के लिए इमरान खान सरकार को फरवरी, 2021 तक छह महत्वपूर्ण कार्यों को अंजाम देना होगा। इन छह कार्यों में यह भी शामिल है कि पाकिस्तान हर तरह की आतंकी फंडिंग पर रोक लगाने की पुख्ता व्यवस्था करे।

एफएटीएफ ने पाक सरकार को 27 कार्य सौंपे थे। पाकिस्तान सरकार ने इनमें से 21 कार्य पूरे कर इसकी रिपोर्ट भी सौंप दी है। एफएटीएफ ने इसके लिए पाक सरकार की तारीफ भी की है। लेकिन शेष बचे छह कार्य ऐसे हैं जो सबसे महत्वपूर्ण हैं। इनमें पहला कार्य यह है कि पाकिस्तान सरकार की एजेंसियां आतंकी संगठनों की फंडिंग रोकने की हर मुमकिम कोशिश करें। आतंकी फंडिंग के तमाम मामलों की जांच करें, आतंकी संगठनों व आतंकियों के खिलाफ तमाम मामलों की जांच करें।

दूसरा कार्य है आतंकी फंडिंग से जुड़े मामलों की जांच के बाद प्रभावशाली तरीके से प्रतिबंध लगाये जाएं। तीसरा कार्य है पाकिस्तान सरकार संयुक्त राष्ट्र की तरफ से 1267 व 1373 प्रावधानों के तहत घोषित आतंकियों व इनकी तरह से काम करने वाले आतंकियों के खिलाफ संपूर्ण तरीके से वित्तीय प्रतिबंध लगाने की व्यवस्था करे। इनकी तरफ से किसी भी तरह से वित्तीय सुविधा जुटाने की कोशिशों को प्रतिबंधित करे।

इनकी सभी संपत्तियों को जब्त करे व वे सारे कदम उठाए जिससे इनके लिए फंड जुटाना असंभव हो जाए। साफ है कि पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय बिरादरी को हर हाल में बताना होगा कि उसने दाऊद, लखवी, अजहर जैसे आतंकियों के ढांचे को तबाह कर दिया है।

खास बात यह है कि पाकिस्तान को एफएटीएफ के दबाव में जिन आतंकियों पर कार्रवाई करनी है उन सभी की भारत को भी अरसे से तलाश है। लखवी व हाफिज सईद की तलाश जहां मुंबई बम विस्फोट के सिलसिले में है वहीं जैश सरगना अजहर की तलाश पठानकोट हमले समेत कई अन्य आतंकी वारदातों में शामिल होने की वजह से है।

एफएटीएफ के प्रेसिडेंट मार्कस प्लेयर ने वर्चुअल प्रेस कांफ्रेंस में बताया कि पाकिस्तान को जो वक्त दिया गया था वह समाप्त हो चुका है। हम पाकिस्तान को सख्त चेतावनी देते हैं कि वह फरवरी-2021 तक शेष बचे कार्यों को पूरा करे। उन्होंने स्वीकार किया कि पाकिस्तान ने अपनी तरह से काफी मेहनत की है। लेकिन निगरानी सूची से बाहर आने के लिए उसे अभी काफी कुछ करना है।

उन्होंने यह भी बताया कि एक बार पाकिस्तान की तरफ से सभी 27 कार्यों को पूरा कर लिया जाता है तो एफएटीएफ की टीम वहां का दौरा करेगी और उसकी सत्यता का पता लगाएगी। उसके बाद ही उसे निगरानी सूची (ग्रे लिस्ट) से बाहर निकालने पर फैसला होगा। पाकिस्तान जून, 2018 से ही ग्रे लिस्ट में है। 27 में से 21 कार्य पूरा होने की वजह से पाकिस्तान प्रतिबंधित सूची (ब्लैक लिस्ट) में शामिल होने से बच गया है।

पाकिस्तान का FATF की ग्रे लिस्ट से बाहर निकलना मुश्किल, अब तक नहीं किया इन  शर्तों को पूरा

एफएटीएफ की प्लेनरी में पाकिस्तान के बचाव के लिए तुर्की खुलकर बैटिंग करता दिखा। उसने सदस्य देशों से कहा कि हमें पाकिस्तान के अच्छे काम पर विचार करना चाहिए और 27 में 6 मानदंडों को पूरा करने के लिए थोड़ा और इंतजार करना चाहिए। लेकिन, एफएटीएफ के बाकी देशों ने तुर्की के इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया। कुछ दिन पहले ही पाकिस्तानी विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने तुर्की, मलेशिया और सऊदी अरब से सहायता मांगी थी।

इसके अलावा नामित करने वाले चार देश-अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी भी पाकिस्तान की सरजमीं से गतिविधियां चला रहे आतंकी संगठनों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की उसकी प्रतिबद्धता से संतुष्ट नहीं हैं।

FATF(एफएटीएफ) का बड़ा फैसला, ग्रे लिस्ट ही बना रहेगा पाक, आतंकी सरगनाओं पर  करनी ही होगी कार्रवाई - Khas Khabar

अगर पाकिस्तान एफएटीएफ की इस बैठक में भी ग्रे लिस्ट में बना रहता है तो उसकी आर्थिक स्थिति का और बेड़ा गर्क होना तय है। पाकिस्तान को अंतरराष्‍ट्रीय मुद्राकोष (आईएमएफ), विश्‍व बैंक और यूरोपीय संघ से आर्थिक मदद मिलना भी मुश्किल हो जाएगा। पहले से ही कंगाली के हाल में जी रहे पाकिस्तान की हालात और खराब हो जाएगी। दूसरे देशों से भी पाकिस्तान को आर्थिक मदद मिलना बंद हो सकता है। क्योंकि, कोई भी देश आर्थिक रूप से अस्थिर देश में निवेश करना नहीं चाहता है।

एफएटीएफ द्वारा ब्लैकलिस्ट में शामिल किए जाने पर पाकिस्तान को उसी श्रेणी में रखा जाएगा जिसमें ईरान और उत्तर कोरिया को रखा गया है और इसका मतलब यह होगा कि वह अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों जैसे आईएमएफ और विश्व बैंक से कोई ऋण प्राप्त नहीं कर सकेगा। इससे अन्य देशों के साथ वित्तीय डील करने में भी समस्याओं का सामना करना पड़ेगा।

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