Sunday - 15 September 2019 - 7:28 PM

पैरालिसिस से बचना है तो करें ये उपाय

न्यूज डेस्क

पैरालाइसिस यानी लकवा एक ऐसी गंभीर बीमारी है जिसमें मरीज के एक तरफ का अंग सुन्न हो जाता है। और काम करने बंद कर देता है। इससे इंसान अपाहिज हो जाता है। ऐसा अक्सर उन लोगों के साथ ज्यादा ओता है जिनकी 50 वर्ष से अधिक उम्र होती है। हालांकि आज के दौर में ये किसी भी उम्र के लोगों के साथ हो सकता है। इसके होने के कई कारण हो सकते है आइये जानते है उन कारणों को

प्रमुख कारण है

शरीर के अंग दबना

अगर आपके शरीर का कोई भी अंग लगातार अधिक समय तक रहता है तो भी ऐसा हो सकता है दरअसल किसी अंग के लगातार दबने से उस हिस्से पर रक्त प्रवाह सही से नहीं हो पाता है. इसकी वजह से हमारा दिमाग उस हिस्से पर रक्त संचालन को रोक देता है. रक्त संचालन रुकने के बाद उस हिस्से पर नर्वस सिस्टम भी सुन्न हो जाता है इससे वह अंग लकवा ग्रस्त हो जाता है.

अम्लीय पदार्थ का अधिक सेवन

अम्लीय पदार्थ का अधिक सेवन करने पर खून में अम्ल की मात्रा बढ़ जाती है। जिसकी अशुद्धियां धमनियों में ब्लड सर्कुलेशन रुक जाती है और उसमें रक्त प्रवाह बाधित होकर लकवा हो जाता है।

ज्यादा तनाव में रहने से

इसके अलावा इन्सान के ज्यादा तनाव रहने से भी कभी-कभी मस्तिष्क में खून जम जाता है। जिसके कारण पैरालाइसिस अटैक होने की संभावना अधिक हो जाती है। इसलिए इंसान को ज्यादा चिंता या तनाव में नहीं रहना चाहिए।

अटैक आते ही करें यह उपाय

लकवा होने पर मरीज को तुरंत एक चम्मच शहद में दो लहसुन की कलियों को मिलाकर खिलाएं। इससे लकवा से राहत मिल सकता है। साथ ही अगर कलौंजी के तेल से लकवे वाली जगह पर मालिश करें तो इससे ब्लड सर्कुलेशन सही होने लगता है।

पीड़ित व्यक्ति को मिस्सी रोटी यानी चने का आटा का रोटी शुद्ध घी का प्रचुर मात्रा में सेवन कराना चाहिए। शहद का प्रयोग भी ज्यादा से ज्यादा अच्छा रहेगा। लाल मिर्च गुड़ शक्कर कोई भी अचार दही छाछ, उड़द की दाल से परहेज रखें। फल में सिर्फ चीकू और पपीता ही सेवन कराएं। इसके अलावा और कोई फल न खाए।

लकवाग्रस्त रोगी के लिए गाय या बकरी का दूध व घी, पुराना चावल, गेहूं, तिल, परवल, सहिजन की फली, लहसुन, उड़द या मूंग की दाल, पका अनार, खजूर, मुनक्का, अंजीर, आम, फालसा आदि का सेवन करना, तेल मालिश करना और गर्म जल से स्नान करना व गर्म पानी पीना पथ्य यानि फायदेमंद है।

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