Tuesday - 29 September 2020 - 10:56 PM

क्या अशोक गहलोत का यह बयान राजनीतिक है?

जुबिली न्यूज डेस्क

राजस्थान कांग्रेस में सचिन पायलेट के बगावत के बाद सियासी ड्रामा जारी है। इस ड्रामे में हर दिन नया मोड़ आ रहा है। कल तक सचिन पायलेट के खिलाफ बोलने वाले मुख्यमंत्री अशोक गहलोत अब उन्हें गले लगाने की बात कर रहे हैं। उनका कहना है कि वह कभी भी सचिन के खिलाफ नहीं रहे हैं। इतना ही नहीं उन्होंने यह भी कहा कि वह हमेशा से संसदीय बोर्ड की बैठक में युवाओं की पैरवी करते रहे हैं।

राजस्थान के सियासी ड्रामे में गहलोत नायक बनकर उभरे तो सचिन विलेन। सचिन की बगावत ने उन्हें विलेन बना दिया है। वह हाशिए पर जाते दिख रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों की माने तो सचिन को हाशिए पर पहुंचाने में गहलोत की भूमिका अहम रही है। गहलोत और सचिन के बीच की कड़वाहट जगजाहिर है। आज भले ही वह अपने 40 साल पुराने रिश्ते की दुहाई देकर गले लगाने की बात कर रहे हैं लेकिन उनका यह बयान सिर्फ और सिर्फ राजनीतिक है।

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अशोक गहलोत ने एक साक्षात्कार में सचिन को लेकर बहुत सारी बाते कहीं है। उन्होंने कहा कि जब मैं सांसद बना था तो सचिन सिर्फ 3 साल के थे। हमारा उनके घर आना-जाना था। वापस आएंगे तो सबसे पहले मैं उनको प्यार से गले लगाऊंगा। मेरा उनके प्रति बहुत स्नेह है। राजनीति तो राजनीति है। जिस परिवार के साथ व्यक्तिगत संबंध 40 साल से हों ,आप समझ सकते हैं।

गहलोत के इस बयान पर वरिष्ठ पत्रकार सुरेन्द्र दुबे कहते हैं-राजनीति में कोई सगा नहीं होता। गहलोत का बयान राजनीतिक है। सबसे बड़ा सवाल है कि कल तक सचिन को कटघरे में खड़ा करने वाले गहलोत का आखिर सुर कैसे बदल गया?

आगे वह कहते हैं-गहलोत का सुर ऐसे ही नहीं बदला है। पार्टी हाईकमान के आदेश के बाद अब वह पायलेट से स्नेह दिखा रहे हैं। दूसरी वजह यह है कि अब तो सचिन का मामला हाईकोर्ट में भी चला गया है, इसलिए प्यार दिखाने में कोई हर्ज नहीं है। सभी जानते हैं कि एक ओर वह प्यार दिखा रहे हैं तो दूसरी ओर हाईकमान की तरफ जाने वाली राह को तंग कर रहे हैें।

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राजस्थान की सत्ता में कांग्रेस की सरकार बनने के साथ ही गहलोत और पायलट का मनमुटाव शुरु हुआ। उसी समय से राजस्थान कांग्रेस में दो खेमा बन गया था। समय बीतने के साथ ही गहलोत और पायलेट की दूरी घटने के बजाए और बढ़ती गई।

राजस्थान के सियासी घटनाक्रम और गहलोत के बयान पर वरिष्ठ पत्रकार सुशील वर्मा कहते हैं-चूंकि गहलोत राजनीति के पुराने खिलाड़ी है इसलिए सचिन उनकी जाल में फंस गए। सचिन अनुभव की कमी के चलते गहलोत से मात खा गए।

वह कहते हैं-राजनीति में तो हालात के हिसाब से बयानबाजी होती रहती है। अशोक गहलोत एक ओर गले लगाने की बात कर रहे हैं और दूसरी ओर सचिन की कांग्रेस की सदस्यता खत्म कराने में लगे हुए हैं। उन्हें पायलेट से इतना स्नेह था तो इतनी जल्दी उनको और उनके समर्थकों को विधानसभा अध्यक्ष से नोटिस जारी कराने की जरूरत नहीं थी। वह तो मौके की तलाश में थे। उन्होंने देखा की लोहा गरम है तो हथौड़ा मार दिए।

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