Monday - 6 April 2020 - 12:14 PM

‘पिछलग्‍गू’ के आरोपों के बीच नीतीश बोले- बिहार में नहीं लागू होगा NRC

न्‍यूज डेस्‍क

बिहार में इस वर्ष के अंत में विधानसभा चुनाव होने हैं, जिसको लेकर सभी दल तैयारियों में जुट गए हैं। जनता दल (यूनाइटेड) से निकाले गए राजनीतिक रणनीतिकार और पार्टी उपाध्‍यक्ष प्रशांत किशारे ने बिहार में नई राजनैतिक शक्ति खड़ी करने का इशारा करते हुए सीएम नीतीश कुमार को पिछलग्‍गू बताया था। उन्‍होंने कहा था कि नीतीश गठबंधन साथी के दबाव में है और फैसला नहीं ले पाते हैं।

लेकिन बिहार एनआरसी (नेशनल रजिस्टर फॉर सिटिजंस) को लागू न करने की बात कह कर नीतीश ने अपना दम दिखा दिया है। दरअसल, बिहार विधानसभा में सर्वसम्मति से यह प्रस्ताव पास किया है कि बिहार को एनआरसी (नेशनल रजिस्टर फॉर सिटिजंस) की जरूरत नहीं और मामूली संशोधन के साथ एनपीआर (नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर) का पुराना फॉर्मेट ही लागू होना चाहिए।

इसमें कहा गया कि 2010 के प्रारूप में ही एनपीआर को लाया जाए और इसमें सिर्फ ट्रांसजेंडर संबंधित सूचना वाले कॉलम को बदलाव के रूप में जोड़ा जा सकता है। जाति जनगणना कराए जाने के प्रस्ताव पर भी सहमति बनी। इसे बाद में पारित किया जाएगा।

मंगलवार को विधानसभा के बजट सत्र के दूसरे दिन राजद और भाकपा (माले) ने एनआरसी और एनपीआर के मसले पर कार्यस्थगन प्रस्ताव पेश किया, जिसे मंजूर कर लिया गया। सरकार में सहयोगी भाजपा ने भी बिहार में एनआरसी नहीं लागू होने व एनपीआर के पुराना फॉर्मेट पर ही काम किए जाने पर अपनी सहमति दी।

हालांकि इस चर्चा के दौरान बिहार विधानसभा ने अभूतपूर्व हंगामा भी देखा और हाथापाई की नौबत कड़ी मशक्कत के बाद टाली जा सकी। उसके बाद नीतीश कुमार ने जनगणना के दौरान जातिगत जनगणना कराने की मांग रखते हुए फिर से इस पर प्रस्ताव पारित करने की मांग रखी। साथ ही उन्होंने याद भी दिलाया कि सदन से ये प्रस्ताव दो वर्ष पूर्व भी केंद्र सरकार को भेजा गया था। उन्होंने कहा कि अब इसे कराने का वक्त आ गया है।

नीतीश कुमार ने अपने भाषण के दौरान ये बात भी साफ़ की कि NPR और NRC के मुद्दे पर भाजपा के साथ कोई मतभेद नहीं है। उन्होंने एनआरसी के मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिए गये भाषण को सुनाया कि इसे लागू करने पर फ़िलहाल कोई चर्चा नहीं हुई है। साथ ही उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को जो पत्र लिखा गया है उसके मंत्री बीजेपी कोटे से ही हैं, इसलिए किसी तरह के विवाद की बात नहीं है।

हालांकि  विधानसभा में प्रस्ताव पारित होने के बाद इस मामले को लेकर श्रेय लेने की होड़ मच गयी। विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने ट्वीट कर कहा, “बिहार में NRC/NPR लागू नहीं करने की हमारी मांग पर आज विधानसभा में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पास कराया गया। NRC/NPR पर एक इंच भी नहीं हिलने वाली BJP को आज हमने 1000 किलोमीटर हिला दिया। BJP वाले माथा पकड़े टुकुर-टुकुर देखते रह गए। संविधान मानने वाले हम लोग CAA भी लागू नहीं होने देंगे।”

 

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