Wednesday - 12 August 2020 - 7:25 PM

चीन को सबक सिखाने को तैयार भारत, बढ़ी भारतीय राखियों की मांग

जुबिली न्यूज़ डेस्क

नई दिल्ली। गलवान घाटी में सैन्य झड़प के बाद से ही देश में चीनी उत्पादों के बहिष्कार की मुहिम चलाई जा रही है। कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स की अगुवाई में चलाए जा रहे इस अभियान को जोरदार समर्थन मिल रहा है।

कैट का दावा है कि बाजारों में इस बार भारतीय सामान से बनी राखियों की मांग बढ़ गई है। व्यापारी और उपभोक्ता चीन को सबक सिखाने को तैयार हैं और इसकी पहली बानगी रक्षाबंधन पर दिख सकती है। खरीदार चीनी राखियों की बजाय भारतीय सामान से बनी राखियों के लिए अधिक कीमत भी देने को तैयार हैं।

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कैट के मुताबिक पिछले कुछ वर्षों में चीन निर्मित राखी और राखी बनाने के लिए अन्य जरूरी सामान जैसे फोम, मोती, बूंदें, धागा, सजावटी थाली आदि ने भारत के राखी बाजार पर एक तरीके से कब्जा कर लिया है। एक अनुमान के अनुसार राखी के त्यौहार पर देश भर में लगभग 50 करोड़ से ज्यादा राखियां खरीदी जाती हैं।

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प्रतिवर्ष लगभग 6 हजार करोड़ का व्यापार राखी का होता है, जिसमें कई वर्षों से चीन लगभग 4 हजार करोड़ की राखी अथवा राखी का सामान भारत को निर्यात करता आया है और इस बार कैट के हिन्दुस्तानी राखी की घोषणा के बाद चीन को 4 हजार करोड़ के व्यापार का झटका लगना तय है।

कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष बी.सी. भरतिया एवं राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल ने बताया कि चीनी उत्पादों के बहिष्कार के अभियान ने देश में भारतीय व्यापार में नए बड़े अवसर प्रदान किए हैं।

राखी के इस त्यौहार पर देश भर में कारीगरों, स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं, घरों तथा आंगनवाड़ी में काम करने वाली महिलाएं बड़े पैमाने पर कैट के सहयोग से राखियां बना रही हैं और इससे उन्हें न केवल रोजगार मिल रहा है बल्कि अकुशल महिलाओं को अर्ध-कुशल श्रमिकों में परिवर्तित करके उन्हें अधिक से अधिक सजावटी, सुंदर और नए डिजाइन की राखी बनाने के लिए कैट प्रोत्साहित कर रहा है।

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भरतिया और खंडेलवाल का कहना है कि शायद यह पहली बार है कि पारंपरिक राखी बनाने के अलावा, महिलाओं ने नए- नए प्रयोग करते हुए कई अन्य प्रकार की राखियां भी विकसित की हैं जिनमें विशेष रूप से तैयार मोदी राखी, बीज राखी भी शामिल है जिसके बीज राखी के बाद पौधे लगाने के काम में आ सकते हैं।

इस प्रकार से पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए मिट्टी से बनी राखियां, दाल से बनी राखियां, चावल, गेहूं और अनाज के अन्य सामानों से बनी राखियां, मधुबनी पेंटिंग से बनी राखियां, हस्तकला की वस्तुओं से बनी राखियां, आदिवासी वस्तुओं से बनी राखियां आदि भी बड़ी मात्रा में देश के विभिन्न राज्यों में बनाई जा रही हैं।

इस वर्ष भारतीय महिलाओं की वास्तविक प्रतिभा और कला कौशल को विभिन्न प्रकार की राखियों में देखा जा सकता है। इन राखियों की बिक्री में कैट के व्यापारी नेता दिल्ली सहित प्रत्येक राज्य में इन उद्यमी महिलाओं की सहायता कर रहे हैं।

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