US-Iran War Updates: डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के बीच शांति समझौते के संकेत, आज आ सकता है निर्णायक जवाब

वॉशिंगटन/तेहरान। महीनों से बारूद के ढेर पर बैठे मिडिल ईस्ट से आखिरकार एक सुकून देने वाली खबर आ रही है। अमेरिका और ईरान, जो अब तक एक-दूसरे के खून के प्यासे थे, अब टेबल पर बैठकर ‘शांति समझौते’ की ओर बढ़ते दिख रहे हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ताजा बयान और ईरान की ओर से आने वाले संभावित जवाब ने दुनिया को बड़ी उम्मीद दी है।
ट्रंप का यू-टर्न या सोची-समझी रणनीति?
व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस से पत्रकारों को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जो कहा, उसने सबको चौंका दिया। ट्रंप ने बेहद सकारात्मक लहजे में कहा
“पिछले 24 घंटों में हमारी (ईरान के साथ) बातचीत बहुत उत्साहजनक रही है। यह काफी हद तक मुमकिन है कि हम जल्द ही किसी बड़े समझौते पर पहुंच जाएं।”
यह बयान उन सैन्य धमकियों और नौसैनिक घेराबंदी के ठीक उलट है, जो कुछ दिनों पहले तक ट्रंप प्रशासन की पहचान बनी हुई थी।
आज का दिन है ‘सुपर थर्सडे’: ईरान सौंप सकता है जवाब
CNN की एक एक्सक्लूसिव रिपोर्ट के मुताबिक, गुरुवार यानी आज का दिन मिडिल ईस्ट के भविष्य के लिए निर्णायक हो सकता है। क्षेत्रीय सूत्रों का दावा है कि ईरान अमेरिकी शांति प्रस्ताव की समीक्षा पूरी कर चुका है और आज अपना आधिकारिक जवाब मध्यस्थों (Mediators) को सौंप सकता है। यदि ईरान की शर्तें और अमेरिका का प्रस्ताव एक धरातल पर मिलते हैं, तो हफ्तों से जारी यह तनाव हमेशा के लिए खत्म हो सकता है।
क्यों फेल हुए ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ और ‘नौसैनिक घेराबंदी’?
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका को अब समझ आ गया है कि केवल सैन्य ताकत से ईरान को झुकाना मुमकिन नहीं है।
- होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz): अमेरिका ने ईरान के बंदरगाहों की घेराबंदी की ताकि उसकी पकड़ कमजोर हो, लेकिन इसका खास असर नहीं हुआ।
- प्रोजेक्ट फ्रीडम: फंसे हुए जहाजों को निकालने के लिए अमेरिका ने ‘बॉडीगार्ड’ बनने की कोशिश की, लेकिन समुद्री विशेषज्ञों ने इसे जोखिम भरा बताया। इसके बाद ट्रंप ने खुद इस योजना पर ब्रेक लगा दिया।
विवाद की जड़: परमाणु हथियार और शर्तें
बता दें कि यह पूरा संघर्ष 28 फरवरी को तब शुरू हुआ जब अमेरिका इजरायल के साथ युद्ध में सीधे तौर पर शामिल हो गया। अमेरिका का तर्क था कि वह ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकना चाहता है। हालांकि, ईरान लगातार इसे खारिज करता रहा है। अब दोनों पक्ष अपनी-अपनी शर्तों पर लचीला रुख अपनाते दिख रहे हैं।
क्या होगा अगर समझौता हो गया?
अगर आज ईरान का जवाब सकारात्मक रहता है, तो
- कच्चे तेल की कीमतें: वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट आ सकती है।
- खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा: जहाजों की आवाजाही सुरक्षित होगी और युद्ध का खतरा टल जाएगा।
- ट्रंप की कूटनीतिक जीत: राष्ट्रपति चुनाव से पहले ट्रंप इसे अपनी एक बड़ी अंतरराष्ट्रीय जीत के रूप में पेश करेंगे।
दुनिया की नजरें अब उन मध्यस्थों पर टिकी हैं जो ईरान का संदेश लेकर वॉशिंगटन पहुंचेंगे। क्या मिडिल ईस्ट से बारूद की गंध खत्म होगी या यह महज एक ‘चुनावी शांति’ है? इसका फैसला अगले कुछ घंटों में हो जाएगा।

