ईरान की ‘साइलेंट’ ताकत: जंग के हफ्तों बाद भी 40% ड्रोन और 60% मिसाइल लॉन्चर सुरक्षित, क्या अब होगा ‘अदृश्य’ युद्ध?

(Quick Look)

  • ड्रोन क्षमता: 40% सक्रिय, 70% तक रिकवरी की संभावना।
  • मिसाइल लॉन्चर: 60% सक्रिय (100 नए सिस्टम सुरंगों से बाहर आए)।
  • रणनीतिक बदलाव: बारूदी सुरंगों की जगह अब मिसाइल और ड्रोन पर निर्भरता।
  • खामेनेई फैक्टर: पुराने नेतृत्व की सावधानी के मुकाबले नया नेतृत्व अधिक आक्रामक।

तेहरान/वॉशिंगटन। अमेरिका के साथ जारी भीषण तनाव के बीच ईरान की सैन्य शक्ति को लेकर एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। अमेरिकी खुफिया विभाग और सैन्य अधिकारियों के दावों ने पश्चिमी देशों की चिंता बढ़ा दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, हफ्तों तक चले हमलों के बावजूद ईरान का ‘किलर ड्रोन’ बेड़ा और मिसाइल नेटवर्क अब भी काफी हद तक सुरक्षित है।

सुरंगों से निकला ईरान का ‘प्लान-B’

न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने अपनी ताकत को नष्ट होने से बचाने के लिए ‘बंकर कूटनीति’ का सहारा लिया है।

  • मिसाइल रिकवरी: युद्धविराम के दौरान ईरान ने अपनी गुप्त सुरंगों और भूमिगत बंकरों से लगभग 100 मिसाइल सिस्टम बाहर निकाल लिए हैं। इससे उसकी मारक क्षमता युद्ध से पहले के मुकाबले 60% तक वापस बहाल हो गई है।
  • ड्रोन बेड़ा: ईरान के पास अभी भी 40% अटैकिंग ड्रोन मौजूद हैं। यदि मरम्मत का काम जारी रहा, तो वह जल्द ही अपनी 70% ड्रोन शक्ति हासिल कर सकता है।

अयातुल्ला खामेनेई की मौत और बदली हुई रणनीति

विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार ईरान का रुख पिछले साल (जून 2025) की तुलना में कहीं अधिक आक्रामक है।

बड़ा बदलाव: पिछले साल इजरायली हमलों के समय अयातुल्ला अली खामेनेई ने सावधानी बरतते हुए होर्मुज स्ट्रेट को बंद नहीं किया था। लेकिन वर्तमान युद्ध के पहले ही दिन उनकी मृत्यु ने ईरान के नेतृत्व को ‘आर-पार’ की लड़ाई के लिए उकसा दिया है। ईरान को अब लगता है कि अमेरिका और इजराइल का अंतिम लक्ष्य उनके अस्तित्व को मिटाना है।

1980 के दशक की ‘टैंकर वॉर’ से सीख

इतिहास गवाह है कि ईरान ने 1980 के दशक में इराक युद्ध के दौरान होर्मुज में बारूदी सुरंगें बिछाई थीं। लेकिन 2026 में ईरान का तरीका बदल चुका है..

  1. सटीक मार: बारूदी सुरंगों के बजाय अब ईरान गाइडेड मिसाइलों का इस्तेमाल कर रहा है।
  2. ड्रोन स्वार्म्स: जहाजों को निशाना बनाने के लिए आत्मघाती ड्रोन्स की नई रणनीति अपनाई जा रही है।
  3. रूसी समर्थन: रूस के पूर्व राष्ट्रपति दिमित्री मेदवेदेव ने भी संकेत दिया है कि ईरान की यह रणनीतिक ताकत अमेरिका के लिए बड़ी चुनौती है।

क्या होर्मुज स्ट्रेट बनेगा ‘जहाजों का कब्रिस्तान’?

खुफिया एजेंसियों का मानना है कि ईरान के पास हथियारों का इतना भंडार अब भी बचा है कि वह महीनों तक होर्मुज स्ट्रेट में व्यापारिक जहाजों की आवाजाही को पूरी तरह ठप कर सकता है।

“ईरान ने अपने संसाधनों को जिस तरह बचाकर रखा है, वह बताता है कि वह एक लंबी और थका देने वाली जंग (War of Attrition) की तैयारी कर चुका है। 22 अप्रैल की समयसीमा से पहले ये लॉन्चरों का बाहर आना केवल दिखावा नहीं, बल्कि एक सीधा सैन्य संदेश है।”

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