Saturday - 22 January 2022 - 1:32 AM

ओमिक्रान की दस्तक के पहले ही सतर्क हो जाएं हम

कृष्णमोहन झा

लगभग दो साल पहले चीन की एक प्रयोगशाला से निकल कर दुनिया भर में तबाही मचाने वाले कोरोनावायरस के अब तक कई स्वरूप सामने आ चुके हैं और अब दक्षिण अफ्रीका में इसका एक और वेरिएंट सामने आया है जिसे ओमिक्रान नाम दिया गया है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार अब तक दुनिया के 23 देशों में ओमिक्रान दस्तक दे चुका है लेकिन संतोष की बात यह है कि इस नए वेरिएंट के संक्रमण की वजह से किसी भी देश में अब यह किसी भी संक्रमित व्यक्ति की मौत होने की खबर नहीं मिली है।

लेकिन विश्व स्वास्थ्य संगठन ने यह चेतावनी अवश्य दे दी है कि कोरोनावायरस का नया वैरिएंट पूर्व में पाए गए उन सभी वैरिएंट से ज्यादा घातक साबित हो सकता है जिनके कारण पहले दुनिया के कई देशों में तबाही की स्थिति निर्मित हो चुकी है।

केंद्रीय मंत्री मनसुख मांगलिया के अनुसार यद्यपि अभी तक ओमिक्रान से संक्रमण का एक भी मामला भारत में सामने नहीं आया है लेकिन केंद्र सरकार ने तीसरी लहर की आशंका को देखते हुए विभिन्न राज्य सरकारों को अभी से पूरी तरह तैयार रहने के निर्देश दे दिए हैं। इसके बाद सभी राज्य सरकारों ने कोरोना से बचाव के ऐहतियाती उपायों में लापरवाही बरतने वाले लोगों पर सख्ती दिखाना शुरू कर दिया है।

इसमें दो राय नहीं हो सकती कि कोरोना के सक्रिय मामलों की संख्या में तेजी से गिरावट के रुख को देखते हुए लोगों में बेफिक्री दिखाई देने लगी थी लेकिन कोरोनावायरस के नए वैरिएंट ओमिक्रान के घातक प्रभाव होने की चेतावनी ने लोगों की बेफिक्री को अब घबराहट में बदल दिया है।

सरकार अपनी ओर से पूरी कोशिश कर रही है कि दक्षिण अफ्रीका से निकल कर दुनिया के 23 देशों में पांव पसारने वाला ओमिक्रान वायरस भारत में प्रवेश न कर सके । इसीलिए केंद्र सरकार ने राज्य सरकारों के लिए नई गाइडलाइन जारी की है जो 31 दिसंबर तक प्रभावशील रहेगी।

मध्यप्रदेश सरकार ने 50 प्रतिशत क्षमता के साथ स्कूलों में पढ़ाई जारी रखने के आदेश दिए हैं यद्यपि कालेजों को इन पाबंदियों को मुक्त रखा गया है।

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अन्य राज्यों की सरकारों ने भी अपने यहां ऐहतियाती उपायों को सख्ती से लागू करना शुरू कर दिया है। इसी क्रम में राज्य सरकारों ने कोरोना वायरस के इलाज में उपयोगी दवाओं, इंजेक्शन , आक्सीजन के प्रबंधन और अस्पतालों में सभी आवश्यक तैयारियां करने के निर्देश भी दे दिए हैं।

दुनिया के अनेक देशों ने दक्षिण अफ्रीका से आने वाली उड़ानों पर रोक लगा दी है। भारत में भी प्रधानमंत्री मोदी ने अधिकारियों को अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के संबंध में पूर्व में लिए गए फैसलो की समीक्षा करने के निर्देश दिए हैं।

गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने 20 महीनों के लंबे अंतराल के बाद 15 दिसंबर से सभी अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को प्रारंभ करने की अनुमति दी थी परंतु दक्षिण अफ्रीका में कोरोनावायरस के नये वेरिएंट का पता लगने के बाद अभी भारत से सामान्य अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर रोक जारी रहेगी।

इसके अलावा विशेष विमानों से भारत आने वाले लोगों के लिए सरकार ने नये प्रोटोकॉल का पालन अनिवार्य कर दिया है। यद्यपि WHO  ने ओमिक्रान को कोरोनावायरस का बेहद चिंताजनक स्वरूप निरूपित किया है परंतु वह चीन, जापान और इजरायल सरकारों के उस फैसले से सहमत नहीं हैं जिसके तहत उनके देशों में विदेशों से आने वाली सभी उड़ानों पर रोक लगा दी गई है लेकिन विश्व स्वास्थ्य संगठन ने यह सलाह जरूर दी है कि जिन देशों में ओमिक्रान दस्तक दे चुका है वहां की यात्रा करने से 60 वर्ष से ऊपर के लोगों को बचना चाहिए।

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विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक समिति ने दुनिया भर के देशों को सचेत किया है कि पहले कोरोनावायरस के जितने वेरिएंट सामने आ चुके हैं उनकी तुलना में ओमिक्रान ” बेहद चिंताजनक ” वेरिएंट साबित हो सकता है परंतु इसके साथ ही विश्व स्वास्थ्य संगठन और ओमिक्रान के प्रभावों के अध्ययन में जुटे वैज्ञानिकों ने यह भी कहा है कि ओमिक्रान के प्रभावों के बारे में किसी निश्चित नतीजे पर पहुंचने के पहले इस संबंध में किसी भी तरह की प्रतिक्रिया देने से बचा जाना चाहिए ताकि लोग सतर्क तो रहें परंतु अनावश्यक भय की स्थिति निर्मित न हो।\

इसमें कोई संदेह नहीं कि सतर्कता तो हर हालत में जरूरी है क्योंकि वैज्ञानिक भी अभी तक इस बारे में किसी नतीजे पर नहीं पहुंच पाए हैं कि दुनिया में कोरोनावायरस का अस्तित्व कब तक बना रहेगा। दरअसल अभी तक तो विश्व स्वास्थ्य संगठन यह भी तय नहीं कर पाया है कि दुनिया भर में पचास लाख से अधिक लोगों की जान लेने वाले कोरोनावायरस की उत्पत्ति दो साल पहले चीन की एक प्रयोगशाला में किस तरह हुई थी।

दक्षिण अफ्रीका में कोरोनावायरस के जिस नये

वेरिएंट का पता चला है उसके घातक प्रभावों के बारे में भी विरोधाभासी बयान सामने आ रहे हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन तो नये वेरिएंट को बेहद चिंताजनक बता रहा है परंतु जिस दक्षिण अफ्रीका में इस वेरिएंट का सबसे पहले पता चला वहीं के वैज्ञानिक और चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि ओमिक्रोन उतना घातक नहीं है जितनी इसके बारे में दहशत फैला दी गई है।

विश्व के अनेक देशों द्वारा दक्षिण अफ्रीका जाने वाली उड़ानों पर रोक लगाए जाने से दक्षिण अफ्रीका को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। यह भी संभव है कि समय बीतने के साथ ही ओमिक्रान के बेहद चिंताजनक वेरिएंट होने संबंधी आशंका गलत साबित हो जाए परन्तु जब तक दुनिया के वैज्ञानिक इसके व्यापक परीक्षणों से ऐसे किसी नतीजे पर नहीं पहुंच जाते तब तक तो दुनिया के दूसरे देशों को ऐहतियाती उपाय जारी रखने ही होंगे।

यहां भी विशेष उल्लेखनीय है कि कोरोनावायरस के नए वेरिएंट ओमिक्रान के संक्रमण का सबसे पहला मामला भले ही दक्षिण अफ्रीका में पाए जाने की खबर ने पिछले दिनों दुनिया भर के देशों को दहशत की स्थिति में पहुंचा दिया था परन्तु अब यह‌ सुनने में आ रहा है कि ओमिक्रान वेरिएंट के संक्रमण का सबसे पहला मामला जब कथित रूप से दक्षिण अफ्रीका में पाया गया उसके पहले ही यह वेरिएंट यूरोप के कुछ देशों में दस्तक दे चुका था।

अगर यह खबर सही है तो यह पता लगाना अब मुश्किल होगा कि यूरोप के किन देशों में इस ओमिक्रान वेरिएंट ने दक्षिण अफ्रीका से पहले ही अपना असर दिखाना शुरू कर दिया था। ऐसी खबरें निःसंदेह चिंताओं में इजाफा करती हैं इसलिए अगर दुनिया के जिन देशों में अपने यहां अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का आवागमन बंद करने का फैसला किया है तो उसे उनके ऐहतियाती कदम के रूप में देखा जाना चाहिए।

दरअसल अब यह तय करने का समय आ गया है कि हमारी वैक्सीन ओमिक्रान से सुरक्षा में कितनी कारगर है। इस बारे में वैक्सीन निर्माता कंपनियों के साथ ही देश के वैज्ञानिकों की राय अभी तक सकारात्मक ही रही है। दुनिया के बहुत से देशों में कोरोना वैक्सीन की बूस्टर डोज की शुरुआत भी हो चुकी है ।

अभी भारत में इस बारे में अध्ययन जारी है । नेशनल टेक्निकल एडवाइजरी ग्रुप आन इम्यूनाइजेशन अगले दो तीन हफ्तों में अपने शोध से बूस्टर डोज की उपयोगिता के बारे में किसी निश्चित नतीजे पर पहुंच सकता है।

(लेखक IFWJ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और डिज़ियाना मीडिया समूह के राजनैतिक संपादक है)

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