बहन जी-भाई जान केमिस्ट्री या इंडिया में हाथी

  • ओवेसी-मायावती और थर्ड फ्रंट या इंडिया में हाथी

लोकसभा चुनाव के रण में कौन किसके साथ लड़ेगा अभी तक पूरी तरह से ये बात साफ नहीं हो सकी है। संभवतः पसंद जनवरी तक सबकुछ साफ हो जाएगा। इस बीच पंद्रह -बीस दिनो की कयासबाजी जारी रहेगी।

नया साल शुरू होने वाला है, इसका पहला माह जनवरी सियासत और रामभक्ति से सराबोर होगा। चुनावी चर्चाओं का केंद्र यूपी हॉट स्टेट माना जा रहा है। यहां से बहुत कुछ तय होना है। अयोध्या में दिव्य और भव्य राममंदिर उद्घाटन से राम मय माहौल का कितना फायदा भाजपा में ले पाएगी ?


यूपी से ही दूसरा बड़ा प्रश्न उठता है- बसपा अंततः क्या सचमुच अकेले चुनाव लड़ेगी या ना ना करके भी जनवरी में इंडिया गठबंधन की ताकत बन जाएंगी ।


2024 लोकसभा चुनाव की चर्चाओ में सस्पेंस वूमेन बनी हुई हैं बसपा सुप्रीमों। राजनीति पंडित कहते हैं कि अपने हालिया बयान में उन्होंने तीसरे मोर्चे का इशारा किया है। “उन विपक्षी दलों पर टिप्पणी ना करे इंडिया गंठबंधन जो उनके साथ नहीं हैं। कब कौन, कैसे काम आ जाए कहा नहीं जा सकता”।

बसपा सुप्रीमो का ये बयान ना सिर्फ तीसरे मोर्चे का इशारा करता है। इंडिया गठबंधन में आने का भी संकेत दे रहा है। हालिया बयान में मायावती ने पहली बार कांग्रेस पर कोई तल्ख टिप्पणी नहीं की।


साथ ही एनडीए से दूरी और इंडिया से नजदीकी का इशारा कर मायावती भाजपा विरोधी वोटरों को संदेश देंगी कि वो भाजपा की मददगार नहीं हैं। इंडिया और तीसरा मोर्चा दो ताकते मिल कर भाजपा को रोक सकती हैं!


हांलांकि संदेश कुछ भी दिया जाए पर वास्तविकता यही है कि इंडिया गठबंधन से अलग लड़ने वाले विपक्षी दल भाजपा के लिए फायदेमंद साबित होंगे।

विपक्षी गठबंधन (फाइल फोटो)

अब चर्चाएं ये भी हैं कि पंद्रह जनवरी अपने जन्मदिन के अवसर पर बहन जी मुस्लिम दलित केमिस्ट्री को रंग देने के लिए एआईएमआईएम चीफ असद्दुदीन औवेसी के साथ हाथ मिला सकती हैं। और इस फैसले के साथ बसपा सहित तमाम गैर एनडीए और गैर इंडिया गठबंधन वाले दल मिलकर तीसरे मोर्चे का एलान कर सकते हैं।


यदि ये शंकाएं सही निकलीं तो खासकर यूपी में लड़ाई दिलचस्प हो जाएगी। और इंडिया को यहां मुस्लिम समाज के बीस फीसद वोटों को संभालने में मशक्कत का सामना करना पड़ेगा। हांलांकि तेलंगाना में बीआरसी और एआईएमआईएम गठबंधन पराजित होने से संकेत मिले हैं कि मुस्लिम समाज कांग्रेस के अलावा किसी भी विकल्प को स्वीकार करने के मूड मे नहीं है।

बड़े ताकतवर गठबंधनों के बाइपोलर चुनाव में किसी दल का अकेले लड़ना बेहद रिस्की है इसलिए बसपा के पास इंडिया गठबंधन, एनडीए के अतिरिक्त तीसरे मोर्चे का भी एक ऑप्शन है।

मायावती को साथ लाने की आशाओं और संभावनाएं यदि खत्म हो जाती हैं तो बसपा की रणनीति को जानने के बाद ही इंडिया गठबंधन यूपी में सपा, कांग्रेस, रालोद और अन्य के साथ सीट शेयरिंग पर काम करेगा।

फिलहाल संभावनाओं और कयासों की बारिश में ऊंट किस करवट बैठेगा इसका इंतजार करना होगा। बसपा का अकेले लड़ना भाजपा के लिए फायदेमंद होगा, और यदि तीसरा मोर्चा बनता है और ओवैसी-बहन जी साथ आकर मुस्लिम-दलित फार्मूले पर काम करते हैं तो इंडिया गठबंधन की हालत पतली हो जाएगी। और यदि इंडिया गठबंधन के काफिले में हाथी शामिल होता है तो निश्चित तौर पर भाजपा के लिए एक बड़ी चुनौती होगी।

Related Articles

Back to top button