Friday - 27 January 2023 - 8:45 PM

गुजरात में ‘गांधी की आत्‍महत्‍या’ पर सवाल क्‍यों  

न्‍यूज डेस्‍क

महात्मा गांधी के बारे में पूूूएक बेतुके सवाल ने विवाद छेड़ दिया है। यह सवाल था – ‘गांधीजी ने आत्महत्या करने के लिए क्या किया था?’ यह सवाल गुजरात में गुजराती विषय की परीक्षा दे रहे 9वीं कक्षा के विद्यार्थियों से पूछा गया। सवाल चार अंकों का था।

इतना ही नहीं, यहां 12वीं कक्षा के विद्यार्थियों को भी परीक्षा में अजीब सवाल दिया गया। उनके प्रश्नपत्र में लिखा था – ‘आपके इलाके में शराब बेचने वाले और शराबियों का आतंक बढ़ गया है। इसकी शिकायत करने के लिए जिला पुलिस अधीक्षक को पत्र लिखें।’ यह सवाल पांच अंको का था।

रिपोर्ट के अनुसार, ये दोनों सवाल बीते शनिवार को गांधीनगर स्थित विकास संकुल स्कूल में गुजराती विषय की परीक्षाओं में पूछे गए। अब इन सवालों पर विवाद छिड़ गया है। शराब से संबंधित सवाल के मामले में लोगों का कहना है कि गुजरात में शराबबंदी है। ऐसे में छात्रों से इस तरह के सवाल का क्या मतलब बनता है।

दरअसल महात्मा गांधी द्वारा आत्महत्या की कोशिश से जुड़ी घटना पर गुजराती में पूछा गया सवाल गलत नहीं है, बल्कि उसके गलत अनुवाद और महात्मा गांधी के जीवन की इस घटना की जानकारी नहीं होने की वजह से भ्रम पैदा हो गया।

सवाल कुछ यूं किया गया था- महात्मा गांधी ने आत्महत्या के लिए क्या किया था? जबकि कुछ खबरों में इसका अनुवाद यूं किया गया- महात्मा गांधी ने आत्महत्या कैसे की? खैर यह सवाल महात्मा गांधी की जीवन की एक घटना से संबंधित है। उन्होंने बचपन में एक बार आत्महत्या की कोशिश की थी।

उन्होंने अपनी आत्मकथा ‘सत्य के प्रयोग’ में बचपन की इस घटना का जिक्र किया है। उन्होंने लिखा है कि अपने एक रिश्तेदार के साथ उनको बचपन में बीड़ी पीने की लत पड़ गई थी। बचपन में उनके पास इतने पैसे नहीं होते थे कि बीड़ी खरीदकर पी सके। उनके चाचा बीड़ी पीते थे। वह बीड़ी पीकर जो ‘ठूंठ’ फेंक देते थे, उसको चुनकर गांधीजी और उनके रिश्तेदार ने पीना शुरू किया। लेकिन ये ठूंठ हर समय नहीं मिलते और उनमें से बहुत धुआं भी नहीं निकलता था। उसके बाद उन्होंने नौकर की जेब से पैसे चुराने शुरू कर दिए।

इसलिए किए आत्महत्या का फैसला

बीड़ी पीने की लत पड़ने के बाद उनको लगा कि हर कुछ उनको बड़ों से ही पूछकर करना पड़ता है। अपनी मर्जी से कुछ भी नहीं कर सकते। वह ऊब गये और आत्महत्या करने का फैसला किया। अब सवाल यह था कि आत्महत्या कैसे करें तो इसके लिए उन्होंने धतूरे के बीज को चुना।

वह लिखते हैं, ‘अपनी पराधीनता हमें अखरने लगी। हमें दुख इस बात का था कि बड़ों की आज्ञा के बिना हम कुछ भी नहीं कर सकते थे। हम ऊब गए और हमने आत्महत्या करने का निश्चय कर लिया। हमने सुना कि धतूरे के बीज खाने से मृत्यु होती है। हम जंगल में जाकर बीज ले आए। शाम का समय तय किया।

केदारनाथजी के मंदिर की दीपमाला में घी चढ़ाया, दर्शन किये और एकांत खोज लिया। पर जहर खाने की हिम्मत न हुई। अगर तुरंत ही मृत्यु न हुई तो क्या होगा? मरने से लाभ क्या? क्यों न पराधीनता ही सह ली जाए? फिर भी दो-चार बीज खाए। अधिक खाने की हिम्मत ही न पड़ी। दोनों मौत से डरे और यह निश्चय किया कि रामजी के मंदिर में जाकर दर्शन करके शांत हो जाएं और आत्महत्या की बात भूल जाएं।’

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