Tuesday - 22 September 2020 - 7:57 PM

सिर्फ लॉक डाउन के भरोसे नही जीत सकते कोरोना से जंग

न्यूज डेस्क 

कोरोना वायरस के अंत के लिए भारत के साहसिक लॉकडाउन की विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने तारीफ की है। हालांकि, उसने आगाह भी किया कि अतिरिक्त आवश्यक उपायों के बिना लॉकडाउन खत्म होने के बाद कोरोना वायरस फिर से उभर सकता है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अध्यक्ष ट्रेडोस ने प्रेस वार्ता में इस बात के लिए भारत की तारीफ की कि भारत में कोरोना अपनी शुरुआती अवस्था में है, लेकिन यहां पर लॉकडाउन करने का बड़ा फैसला लिया गया। उन्होंने कहा कि भारत के पास क्षमता है और यह देखना बहुत अहम और अच्छा है कि भारत शुरुआती उपाय कर रहा है, इसके गंभीर होने से पहले इसे दबाने और नियंत्रित करने में यह मदद करेगा।

दूसरी ओर एक शोध में सामने आया है कि कोरोना जैसे संक्रामक वायरस को रोकने के लिए संपूर्ण लॉकडाउन ही सबसे कारगर उपाय है। अमेरिका के मिशिगन विश्वविद्यालय का अध्ययन बताता है कि एक सप्ताह के संपूर्ण लॉकडाउन से कोरोना का संभावित संक्रमण 161 गुना तक कम हो जाता है। यह यातायात और सोशल क्वारंटाइन जैसे उपायों से कहीं ज्यादा कारगर है।

अध्ययन में बताया गया है कि यदि कोरोना वायरस को रोकने के लिए कोई उपाय नहीं किए गए तो 15 मई तक प्रति एक लाख आबादी में से 161 लोग कोरोना के संक्रमण का शिकार बन जाएंगे। अगर देशभर में इस दौरान यातायात प्रतिबंधित कर दिया जाए तो यह संख्या घटकर प्रति लाख आबादी पर 48 रह जाएगी। यातायात प्रतिबंध के साथ अगर लोगों को सोशल क्वारंटाइन कर दिया जाए तो भी प्रति लाख 4 लोग इस संक्रमण का शिकार होंगे।

वहीं, एक सप्ताह का संपूर्ण लॉकडाउन कोरोना संक्रमण को एक व्यक्ति प्रति लाख आबादी पर ला सकता है। विशेषज्ञों की मानें तो तीन सप्ताह का लॉकडाउन कोरोना वायरस के संक्रमण को पूरी तरह निष्प्रभावी कर सकता है।

अध्ययन में कहा गया है कि अगर कड़े प्रतिबंध नहीं उठाए जाएंगे तो देश में कोरोना संक्रमण के मामले अभी जो कुछ सैकड़ा हैं, अगले ढाई महीनों में बढ़कर 16 लाख के पार चले जाएंगे। तब इन्हें रोकना असंभव हो जाएगा। अध्ययन में कहा गया है कि वर्तमान दर के हिसाब से 15 अप्रैल तक कोरोना संक्रमण देश में 4800 तक पहुंच जाएगा। अगले एक महीने में यानी 15 मई तक 9.15 लाख, एक जून तक 14.60 लाख और 15 जून तक 16.30 लाख को पार कर जाएगा।

अध्ययन के आंकड़े अब तक काफी सही साबित हुए हैं। अध्ययन में 17,18 और 19 मार्च के लिए भारत में 119, 126 और 133 मामलों की भविष्यवाणी की गई थी। वास्तव में इन तारीखों पर क्रमशः 142, 156 और 194 केस दर्ज किए गए थे।

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