Thursday - 2 February 2023 - 12:54 PM

चक्रव्यूह में चिराग

प्रीति सिंह

लोक जनशक्ति पार्टी के अध्यक्ष चिराग पासवान की हालत इन दिनों महाभारत के अभिमन्यु जैसी हो गई है। अभिमन्यु जब अपनी मां के पेट में थे तो उन्होंने चक्रव्यूह में घुसने और उसे तोडऩे की कला तो सीख लिए लेकिन थोड़ी देर सो जाने की वजह से वह निकलने का रास्ता नहीं सीख पाए। ऐसा ही कुछ चिराग पासवान के साथ है।

अपने पिता रामविलास पासवान से राजनीति का ककहरा सीखने वाले चिराग पासवान ने पिता से राजनीति करना तो सीख लिया लेकिन जमीनी स्तर पर हकीकत को परखना अपने पिता से नहीं सीख पाए। चिराग अपने पिता से चक्रव्यूह बनाना तो सीख गए लेकिन उससे निकलना नहीं सीख पाए। यदि ये कहें कि नियति ने उन्हें सीखने का मौका नहीं दिया तो गलत नहीं होगा।

चिराग पासवान पिता के जाने के बाद से अपने ही चक्रव्यूह में फंस गए हैं। विरोधियों को घेरने के लिए उन्होंने जिस चक्रव्यूह की रचना की थी अब उसमें से वह निकल नहीं पा रहे हैं। हालत यह हो गई है कि जिनको घेरने के लिए चक्रव्यूह बनाए थे अब उन्हीं का नाम लेकर उससे निकलने की कोशिश कर रहे हैं।

बिहार में चुनावी महासंग्राम छिड़ा हुआ है। विधानसभा चुनाव में जहां एक तरफ सभी दल गठबंधन के साथ चुनावी मैदान में उतरे हुए हैं, वहीं दूसरी ओर एलजेपी ने चिराग पासवान के नेतृत्व में एनडीए से अपनी राहें अलग करते हुए 143 विधानसभा सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारा है।

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लेकिन विडंबना यह है कि एनडीए गठबंधन से अपनी राह अलग करने के बाद भी चिराग पासवान बीजेपी की बी टीम बताने से नहीं चूक रहे हैं। चिराग प्रधानमंत्री मोदी और बीजेपी से अपने अच्छे रिश्ते बता रहे हैं और वहीं बीजेपी उनकी इस हरकत को बचकाना कहकर कन्नी काट रही है।

बीजेपी के कई प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर के नेताओं ने अपनी तरफ से कई बार यह बात साफ कर दी कि एलजेपी के साथ बिहार में उनका कोई नाता नहीं है। यह बस बीजेपी के वोट बैंक को अपनी तरफ आकर्षित करने का एक छलावा मात्र है।

इतना हीं नहीं बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, बिहार बीजेपी प्रभारी भूपेंद्र यादव, बिहार के मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी, बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता सांबित पात्रा और बिहार बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष डॉ संजय जायसवाल ने चिराग पासवान को बार-बार आगाह किया कि वे इस तरह की बयानबाजी न करें, लेकिन वह मानने को तैयार नहीं हैं।

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सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर चिराग ऐसा क्यों कर रहे हैं?  इसका एकमात्र कारण यह है कि जिस स्वाभिमान के भरोसे चिराग ने मान-मनौव्वल के बाद बीजेपी से किनारा किया था, वह अब उन्हें टूटता सा नजर आने लगा है। भाजपा ने केंद्र स्तर पर एलजेपी के समर्थन की परवाह किए बिना यह साफ कह दिया कि एनडीए गठबंधन का मतलब बीजेपी और जेडीयू ही है। बीजेपी की कोई बी टीम नहीं है। अब इससे चिराग पासवान को इस बात का डर सताने लगा कि उनकी हालत कहीं धोबी के कुत्ते जैसी न हो जाए. जो न तो घर का होगा और न ही घाट का।

दरअसल बिहार के सियासत की चिराग पासवान को सिर्फ इतनी समझ है जितनी वे अपने पिता रामविलास पासवान के कहे अनुसार सीख सके हैं। जमीनी स्तर पर हकीकत को परख पाने से कोसों दूर चिराग पासवान ने जब एनडीए से किनारा किया था, तब उन्हें यही लगा था कि 8 प्रतिशत दलित वोटरों पर जो एलजेपी की पकड़ है, उसके अलावा बीजेपी के सवर्ण तबके के वोटरों को वे अपने पाले में खींचने में सफल हो सकते हैं, लेकिन उनकी वह चाल अब ढ़ीली पड़ती नजर आ रही है।

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एक बड़ा कारण यह भी है कि अब उनके पिता भी नहीं है। वह अकेले पड़ गए हैं। उन्हें समझ नहीं आ रहा कि क्या करें। इसीलिए वह बार-बार बीजेपी के साथ अपने गठबंधन की बात कह रहे हैं। वहीं बीजेपी की तल्खी की एक वजह यह भी है कि बीजेपी के सभी बागियों को चिराग ने अपना लिया। दूसरा उन्होंने चुनाव प्रचार के दौरान मोदी की तस्वीर का भी इस्तेमाल किया, ताकि बीजेपी बी टीम के रूप में खुद को दिखा कर वोटों को अपने पाले में कर सकें। जाहिर है बीजेपी की प्रतिक्रिया तो आयेगी ही। उन्हें जदयू को भी तो खुश रखना है।

फिलहाल मतदान तिथि करीब आते-आते चिराग पासवान को अब समझ में आने लगा है कि वह अपने ही चक्रव्यूह में फंस गए हैं। उससे निकलना उनके लिए आसान नहीं है।

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