Wednesday - 5 August 2020 - 3:50 PM

मंदी की मार: आखिर स्ट्रीट फूड से क्यों कलटी काट रहे ग्राहक

जुबिली पोस्ट ब्यूरो

लखनऊ। देश में मंदी की मार न केवल बड़े- बड़े प्रोजेक्ट पर पड़ रही है। बल्कि सड़कों के किनारे लगने वाले स्ट्रीट फूड भी पड़ी है। सरकार की एक ऐसी नीति की वजह से न केवल रेड़ी दुकानदार परेशान है, बल्कि ग्राहक भी दुकानों पर पहुंचने से कलटी काट रहे है।

वजह साफ है कि स्ट्रीट फूड का पूरा कारोबार पॉलीथिन पर निर्भर रहा है। अब इसके विकल्प में कुछ बचा ही नहीं है, जिसकी वजह से देश के करोड़ों पटरी दुकानदारों का कारोबार मंदी से जुझ रहा है। मंदी में जाने के दूसरे पहलु पर नजर डाले तो सरकार की वेंडिंग पॉलिसी है।

सरकारें अब तक ये तय नहीं कर पायी है कि आखिर पटरी दुकानदार कहां और कैसे गुजर- बसर करके अपना पालन- पोषण कर पाये। 2 अक्टूबर से पूरे देश में बड़े पैमाने पर अभियान के जरिये इससे होने वाले नुकसान के बारे में लोगों को जागरुक किया जा रहा है। इसकी जगह कपड़े या कागज की थैले के इस्तेमाल को लेकर जागरुकता बढ़ाई जा रही है।

यदि पटरी दुकानदारों के पास भूल से भी प्लास्टिक मिल जा रही है उन पर मोटा जुर्माना ठोका जा रहा है। पटरी दुकानदारों की माने तो ना उनको दुकान लगाने दी जाती है और ना ही उन्हें पैकिंग के लिए कोई विकल्प मिल रहा है, जिसके चलते उनका कारोबार चौपट हो चुका है।

आपको बता दे कि सिंगल यूज प्लास्टिक के इस्तेमाल के खिलाफ कड़े नियम बनाए गए हैं, जो दुकानदार पॉलीथीन थैली का इस्तेमाल कर रहे हैं उनका चालान काटा जा रहा है। देशभर में इसके इस्तेमाल करने पर चालान काटा जा रहा है।

पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम- 1986 की धारा 15 के तहत, जो कोई आदेशों का पालन नहीं करता है, उसे अधिकतम 5 साल की सजा या 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया जा सकता है। खास मामलों में दोनों (कारावास और जुर्माना) एकसाथ लगाए जा सकते है। कई पटरी दुकानदारों पर 5000 रुपये तक का जुर्माना भी लगाया गया है, जबकि उनकी दिन की कमाई 500 – 1000 रूपए ही है।

लखनऊ में एक बतासे का ठेला लगाने वाले राजेश का कहना है कि जब से पन्नी रखना बंद किया है, तब से केवल 300 रूपए ही कमा पाते है, जबकि पहले ये आमदनी 1000 रूपए के पार ही रहती थी। सरकार की नीतियों की वजह से अब डेली आने वाले कस्टमर भी नुकसान में होने का हवाला देकर आना काम कर दिए है।

पान की गुमटी चलाने वाले विनोद का कहना है कि हमारे कई ग्राहकों की तो नौकरी ही चली गयी है, जिसकी वजह से हमारा कारोबार नुकसान में आ गया है। कुछ महीनों पहले तक महंगी- महंगी सिगरेट पीने वाले अब सस्ती सिगरेट का सहारा ले रहे है। कइयों ने तो साहब गुमटी पर आना ही छोड़ दिया है।

इन पर है बैन

  • सिंगल यूज प्लास्टिक कटलरी (प्लेट, कप, गिलास, बाउल, फोर्क, चाकू, चम्मच, स्ट्रॉ) पर बैन।
  • थर्मोकॉल/स्टेयरोफाम कटलरी (प्लेट, कप, गिलास, बोतल वगैरह)।
  • सिंगल यूज प्लास्टिक कंटेनरस (बोतल, ट्रे, गिलास, लिडस) 250 माइक्रोन से कम।
  • फूड आइटम की पैकिंग के लिए इस्तेमाल होने वाली सिल्वर एल्यूमीनियम, प्लास्टिक बैग या पाउच।
  • ड्रिंकिग वाटर सील्ड ग्लास और प्लास्टिक मिनरल वाटर पाउच।
  • एक बार इस्तेमाल होने वाले रेजर्स, पेन।
  • डेकोरेशन में इस्तेमाल होने वाला प्लास्टिक और थर्मोकोल।
  • डेकोरेशन में इस्तेमाल होने वाली रैपिंग, पैकिंग शीट, फ्रिल्स, गारलैंड, पार्टी ब्लूपर्स, प्लास्टिक रिबन।
  • नॉन वोवेन पोलीप्रोपोलिन बैग।
  • हैंडल और बिना हैंडल के सभी साइज और रंग में प्लास्टिक/पॉलीथिन कैरी बैग।

अगली कड़ी में आपको बताएंगे सब्जियों पर आयी है ये कैसी आफत

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