केरल: क्या सतीशन का ‘मोदी दांव’ पड़ेगा भारी? CM पद पर फंसा पेंच

तिरुवनंतपुरम केरल विधानसभा चुनाव 2026 में 140 में से 102 सीटों पर ऐतिहासिक जीत दर्ज करने वाली कांग्रेस (UDF) के लिए सरकार गठन की राह काँटों भरी साबित हो रही है। मुख्यमंत्री पद की रेस में सबसे आगे चल रहे वी.डी. सतीशन अपने ही एक बयान के कारण विवादों के भंवर में फंस गए हैं। सतीशन ने अपनी दावेदारी मजबूत करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उदाहरण का सहारा लिया, जो अब उन्हीं के खिलाफ ‘पॉलिटिकल रेड फ्लैग’ बन गया है।

एक मीडिया इंटरव्यू के दौरान जब सतीशन से प्रशासनिक अनुभव को लेकर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने तर्क दिया कि शासन चलाने के लिए पिछला अनुभव अनिवार्य नहीं है। उन्होंने कहा

“जब नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री बने थे, तब उनके पास क्या प्रशासनिक अनुभव था? वे केवल एक संगठक थे। वी.एस. अच्युतानंदन के पास भी शुरुआत में अनुभव की कमी थी।”

सतीशन का यह तर्क सोशल मीडिया और पार्टी के भीतर आग की तरह फैल गया। कांग्रेस समर्थकों का एक धड़ा इसे “मोदी की परोक्ष प्रशंसा” मान रहा है, जो पार्टी की वैचारिक लाइन के खिलाफ है।

विवाद बढ़ते ही सियासी गलियारों में यह खबर भी तेज है कि सतीशन ने आलाकमान के सामने अपना रुख साफ कर दिया है। सूत्रों के मुताबिक, सतीशन का कहना है कि यदि उन्हें मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी नहीं दी जाती, तो वे कैबिनेट में शामिल होने के बजाय सिर्फ विधायक बने रहना पसंद करेंगे।

  • सोशल मीडिया रैली: ‘राहुल गांधी, वीडी सतीशन को सीएम बनाओ’ हैशटैग के साथ 1 लाख से ज्यादा कमेंट्स और पोस्ट किए जा चुके हैं।
  • दबाव की रणनीति: सीएलपी (CLP) बैठक के बाद सतीशन और उनके समर्थकों की चुप्पी को आलाकमान पर दबाव बनाने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।

पार्टी पर्यवेक्षक मुकुल वासनिक और अजय माकन ने केरल पहुंचकर नवनिर्वाचित विधायकों से व्यक्तिगत राय ली है। दिवंगत ओमन चांडी के बेटे चांडी ओमन ने इस मुद्दे पर सधी हुई प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “हमने पार्टी की एसओपी (SOP) के तहत अपनी राय दे दी है। सही समय पर नेतृत्व फैसला करेगा।”

  1. सतीशन को चुनना: संगठन को जीत दिलाने वाले चेहरे को कमान देना, लेकिन उनके ‘मोदी वाले बयान’ पर उठ रहे सवालों का सामना करना।
  2. नजरअंदाज करना: यदि उन्हें पद नहीं दिया गया, तो प्रचंड बहुमत के बावजूद राज्य में अंदरूनी विद्रोह का खतरा बढ़ सकता है।
  • कुल सीटें: 140
  • UDF (कांग्रेस गठबंधन): 102
  • LDF (वामपंथी गठबंधन): 35
  • अन्य: 03

केरल की इस जीत ने कांग्रेस को राष्ट्रीय स्तर पर ऑक्सीजन दी है, लेकिन मुख्यमंत्री चयन की यह खींचतान पार्टी के “एकजुट केरल” के संदेश को कमजोर कर सकती है। अब सबकी नजरें दिल्ली में आलाकमान के अंतिम फैसले पर टिकी हैं।

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