Tuesday - 7 July 2020 - 4:01 AM

जानलेवा जानवरों पर इनका नहीं जोर

धीरेन्द्र अस्थाना

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी के लोगों को आवारा जानवरों से निजात नहीं मिल रही है। हर माह लाखों खर्च होने के बाद भी लोग आवारा जानवरों के आंतक का शिकार हो रहे हैं। देहात हो या फिर शहर ऐसे जानवरों से राहगीरों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई बार तो बात जान पर आ रही है। हद तो तब हो गई जब घरों के अंदर तक जानवरों की इंट्री हो रही है।

वहीं नगर निगम का कैटिल कैचिंग विभाग सिर्फ कागजी कार्रवाई में ही जुटा है। ऐसे जानवरों को पकड़ने के लिए लखनऊ नगर निगम की आठ गाड़ियां व 40 कर्मचारी लगाए गए हैं। इन पर हर माह लगभग चार लाख खर्च हो रहा है। फिर भी शहरवासी परेशान है।

गाड़ियों के डीजल व मरम्मत पर दो लाख तथा कर्मचारियों के वेतन पर दो लाख का खर्च हो रहा है। कान्हा उपवन के संचालन में एक करोड़ का खर्च हो रहा है, लेकिन आवारा जानवरों की संख्या में कमी नहीं हो पा रही है। कुछ दिनों पहले भ्रमण में नगर आयुक्त ने खुद हकीकत देखी थी। कूड़े के ढेर पर जानवर विचरण करते दिखे थे।

हालांकि उन्होंने आवारा जानवरों को पकड़ने का निर्देश दिया, लेकिन स्थिति जस की तस ही बनी हुई है। पालिटेक्निक चौराहा हो या तकरोही, इंदिरानगर, जानकीपुरम, गोमतीनगर, हज़रतगंज, राजाजीपुरम, आलमबाग क्षेत्र। यह स्थिति लगभग पूरे लखनऊ शहर की है।

इतना है जुर्माना

पहली बार पकड़े जाने पर जानवर के कान में टैग लगाकर 3000 जुर्माना वसूला जा रहा है। दूसरी बार पर पांच हजार व तीसरी बार पकड़े जाने पर 10000 रूपए की क्षतिपूर्ति लगाई जा रही है। इसके बावजूद लोग मान नहीं रहे हैं।

डेरियों से जानवर पकड़ने पर 10000 रूपए जुर्माना लगाया जा रहा है। कान्हा उपवन में 10500 जानवरों के रखने की क्षमता है। 10300 जानवर रखे जा चुके हैं। जबकि ऐसा तब कहा जा रहा है जब खुद नगर आयुक्त इसकी हकीकत देख चुके है।

70 हजार कुत्तों और बेहिसाब आवारा पशुओं ने जीना किया हराम

सिर्फ आवारा जानवर ही नहीं कुत्तों के आंतक से गली मोहल्ले के लोग परेशान हैं। कई इलाके तो ऐसे हैं जहां शाम ढलते ही निकलना जोखिम से कम नहीं है। रात के अंधेरे में कुत्तो द्वारा गाड़ी वालों को दौड़ने की बात कोई नयी नहीं हैं। कई को गंभीर चोटें तक आ चुकी हैं तो कुछ की जानें भी गयी है।

यह हाल तब है कि जब नगर निगम और निजी संस्था मिलकर नसबंदी कर रही है इसके बाद कुत्तों की संख्या में कमी नहीं आई है। शहर में करीब 70 हजार आवारा कुत्ते खुले आम घूम रहे हैं। इन सबसे ये तो तय है की जानवरों को पकड़ने के लिए नगर निगम की 8 गाड़ियां और 40 कर्मचारी बेकार साबित हो रहे है ?

पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. अरविंद कुमार राव का दावा है कि शहर में एक साड़ नहीं है। जो जानवर सड़क या कूड़े के ढेर पर दिख रहे हैं वह गायें हैं। उनको पकड़ने का लगातार अभियान चला रहा है। डेरियों के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है। जुर्माना वसूला जा रहा है। पिछले दिनों में छह लाख रूपए राजस्व जमा हुआ है। तीन लाख की वसूली और होनी है।

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