Wednesday - 28 September 2022 - 9:43 AM

नैरेटिव और परसेप्शन बदलने लगे हैं-मोदी हराए जा सकते हैं

धनंजय कुमार

संघ, बीजेपी और उनका गोदी मीडिया पिछले 8-10 साल से जो नैरेटिव चला रहा है, जनता के बीच परसेप्शन गढ़ता आ रहा है, अब वह पलट रहा है। बीजेपी राष्ट्रभक्त पार्टी है।

मोदी न खाते हैं न खाने देते हैं। भारत हिन्दू राष्ट्र और विश्वगुरु बनाकर रहेगा। कांग्रेस मुक्त भारत। राहुल गांधी पप्पू हैं। सरकार का काम बिजनेस करना नहीं है।

निजीकरण से देश दुनिया में आगे बढ़ेगा। ऐसे अनगिनत नारे-जुमले मोदी जी, गोदी मीडिया और भक्तों ने मिलकर गढ़े। राहुल गांधी और मुसलमानों के खिलाफ नफरत का सघन अभियान चलाया। साथी उद्योगपतियों और सत्ता के दम पर विरोधियों और गैर बीजेपी सरकारों को दमभर परेशान किया, उन्हें मटियामेट करने की कोशिश की।

मोदी, शाह, गोदी मीडिया की तिकड़ी ने अपने दंभ का नंगा नाच किया। जनता नोटबंदी, जीएसटी, महंगाई, कोरोना, बेरोजगारी से मरती रही, मोदी जी ताली बजाते बजवाते रहे। 80 प्रतिशत हिन्दू आबादी में से 35 प्रतिशत आबादी मोदी जी के साथ गाल बजाती रही कि भारत हिन्दू राष्ट्र बनके रहेगा।

मुसलमानों की अकड़ ढीली होगी और भारत का मुसलमान दोयम दर्जे का नागरिक बनकर रहेगा इस देश में। मुसलमानों के खिलाफ जहर भरने के लिए महात्मा गांधी को गाली दी गई, पंडित नेहरू और इंदिरा गांधी को मुसलमान बताया गया, सावरकर को महान विचारक और स्वतंत्रता सेनानी साबित करने की कोशिश की गई, कांग्रेस को भ्रष्ट और मुस्लिम परस्त पार्टी कहा गया।

pm modi
 

और इस अभियान के लिए सोशल मीडिया से लेकर प्रिन्ट और डिजिटल मीडिया पर अरबों रुपये खर्च किए। आरक्षण की जातिगत अवधारणा को गलत बताया गया और सवर्णों के लिए दस प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था की गई। कई जगह आरक्षण पर विवाद खड़ा करने उसे लटकाने की कोशिश की गई। पिछड़ों-दलितों-आदिवासियों को मुफ्तखोर बताने की मुहिम जहरीली मुहिम चलाई गई। और मोदी को भारत का भाग्य विधाता बताया गया । मोदी है तो मुमकिन है। हर हर मोदी-घर घर मोदी। मोदी नहीं तो कौन ? आदि नारे दिए गए। महाराष्ट्र में महाविकास आघाडी सरकार को गिराने और शिंदे सरकार को बनाने के लिए किस नीचता का सहयोग नहीं लिया गया। जांच एजेंसियों का बुरी तरह इस्तेमाल किया गया और उसकी विश्वसनीयता को भारी चोट पहुंचाई गई। कुल मिलाकर कहें तो खुद के महिमामंडन और विरोधियों के चरित्रहनन का एक अवसर नहीं छोड़ा गया। और ऐसा प्रिडिक्ट किया जाने लगा कि 2024 में भी मोदी जी आएंगे।

लेकिन बिहार की राजनीति ने करवट ली और संघ-बीजेपी और मोदी के गुब्बारे में छेद हो गया। मोदी जो सर्वशक्तिमान और साक्षात भगवान के अवतार बताए जा रहे थे, लगा जैसे उनका जादू खत्म हो गया।

शाह की एजेंसियां जो पूरे देश में दहशत फैलाई हुई थी, बिहार में निष्प्रभावी हो गयीं। बीजेपी बिहार में अकेली हो गई और विपक्ष की तमाम पार्टियां एक तरफ खड़ी हो गयीं। और जिस मोदी का मुकाबला करने वाला एक राजनेता अबतक किसी नजर नहीं आ रहा था, नीतीश कुमार यकायक सामने खड़े हो गए। गोदी मीडिया भी मिमियाने लगा।

नीतीश कुमार ने मोदी की राजनीति को पलट दिया है। जो मोदी और गोदी मीडिया कलतक ये कह रहे थे कि बहुत जल्द भारत विपक्ष मुक्त हो जाएगा, अब कहने लगे हैं क्या नीतीश के नेतृत्व में विपक्ष इकट्ठा हो पाएगा? क्या मोदी को चुनौती दे पाएगा?

इस बीच राहुल गांधी ने भी अपनी इमेज में जबरदस्त सुधार किया है। मोदी के पप्पू की इमेज से राहुल बाहर निकल गए हैं। राहुल ने ये लड़ाई अकले लड़ी। कांग्रेस के अधिकांश नेता साथ रहकर राहुल को पप्पू साबित करने में मोदी जी का साथ निभाते रहे। कांग्रेस के बड़े नेताओं ने भी राहुल को अक्षम साबित करने की लगातार कोशिशें कीं, लेकिन राहुल डरे नहीं, गिरे नहीं डटे रहे।

भारत जोड़ो यात्रा आज उसी की परिणति है। गोदी मीडिया झाका मारकर राहुल के भारत यात्रा की चर्चा करने पर मजबूर है। हालांकि मोदी और गोदी मीडिया इस यात्रा को फ्लॉप शो बताने की हर संभव कोशिश कर रहा है, लेकिन जिस तरह से तमिलनाडु के मुख्यमंत्री स्टालिन ने सपोर्ट दिखाया है, नीतीश कुमार ने कांग्रेस को साथ लेकर विपक्ष की एकता का प्लान बनाया है और नीतीश के नेतृत्व में जिस तरह से विपक्ष मोदी के खिलाफ लामबंद हुआ है मोदी और उनके मीडिया की नींदें उड़ गई हैं।

मोदी का कमजोर होना अदानी और अंबानी के लिए भारी नुकसानदेह है। अदानी दुनिया के अमीरों में तीसरे नंबर पर पहुँच चुके हैं, उनका सपना होगा नंबर वन पर पहुँचने का, अगर मोदी कमजोर पड़े तो यह सपना सपना ही रह जाएगा, इसलिए जाहिर है अदानी पूरा ज़ोर लगाएंगे। लेकिन सवाल है क्या पैसे के दम पर, मीडिया के दम पर, तिकड़मों के दम पर भारत के लोकतंत्र को खत्म किया जा सकता है? क्या भारत की जनता लोकतंत्र को खत्म होने देगी?

नीतीश कुमार के उभरने से सवर्णवादी बिलबिला उठे हैं। सवर्णवादी मोदी के रक्षक हैं, क्योंकि मोदी ने अबतक जो किया है, उससे सवर्णवादियों को अपनी श्रेष्ठता बनाए रखने में मदद मिली है।

निजीकरण के एजेंडे ने सरकारी नौकरियों को न्यूनतम स्तर पर ला दिया है। रेलवे और सेना में नौकरियों के भरोसे देश के पिछड़े-दलित युवा सपने देखते थे, मोदी सरकार ने उन सपनों को ध्वस्त करने का काम किया है। सरकारी नौकरियों के खत्म होने से आरक्षण एक झटके में निष्प्रभावी हो गया।

सरकारी स्कूलों को आधुनिक और बेहतर बनाने के बजाय बंद किया जा रहा है। मेडिकल-इंजीनियरिंग कॉलेजों में पिछड़े-दलित-आदिवासी अपना एडमिशन न ले सकें, इसके लिए उन कॉलेजों की फीस चार सौ गुणी तक बढ़ा दी गई है।

कृषि पर आज भी देश की 60 प्रतिशत आबादी आश्रित है। 90 प्रतिशत किसान गरीब और छोटे जोत वाले हैं, उनको गरीब बनाए रखने के लिए मोदी सरकार ने भूमि अधिग्रहण कानून में संशोधन करने से लेकर कृषि कानून बनाए। ये अलग बात है कि किसानों के भारी आंदोलन के बाद कृषि कानून वापस लिए गए, लेकिन किसानों को कमजोर करने की कोशिशें आज भी जारी हैं।

लेकिन राहुल की भारत जोड़ो यात्रा और नीतीश की विपक्ष जोड़ो मुहिम ने नई संभावना जगाई है। कांग्रेस से लेकर शरद पवार, ममता बनर्जी और अखिलेश यादव तक ने जिस तरह से नीतीश के साथ आने की बात कही है, उससे नैरेटिव और परसेप्शन दोनों चेंज हुए हैं। सोचा और कहा जाने लगा है मोदी अजेय नहीं हैं। मोदी को हराया जा सकता है।

हालांकि, केजरीवाल और ओवैसी जैसे लोग विपक्षी एकता में छेद करने में लगे हैं और लगे रहेंगे, लेकिन अगर बाकी विपक्ष लामबंद हो जाता है तो 2024 के लोकसभा चुनाव की फिजा निश्चित तौर पर बदल जाएगी।

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