Sunday - 11 April 2021 - 2:55 AM

अर्णब-पार्थो की कथित चैट में हुआ नया खुलासा, जज खरीदने…

जुबिली न्यूज डेस्क

रिपब्लिक टीवी के संपादक अर्णब गोस्वामी और न्यूज चैनलों की टीआरपी रेटिंग देने वाली एजेंसी ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल (बार्क) के पूर्व सीईओ पार्थो दासगुप्ता के साथ लीक हुई कथित चैट के बाद न्यूज इंडस्ट्री में तूफान जैसा माहौल है।

अर्णब और पार्थों के बीच हुई चैट में आए दिन बड़े-बड़े खुलासे हो रहे हैं। ताजा खुलासा यह है कि दोनों के बीच की इस कथित चैट में किसी जज को खरीदने की बात हो रही है और अर्णब ने बातचीत के दौरान इसका विरोध भी नहीं किया है।

पार्थो दासगुप्ता जो 24 मई, 2017 को मुख्य कार्यकारी अधिकारी थे, वे कथित रूप से एक चैट के दौरान किसी मामले को लेकर अर्णब से बात कर रहे हैं। पार्थो कहते हैं कि इस मामले में किसी बेहतर वकील की जरूरत है और वह उस रात को किसी जज के साथ सेटिंग करने जा रहे हैं।

इसके जवाब में अर्णब गोस्वामी कथित रूप से कहते हैं कि कोई वकील ऐसा नहीं कर सकता क्योंकि दूसरा वकील आक्रामक है। इस पर पार्थो जवाब देते हैं कि इसीलिए उन्होंने उसे दूसरे वकील के रूप में नियुक्त किया है।

उसके अगले दो मैसेज में पार्थो कहते हैं जज को खरीद लो। इस पर अर्णब कहते हैं कि नोट में सिर्फ एक लाइन लिखने की जरूरत है। ये साफ नहीं है कि अर्णब और दासगुप्ता किस मामले को लेकर बात कर रहे हैं।

जिस तरह इन दोनों के बीच बातचीत हो रही है, उस पर हैरानी स्वाभाविक है, क्योंकि यहां पर जज को खरीदने को लेकर बातचीत  हो रही है। इन कथित चैट्स को लेकर जबरदस्त बवाल के बाद भी अर्णब ने इनके उनके होने से इनकार नहीं किया है।

कांग्रेस ने साधा निशाना

कांग्रेस ने इस मामले को जोरदार ढंग से उठाया है। मनमोहन सिंह सरकार में सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति में शामिल रहे एके एंटनी, सुशील कुमार शिंदे और सलमान खुर्शीद के अलावा राज्यसभा में विपक्ष के नेता ग़ुलाम नबी आजाद और कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने इसे बेहद गंभीर मामला बताया है।

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इन सभी नेताओं ने बुधवार को प्रेस कॉन्फ्रेन्स में मोदी सरकार पर इसको लेकर हमला बोला था। सलमान ख़ुर्शीद ने कहा कि न्यायपालिका पर इस तरह की टिप्पणी बेहद तकलीफदेह है और सवाल खड़े करती है।

उन्होंने कहा, ‘हम यह नहीं कह रहे हैं कि किसी जज को प्रभावित किया जा सकता है, लेकिन कोई इतना दुस्साहस कर रहा है कि वह जज को खरीदने की बात कर रहा है और इसे कतई स्वीकार नहीं किया जा सकता।’

उन्होंने कहा कि, ‘जो बातचीत हुई है, क्या उससे यह स्पष्ट होता है कि न्यायपालिका पर दबाव डालने की कोशिश की गई है और क्या न्यायपालिका से कोई गलत फैसला लेने में ये लोग सफल रहे।’

वहीं पूर्व विदेश मंत्री ख़ुर्शीद ने पूछा, ‘अब जज क्या करेंगे। क्या न्यायपालिका अपनी आंखें बंद कर लेगी या इस पर भरोसा वापस आ सके, इसके लिए कोई कदम उठाकर उदाहरण पेश करेगी।’ 

पूर्व गृह मंत्री सुशील शिंदे ने कहा कि अर्णब ने जो किया वह पत्रकारिता पर लांछन है। पार्टी प्रवक्ता पवन खेड़ा ने कहा कि आाखिर अमित शाह ट्राई के काम में क्यों दखल दे रहे थे?

पवन खेड़ा ने सवाल उठाते हुए कहा, ‘क्या अर्णब सरकार को कंट्रोल कर रहे थे या सरकार उन्हें कंट्रोल कर रही थी लेकिन दोनों ही हालात में लोकतंत्र को नुकसान हुआ।’  उन्होंने कहा कि ये नरेंद्र मोदी का अपना लुटियंस गैंग दिख रहा है जिसके सीईओ अर्णब गोस्वामी हैं।

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उन्होंने कहा, ‘हम जानना चाहते हैं कि अर्णब को ये सूचनाएं कैसे मिलीं और उन्होंने ये सूचनाएं किस-किसको दीं।’ उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री को इस बारे में जवाब देना चाहिए।

अर्णब और पार्थो दासगुप्ता के बीच कथित रूप से जो बातचीत हुई है, उसमें सचिवों की नियुक्ति, बालाकोट एयरस्ट्राइक के बारे में कथित रूप से जानकारी होने, कैबिनेट में फेरबदल, पीएमओ तक पहुंच होना और सूचना और प्रसारण मंत्रालय के कामकाज से जुड़े संदेश शामिल हैं, इसे लेकर बेहद गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं।

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