गर्मी के इस तांडव से कैसे बचेंगी आँखें

जुबिली न्यूज़ ब्यूरो

लखनऊ. अप्रैल का आख़री हफ्ता चल रहा है. गर्मी है कि झुलसा डालने को आमादा है. गर्म तारकोल की सड़कें इस तरह से गर्म होकर उबल रही हैं कि जूते-चप्पल भी रहम की भीख मांगने लगे हैं. सर है कि झुलसा जा रहा है. सर पर टोपी भी उतना आराम नहीं पहुंचा पा रही है.

गर्मी के इस तांडव के बीच जब बड़ी उम्र के लोग तबाह हैं तो सोचिए बच्चो की क्या पोजीशन होगी. जब जिस्म के मज़बूत समझे जाने वाले अंग बेचैन हो रहे हैं तो सोचिये आँखों की क्या पोजीशन होगी. आँख जिस्म का सबसे नाज़ुक लेकिन सबसे आवश्यक अंग है. जरा सी भी लापरवाही ज़िन्दगी में अँधेरा भर सकती है.

पिछले दिनों जुबिली टीवी पर ओम दत्त के साथ आँखों के डॉक्टर डॉ. खुर्शीद को बात करते सुना था. डॉ. खुर्शीद ने गर्मी के दौर में आँखों की देखभाल को लेकर कई ज़रूरी बातें बताई थीं. हमने पहले भी आपको आँखों की देखभाल के बारे में आगाह किया है और जब गर्मी झुलसाए दे रही है तो हम आपको फिर आँखों के बारे में कुछ ज़रूरी जानकारियाँ दे रहे हैं.

धूप आँखों को बहुत नुक्सान पहुंचाती है. धूप में निकलने वालों को धूप का चश्मा ज़रूर पहनना चाहिए. जो लोग नज़र का चश्मा लगाते हैं उन्हें चाहिए कि वह अपने चश्मे का ग्लास फोटोक्रोमिक करवा लें. इससे नार्मल लाईट में चश्मा नार्मल नज़र आएगा लेकिन धूप में जाते ही वह काला हो जायेगा. नज़र का चश्मा लगाने वाले मैग्नेटिक ग्लास भी खरीद सकते हैं. बाज़ार में आपके चश्मे के डिजाइन वाले मैग्नेटिक ग्लास आसानी से मिल जायेंगे. यह चश्मे के फ्रेम पर इस तरह से चिपक जाते हैं कि देखने वालों को पता भी नहीं चलता कि नार्मल चश्मे पर रंगीन ग्लास को चिपकाया गया है. चश्मा न सिर्फ आँख को बचाता है बल्कि आँख के आसपास की नाज़ुक त्वचा को भी महफूज़ रखता है.

डॉ. खुर्शीद बताते हैं कि अगर किसी की आँख से गर्मी में पानी आता है तो ऐसे लोगों को डॉक्टर की सलाह लेकर अपनी आँखों में कोई ड्राप डालना चाहिए. बहुत से लोगों की आँखें न तो धुआं बर्दाश्त कर पाती हैं और न ही प्याज कटते वक्त आँखों को बर्दाश्त होता है. ऐसे लोगों को मान लेना चाहिए कि उनकी आँखों में वायरस की शुरुआत हो चुकी है और ऐसे लोगों को जल्दी से जल्दी डॉक्टर से सम्पर्क करना चाहिए ताकि जल्दी से जल्दी उनका इलाज हो सके.

डॉ. खुर्शीद उन बच्चो के लिए खासकर चिंतित रहते हैं जो फैब्रीकेशन की दुकान पर काम करते हैं. वह नंगी आँखों से ही डेंटिंग, पेंटिंग और वेल्डिंग का काम करते रहते हैं. ऐसा काम करने वाले बच्चो की आँखों पर चश्मा ज़रूर होना चाहिए. जो कम उम्र में ही दुकानों पर इस तरह का काम शुरू कर देते हैं उनकी आँखें बहुत जल्दी खराब हो जाती हैं. वह कम उम्र के होते हैं इसलिए वह अपनी आँखों की अहमियत को वक्त रहते नहीं समझ पाते. इसलिए ज़रूरी है कि जो लोग उनसे यह काम करवाते हैं वह बच्चो को काम के वक्त चश्मा भी उपलब्ध करवाएं ताकि बच्चे अपनी आँखों से ज्यादा दिनों तक कम ले सकें.

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